‘खेत बचाओ अभियान’ के बीच राहत, खरीफ सीजन में रासायनिक खाद की मांग घटी

‘खेत बचाओ अभियान’ के बीच राहत, खरीफ सीजन में रासायनिक खाद की मांग घटी

‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत के बीच खरीफ सीजन में रासायनिक खादों की मांग में गिरावट दर्ज की गई है, जिसे सरकार के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. कम बारिश के अनुमान और देर से धान रोपाई के चलते फिलहाल खाद की खपत घट रही है. हालांकि, आने वाले समय में मांग बढ़ने और वैश्विक हालात के कारण खाद सब्सिडी 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है.

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‘खेत बचाओ अभियान’ के बीच राहत, खरीफ सीजन में रासायनिक खाद की मांग घटीखरीफ सीजन में खाद की मांग में गिरावट

'खेत बचाओ अभियान' के बीच एक अच्छी खबर है कि रासायनिक खादों के इस्तेमाल में अभी कुछ कमी दर्ज की जा रही है. एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने बताया है कि खरीफ सीजन के लिए जरूरी 5 प्रमुख पोषक तत्वों (खाद) की मांग में गिरावट दर्ज की गई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए भी खादों की मांग में गिरावट को बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि विदेशी बाजारों में इसके दाम दोगुने तक पहुंच गए हैं और भारत बड़ी मात्रा में खादों का आयात करता है. एक अच्छी खबर ये भी है कि कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक दिन पहले ही महीने भर चलने वाले 'खेत बचाओ अभियान' की शुरुआत की है जिसमें केमिकल खादों के इस्तेमाल को करने है और मिट्टी की सेहत सुधारने पर जोर दिया जाएगा. इस हिसाब से खादों की मांग में कमी को अच्छे संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

देश में खादों की मांग और सप्लाई की स्थिति को लेकर सरकार ने सोमवार को जानकारी दी. उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीने में कुल खाद सब्सिडी का 20 प्रतिशत हिस्सा खर्च हुआ है. उन्होंने कहा, खाद सब्सिडी का पैसा खर्च होने के बाद उर्वरक विभाग, वित्त मंत्रालय से इसकी मांग उठाएगा. 

बारिश कम होने से खादों की मांग घटेगी?

उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में अभी धान की रोपाई शुरू नहीं हुई है और इसके 10 जून के बाद ही तेजी पकड़ने की उम्मीद है. रोपाई में तेजी के साथ ही यूरिया की मांग बढ़ेगी जिसकी तैयारी सरकार ने पहले ही कर ली है. इस बीच कुछ राज्य सरकारों ने किसानों से अपील की है कि वे 10 जून के बाद ही धान की खेती शुरू करें ताकि मॉनसून की चाल का सही-सही पता चल सके और बारिश की पूरी स्थिति साफ हो सके.  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल मॉनसून की कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय खरीफ सीजन में खादों की मांग को पहले से कुछ कम कर दिया है. बारिश कम होगी तो फसलों की बुवाई भी कम होगी, ऐसे में खादों की मांग घटेगी.

खाद में गिरावट सरकार के लिए राहत

2026-27 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खाद सब्सिडी के लिए 1,70,944.53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, जिसमें यूरिया क्षेत्र (घरेलू और आयातित दोनों) के लिए 1,16,805 करोड़ रुपये, फास्फोरस (P) और पोटाश (K) क्षेत्रों के लिए 54,000 करोड़ रुपये शामिल हैं. 2025-26 में, खाद सब्सिडी 1,86,630.63 करोड़ (संशोधित अनुमान) रुपये निर्धारित की गई थी, जो 1 मार्च से ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम में हुई वृद्धि के चलते अब बढ़ गई है. इन सभी घटनाक्रमों के बीच खाद की मांग में कमी आना, सरकार के लिए राहत भरी खबर है. हालांकि फसल पैदावार के मोर्चे पर इसे अच्छा नहीं माना जा सकता क्योंकि पोषक तत्वों में कमी का सीधा असर उत्पादन पर देखा जा सकता है.

3 लाख करोड़ रुपये होगी खाद सब्सिडी

जानकारों का कहना है कि खादों की मांग में कमी इसलिए दर्ज हो रही है क्योंकि अभी बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है. बारिश शुरू होते ही किसान खादों की लाइनों में टूट पड़ेंगे और देश के हर कोने से किल्लत की खबरें आने लगेंगी. इस बार प्री-मॉनसून की बारिश भी कम है जिसकी मदद से धान का बिचड़ा डालने में आसानी होती है. मॉनसून के पहले होने वाली यह बारिश खेत में नमी पैदा करती है जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आती है. इसके बाद ही खादों की मांग बढ़ती है. इस बार पूरा सिक्वेंस गड़बड़ है. ऐसी भी रिपोर्ट है कि अगर पश्चिम एशिया का तनाव जारी रहा तो भारत की खाद सब्सिडी 3 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकती है. युद्ध के पहले इसका अनुमान 2 लाख करोड़ से भी कम था, लेकिन आयात महंगा होने और कच्चे माल की महंगाई इसे 3 लाख करोड़ तक पहुंचा सकती है.   

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