गया जी में खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों काे मिली ट्रेनिंग (AI- तस्वीर)बिहार में मिट्टी की सेहत बचाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए चलाए जा रहे 'खेत बचाओ अभियान' के तहत गया जिले में किसानों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की टीम ने 2 जून को टनकुप्पा प्रखंड के गजाधरपुर और बरसौना गांवों में जाकर किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी. यह कार्यक्रम किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करने और प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए आयोजित किया गया था. ICAR के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मणिभूषण, वैज्ञानिक डॉ. घौस अली और कृषि विज्ञान केंद्र, गया के डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को सरल भाषा में समझाया कि मिट्टी की सेहत कैसे बनाए रखी जा सकती है.
कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व, मिट्टी का सही नमूना लेने की विधि, संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद, गोबर और गोमूत्र आधारित खेती व रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई.
वैज्ञानिकों ने बताया कि मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ने से फसल की पैदावार घट रही है और किसानों की लागत बढ़ रही है. किसानों को प्रेरित किया गया कि वे मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही खाद का उपयोग करें, ताकि फसल की उत्पादकता बढ़े और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहे.
दोनों गांवों में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 110 किसानों ने उत्साह के साथ भाग लिया. किसानों ने वैज्ञानिकों से अपनी समस्याएं साझा कीं और मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक खेती तथा सरकारी योजनाओं को लेकर कई सवाल पूछे.
किसानों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके लिए बहुत उपयोगी साबित हो रहे हैं. उन्होंने संकल्प लिया कि वे अब मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड बनवाकर खेती करेंगे और रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करेंगे.
ICAR के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में कहा कि मिट्टी हमारी मां है. उसे स्वस्थ रखना हर किसान का दायित्व है. 'खेत बचाओ अभियान' के तहत पूरे जून महीने में राज्य के हर कोने में ऐसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि बच सके.
यह कार्यक्रम बिहार सरकार के 'खेत बचाओ अभियान' का हिस्सा है, जो पूरे राज्य में मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. गया जिले में आयोजित यह कार्यक्रम अभियान की सफलता की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हुआ.
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