पंजाब में जहां रबी सीजन की बुवाई का समय अपने पीक पर है. वहीं, कई जगहों से किसानों को खाद विक्रेताओं की ओर से जबरन गैर-जरूरी खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है. इसका असर अमृतसर में देखने को मिला जहां, किसान संगठन के लोगों ने कृषि अधिकारी के कार्यालय सामने धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया.
भगवंत मान ने इस दौरान कहा कि पंजाब के किसानों को हाल ही में आई बाढ़ में भारी नुकसान हुआ है, जिसके चलते राज्य सरकार ने उन्हें 74 करोड़ रुपये मूल्य के दो लाख क्विंटल बीज मुफ्त उपलब्ध कराने का फैसला किया है. सीएम मान ने कहा कि पंजाब के किसान बाढ़ के कारण बड़े संकट का सामना कर रहे हैं.
पंजाब के किसान डीएपी उर्वरक की भारी कमी की शिकायत कर रहे हैं. सहकारी समिति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बहादुर सिंह ने बताया कि 3520 समितियों में से ज़्यादातर के पास अपने सदस्यों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त डीएपी स्टॉक नहीं है.
आम आदमी पार्टी से सांसद मालविंदर सिंह कंग ने किसानों को उर्वरक के साथ जबरन ‘बूस्टर’ बेचने का मुद्दा उठाया है. उन्होंने केंद्र से ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय फ्रेमवर्क बनाने, डिजिटल निगरानी, सख्त दंड और शिकायत निवारण प्रणाली की मांग की है.
जालंधर कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष इंतजाम किए, किसानों को सब्सिडी पाने के लिए आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य. बाढ़ से बर्बाद किसानों को सरकार ने दी बड़ी राहत.
Punjab Free Wheat Seeds Distribution: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि बाढ़ में फसल गंवाने वाले किसानों को रबी बुवाई के लिए मुफ्त गेहूं बीज मिलेगा. बाढ़ से पांच लाख एकड़ जमीन पर फसलें नष्ट हुईं हैं
पंजाब सरकार ने नकली बीज बेचने को गैर-जमानती अपराध घोषित कर ‘बीज (पंजाब संशोधन) विधेयक 2025’ को मंजूरी दी है. कंपनियों और डीलरों को पहली और दोबारा गलती पर अब लाखों का जुर्माना और जेल की सजा होगी, जिससे बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी.
किसान कुलबीर सिंह ने कहा, मक्का न केवल अनाज फसल के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि पशुओं के लिए चारे का भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है. किसान खास तौर पर मक्का के बीज की बढ़ती कीमत को लेकर चिंतित हैं. चार किलोग्राम का पैकेट, जो कभी 2,000 रुपये में मिलता था, अब 3,000 रुपये में बिक रहा है. इस बढ़ोतरी ने प्रति एकड़ 2,000 रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला है, क्योंकि एक एकड़ मक्का बोने के लिए दो पैकेट की जरूरत होती है.
रबी सीजन की शुरूआत के साथ ही खाद की मांग बढ़ जाती है. पंजाब में भी किसानों को खाद की जरूरत है, लेकिन कम आपूर्ति के चलते किसान निजी डीलरों से महंगे दाम पर खाद खरीद रहे हैं. किसानों ने कहा है कि उन्हें डीएपी के साथ एक अन्य खाद बंडल पैकेज के रूप में बेची जा रही है. जिससे उनकी लागत बढ़ रही है.
पंजाब सरकार ने इस बार रबी सीजन के लिए 5.5 लाख मीट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता बताई थी. जबकि केंद्रीय पूल से राज्य को 4.68 लाख मीट्रिक टन डीएपी का आवंटन किया गया.
बठिंडा के बाजक गांव के एक अन्य गेहूं उत्पादक बलदेव सिंह ने कहा कि खाद न तो सहकारी दुकानों पर उपलब्ध है और न ही निजी दुकानों पर. बठिंडा के मुख्य कृषि अधिकारी (सीएओ) जगसीर सिंह ने कहा कि जिले को रबी फसलों के लिए 42,000 टन की जरूरत है, जबकि केवल 9,100 टन की आपूर्ति की गई है.
बायो-फर्टिलाइजर लैब में केएसबी लिक्विड फॉर्म्युलेशन, जिंक स्टेबलाइजिंग बैक्टीरिया लिक्विड फॉर्म्युलेशन, एनपीके लिक्विड, एएम फंगी, आईएआरआई कंपोस्ट, ट्राइकोडर्मा विर्डी जैसी खाद तैयार की जाएगी. पंजाब सरकार के मुताबिक, ये ऑर्गेनिक खाद हर जिले में बेहद कम रेट पर किसानों को मुहैया कराई जाएगी.
पंजाब में मौजूदा गेहूं की फसल के लिए लगभग 14.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है. अभी चल रहे रबी सीजन के लिए फरवरी शुरुआत में यूरिया (urea shortage) की मांग बंद होगी. अभी यूरिया और डीएपी की कमी से किसान परेशान हैं और उन्हें प्राइवेट दुकानों से महंगे रेट पर खरीद करनी पड़ रही है.
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