
खेती-किसानी के मौसम में किसानों को अक्सर नकली खाद, कालाबाजारी और उर्वरकों की कृत्रिम कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.इन चुनौतियों से निपटने और किसानों तक गुणवत्तापूर्ण उर्वरक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार ने एक नई पहल शुरू की है.कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा ‘सूचनादाता प्रोत्साहन योजना-2026’ लागू की गई है, जिसके तहत उर्वरकों से जुड़ी अनियमितताओं की सूचना देने वाले नागरिकों को सफल कार्रवाई होने पर ₹1000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
सरकार का मानना है कि आम नागरिकों और किसानों की भागीदारी से नकली खाद तथा कालाबाजारी के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से तोड़ा जा सकता है.
प्रदेश में हर वर्ष खेती के सीजन के दौरान उर्वरकों की मांग बढ़ जाती है. इसी दौरान कुछ असामाजिक तत्व नकली खाद बेचने, उर्वरकों का अवैध भंडारण करने या निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने जैसी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं.
इन अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने सूचनादाता प्रोत्साहन योजना लागू की है. योजना के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के आधार पर प्रशासन त्वरित जांच और कार्रवाई करेगा.
यह योजना 20 मई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी. इस अवधि में प्रदेश के किसी भी जिले से उर्वरकों से संबंधित शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं.
सरकार को उम्मीद है कि इस दौरान अधिक से अधिक लोग आगे आकर अनियमितताओं की जानकारी देंगे, जिससे किसानों को राहत मिलेगी और उर्वरक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी.
योजना के तहत निम्न प्रकार की शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं—
किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी सीएम किसान हेल्पलाइन 155253 पर दी जा सकती है.हेल्पलाइन कार्यदिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित रहेगी.शिकायत प्राप्त होने के बाद संबंधित जिले के अधिकारियों को जांच के लिए मामला भेजा जाएगा.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रभावी कार्रवाई के लिए शिकायत के साथ यथासंभव प्रमाण भी उपलब्ध कराना होगा.
शिकायतकर्ता को निम्न जानकारी देनी होगी—
प्रत्येक शिकायत की जांच संबंधित जिले के कलेक्टर की निगरानी में गठित दल द्वारा की जाएगी. जांच में आरोप सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल प्रमाणित मामलों में ही की जाएगी, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी न हो.
यदि शिकायत सही साबित होती है और उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई की जाती है, तो सूचना देने वाले व्यक्ति को प्रति सूचना ₹1000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी.यह राशि सीधे सूचनादाता के बैंक खाते में जमा की जाएगी.
योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि शिकायतकर्ता की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, पता या अन्य व्यक्तिगत जानकारी किसी भी स्तर पर सार्वजनिक नहीं की जाएगी.इस व्यवस्था से लोग बिना किसी भय या दबाव के अनियमितताओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नकली और मिलावटी उर्वरक किसानों की लागत बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन को भी प्रभावित करते हैं.ऐसे में सरकार की यह पहल केवल निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं करेगी, बल्कि किसानों और नागरिकों को भी कृषि व्यवस्था में भागीदार बनाएगी.‘सूचनादाता प्रोत्साहन योजना-2026’ के जरिए मध्यप्रदेश सरकार ने यह संदेश दिया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब प्रशासन और आम जनता मिलकर कार्रवाई करेंगे.
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