खाद क्षेत्र में न्यूट्रिएंट यूज एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर, FICCI के कार्यक्रम में एक्‍सपर्ट ने दिए ये सुझाव

खाद क्षेत्र में न्यूट्रिएंट यूज एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर, FICCI के कार्यक्रम में एक्‍सपर्ट ने दिए ये सुझाव

देश में उर्वरकों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए फिक्की के कार्यक्रम में ‘न्यूट्रिएंट यूज एफिशिएंसी’ बढ़ाने पर जोर दिया गया. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. महेंद्र देव ने ‘न्यूट्रिएंट क्रेडिट सिस्टम’ बनाने का सुझाव दिया, जिसमें किसानों को मिट्टी सुधार और संतुलित पोषण अपनाने पर प्रोत्साहन मिल सके.

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खाद क्षेत्र में न्यूट्रिएंट यूज एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर, FICCI के कार्यक्रम में एक्‍सपर्ट ने दिए ये सुझावफिक्‍की के कार्यक्रम में शामिल एक्‍सपर्ट्स

एक्‍सपर्ट्स ने भारत में कृषि को ज्‍यादा टिकाऊ और जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए उर्वरक इस्‍तेमाल के तरीके में बदलाव की जरूरत बताई है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. महेंद्र देव ने कहा कि अब कृषि को केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि आय, संसाधन दक्षता और टिकाऊ विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा. फिक्की की ओर से आयोजित ‘इंडिया इनोवेटिव क्रॉप न्यूट्रिशन कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए प्रोफेसर देव ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में विकसित राष्ट्र बनना, समावेशी विकास सुनिश्चित करना और इन उद्देश्यों को टिकाऊ एवं जलवायु-अनुकूल तरीकों से हासिल करना शामिल है. 

वैल्‍यू एडिशन आधारित मॉडल पर आगे बढ़ना होगा

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की सोच को उत्पादन आधारित मॉडल से आगे बढ़ाकर वैल्‍यू एडिशन आधारित मॉडल की ओर ले जाना होगा. कृषि में कटाई के बाद की गतिविधियों, मार्केटिंग और फूड प्रोसेसिंग को अधिक महत्व देना होगा, ताकि किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ सकें. साथ ही छोटे किसानों को इनपुट और उत्पाद मार्केटिंग में सहयोग देने के लिए किसान उत्पादक संगठन और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत है.

उर्वरकों की खपत पर बात करते हुए प्रोफेसर देव ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि अब समय सब्सिडी आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर प्रोत्साहन आधारित मॉडल अपनाने का है. उन्होंने नीम कोटेड यूरिया, उर्वरक डीबीटी, सॉयल हेल्थ कार्ड, नैनो यूरिया, पीएम-प्रणाम, प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन और न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी जैसी पहलों को सही दिशा में उठाए गए कदम बताया.

‘राष्ट्रीय न्यूट्रिएंट यूज एफिशिएंसी पहल’ शुरू करने का सुझाव

उन्होंने सुझाव दिया कि देश में एक ‘राष्ट्रीय न्यूट्रिएंट यूज एफिशिएंसी पहल’ शुरू की जानी चाहिए, जिसमें उर्वरक की मात्रा के बजाय उससे मिलने वाली उत्पादकता को प्राथमिकता दी जाए. इसके साथ ही ‘न्यूट्रिएंट क्रेडिट सिस्टम’ विकसित करने का विचार भी रखा गया. इस मॉडल में किसान और कृषि इनपुट कंपनियां मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने और संतुलित सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग के आधार पर सत्यापित वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त कर सकेंगी.

प्रोफेसर देव ने कहा कि फसल पोषण को ईएसजी निवेश के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए. इसके लिए जैविक और बायोस्टिमुलेंट उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु सार्वजनिक और निजी भागीदारी वाले वित्तीय मॉडल की जरूरत होगी. उन्होंने फिक्की से कृषि, एग्री-टेक और नवाचार क्षेत्र के बीच साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया.

कृषि आयुक्‍त ने नियामक व्‍यवस्‍था को लेकर दिया बयान

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह ने कहा कि किसी भी नई तकनीक की सफलता का मूल्यांकन मौजूदा कृषि पद्धतियों की तुलना में किसानों को मिलने वाले वास्तविक लाभ के आधार पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि नियामक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो नवाचार को बढ़ावा दे और किसानों के हितों की रक्षा भी करे. फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि विज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित साझेदारी भारतीय कृषि को अधिक मजबूत बनाएगी.

वहीं, फिक्की टास्क फोर्स ऑन इनोवेटिव क्रॉप न्यूट्रिशन के चेयरमैन और यारा इंडिया के प्रबंध निदेशक संजीव कंवर ने कहा कि गैर-सब्सिडी वाले नवाचार आधारित उर्वरकों का उपयोग बढ़ने से मिट्टी की सेहत बेहतर होगी और पारंपरिक उर्वरकों पर दबाव कम होगा. फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा कि निजी क्षेत्र को उत्पाद नवाचार, खेत स्तर पर परीक्षण और किसानों से जुड़ाव बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी.

कार्यक्रम के दौरान फिक्की और यस बैंक की संयुक्त रिपोर्ट ‘इनोवेटिव क्रॉप न्यूट्रिशन: अनलॉकिंग प्रोडक्टिविटी, प्रॉफिटेबिलिटी एंड रेजिलिएंस इन इंडियन एग्रीकल्चर’ भी जारी की गई. यस बैंक के फूड एंड एग्रीबिजनेस स्ट्रेटेजिक एडवाइजरी एंड रिसर्च प्रमुख सुंजय वुप्पुलुरी ने कहा कि भारत को उर्वरक केंद्रित सोच से आगे बढ़कर एकीकृत फसल पोषण प्रबंधन मॉडल अपनाने की जरूरत है.

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