राजस्थान में नकली पोटाश बनाने का खुलासा! कृषि मंत्री के छापे में मिली गड़बड़ी, कंपनियों पर होगी कार्रवाई

राजस्थान में नकली पोटाश बनाने का खुलासा! कृषि मंत्री के छापे में मिली गड़बड़ी, कंपनियों पर होगी कार्रवाई

कृषि मंत्री ने जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) स्थित उर्वरक इकाई का निरीक्षण किया. छापेमारी में सामने आया कि एक सीलबंद फैक्टरी में कथित तौर पर नमक के कचरे का इस्तेमाल कर म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था और इसे किसानों को पोटाश खाद के नाम पर बेचा जा रहा था.

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राजस्थान में नकली पोटाश बनाने का खुलासा! कृषि मंत्री के छापे में मिली गड़बड़ी, कंपनियों पर होगी कार्रवाईकृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा

राजस्थान में किसानों को मिलने वाले उर्वरकों की क्वालिटी को लेकर बड़ा मामला सामने आया है. दरअसल, राज्य के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर में तीन उर्वरक इकाइयों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कृषि उत्पादों के निर्माण और बिक्री में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं. अधिकारियों को जांच के दौरान कथित तौर पर नकली पोटाश बनाने और बिना अनुमति वाले कृषि उत्पादों की बिक्री के सबूत मिले हैं.

कृषि मंत्री ने जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) स्थित उर्वरक इकाई का निरीक्षण किया. छापेमारी में सामने आया कि एक सीलबंद फैक्टरी में कथित तौर पर नमक के कचरे का इस्तेमाल कर म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था और इसे किसानों को पोटाश खाद के नाम पर बेचा जा रहा था.  डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इस मामले को किसानों के साथ धोखाधड़ी बताते हुए अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि नकली और घटिया कृषि सामग्री से किसानों की मेहनत, फसल उत्पादन और आय पर सीधा असर पड़ता है,

उर्वरक उत्पादों में मिली कई खामियां

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कई कृषि उत्पादों की जांच की. इस दौरान कुछ उत्पादों पर उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) 1985 के अनुसार जरूरी जानकारी नहीं मिली. कई पैकेट और उत्पादों पर निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और अन्य अनिवार्य विवरण दर्ज नहीं थे. अधिकारियों ने बताया कि ऐसी कमियों से उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी पहचान को लेकर सवाल खड़े होते हैं. किसानों तक सही और प्रमाणित उर्वरक पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि फसल उत्पादन और मिट्टी की क्वालिटी प्रभावित न हो.

बिना अनुमति बिक्री का आरोप

कृषि विभाग की टीम ने जयपुर के रोड नंबर-7 स्थित समृद्धि सर्विसेज के C&F (कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग) गोदाम की भी जांच की. यहां कथित तौर पर बिना अनुमति बायो-स्टिमुलेंट्स की सप्लाई किए जाने की बात सामने आई. इसके अलावा चित्तारी एग्री केयर में भी निरीक्षण के दौरान बिना जरूरी अनुमति के जैव-उत्तेजक और अन्य कृषि उत्पादों के भंडारण और बिक्री का मामला सामने आया. अधिकारियों को एक गोदाम में बिना लाइसेंस वाला तरल उर्वरक भी मिला.

सब्सिडी में गड़बड़ी की भी जांच

जांच अधिकारियों को आशंका है कि कुछ उत्पादों पर सरकारी सब्सिडी का गलत तरीके से दावा किया गया हो सकता है. केंद्र सरकार कई उर्वरक उत्पादों पर किसानों को राहत देने के लिए सब्सिडी देती है. अब यह जांच की जा रही है कि जब्त किए गए उत्पादों से जुड़ी सब्सिडी में कोई गड़बड़ियां हुई है या नहीं.

कंपनियों पर होगी कानूनी कार्रवाई

निरीक्षण के बाद कृषि मंत्री ने संदिग्ध उर्वरक उत्पादों की बिक्री रोकने के निर्देश दिए हैं. साथ ही सभी उत्पादों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा. जो भी कंपनियां नियमों का उल्लंघन करती पाई जाएंगी, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. कृषि विभाग जल्द ही राज्यभर में नकली उर्वरक, अवैध भंडारण और बिना लाइसेंस कृषि उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है.

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. नकली और घटिया कृषि सामग्री बेचने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी. ऐसे उत्पाद न केवल किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि लंबे समय में मिट्टी की उर्वरता पर भी बुरा असर डाल सकते हैं. 

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