खाद आयात (सांकेतिक फोटो)देशभर में खरीफ सीजन की बुवाई के बीच किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बीच रासायनिक खाद लेकर आने वाले 4 बड़े मालवाहक जहाज सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. इन जहाजों में यूरिया, डीएपी और सल्फर की खेप शामिल है, जो देश में खाद उपलब्धता को और मजबूत करेगी. रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि ये जहाज अलग-अलग भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचेंगे. इनमें कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा शामिल हैं. जहाजों के पहुंचते ही खाद की खेप को उतारकर वितरण व्यवस्था में शामिल किया जाएगा, ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, 22 जून 2026 तक देश में कुल रासायनिक खाद का उपलब्ध स्टॉक 196.08 लाख टन दर्ज किया गया है. यह पिछले साल की समान अवधि के 168.67 लाख टन के मुकाबले अधिक है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यूरिया का स्टॉक 81.44 लाख टन, डीएपी 20.92 लाख टन, एनपीके 55.91 लाख टन, एमओपी 12.68 लाख टन और एसएसपी 25.13 लाख टन पर पहुंच गया है. इससे संकेत मिलता है कि खरीफ सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है.
कृषि गतिविधियों में तेजी के बीच 1 मार्च 2026 से 21 जून 2026 तक देश में कुल 153.4 लाख टन खाद की बिक्री दर्ज की गई है. यह पिछले साल की समान अवधि के 140.2 लाख टन से 13.2 लाख टन अधिक है. बिक्री के आंकड़ों में यूरिया की हिस्सेदारी 79.1 लाख टन रही, जबकि एनपीके की 34.8 लाख टन और डीएपी और टीएसपी की संयुक्त बिक्री 19.8 लाख टन रही.
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के बीच सरकार ने घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और आयात व्यवस्था को साथ लेकर काम किया है. इसी अवधि में देश में 133.12 लाख टन खाद का घरेलू उत्पादन दर्ज किया गया. वहीं, भारतीय बंदरगाहों पर 43.69 लाख टन खाद की आयातित खेप पहुंची. सरकार का मानना है कि घरेलू उत्पादन और आयात का यह संतुलन किसानों तक नियमित आपूर्ति बनाए रखने में मदद करेगा.
सरकार ने हालिया वैश्विक निविदा प्रक्रिया के तहत 17.70 लाख टन यूरिया का अनुबंध किया है. इसके साथ खरीफ सीजन के लिए 90 लाख टन से ज्यादा यूरिया और पी एंड के श्रेणी के उर्वरकों की आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जा चुकी है. इसके लिए विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों के सहयोग से कई देशों से आपूर्ति चैनल तैयार किए गए हैं.
भारत ने यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड से सुनिश्चित की है. वहीं, डीएपी और एनपीके की खेप रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब समेत कई देशों से लाई जा रही है. सरकार का कहना है कि राज्यों, वितरण एजेंसियों और सहकारी संस्थाओं के साथ मिलकर खाद उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है.
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