धान की सीधी बुवाईखरीफ सीजन की शुरुआत होते ही देश में धान की बुवाई की तैयारियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में किसानों को कम पानी, कम मजदूरी और कम लागत में बेहतर उत्पादन दिलाने के लिए बिहार कृषि विभाग लगातार धान की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice-DSR) तकनीक को बढ़ावा दे रहा है. कृषि विभाग ने किसानों के लिए धान की सीधी बुवाई के दौरान अपनाई जाने वाली महत्वपूर्ण सावधानियों और तकनीकी सुझावों की जानकारी साझा की है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान इन सुझावों का पालन करें तो वे न केवल खेती की लागत घटा सकते हैं, बल्कि फसल की पैदावार में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं.
धान की सीधी बुवाई के लिए ऐसा खेत चुनें, जहां बारिश का पानी जमा न हो और खेत बराबर समतल हो. अगर खेत ऊंचा-नीचा है, तो बुवाई से पहले उसे लेजर लेवलर की मदद से समतल कर लें. इससे खेत में पानी और खाद सभी जगह बराबर पहुंचती है, जिससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ता है.
अगर खेत में खरपतवार उग आए हैं, तो धान की बुवाई से 1-2 दिन पहले उन्हें नियंत्रित करना जरूरी है. इसके लिए ग्लूफोसिनेट अमोनियम दवा का छिड़काव करें. कृषि विभाग की सलाह है कि 1 लीटर पानी में 5 मिली दवा मिलाकर घोल तैयार करें और प्रति एकड़ करीब 200 लीटर पानी में इसका छिड़काव करें. इससे खरपतवार नष्ट हो जाते हैं और फसल की शुरुआती बढ़वार बेहतर होती है.
धान की सीधी बुवाई में कितने बीज की जरूरत होगी, यह बीज के आकार पर निर्भर करता है. यदि बीज मोटा है तो प्रति एकड़ करीब 12 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है, जबकि महीन बीज के लिए 8 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ काफी है. आमतौर पर किसान एक एकड़ खेत में 8 से 12 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल कर सकते हैं.
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि धान की सीधी बुवाई जीरो टिलेज मशीन से की जाए. बुवाई के समय 10 किलोग्राम बीज के साथ 50 किलोग्राम डीएपी प्रति एकड़ मिलाकर उपयोग करने से शुरुआती बढ़वार बेहतर होती है.
धान की सीधी बुवाई करते समय बीज को 1 से 2 सेंटीमीटर गहराई पर ही बोना चाहिए. इससे बीज आसानी से अंकुरित होते हैं और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है. अगर बीज को ज्यादा गहराई में बो दिया जाए, तो उसका अंकुरण कमजोर पड़ सकता है और फसल पर असर पड़ सकता है.
धान की बुवाई के 15 से 20 दिन बाद खेत में उगने वाले खरपतवारों को नियंत्रित करना जरूरी है. इसके लिए प्रति एकड़ 80-100 मिली बिसपायरीबैक सोडियम और 80-100 ग्राम पाइराजोसल्फ्यूरॉन को 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. साथ ही, दवा के अच्छे असर के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें.
धान की फसल की अच्छी बढ़वार और बेहतर उत्पादन के लिए समय-समय पर खाद का इस्तेमाल करना जरूरी है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई के 25 से 30 दिन बाद प्रति एकड़ 40 किलो यूरिया, 30 किलो एमओपी (पोटाश) और 10 किलो जिंक सल्फेट डालें. इसके बाद 50 दिन पर 50 किलो यूरिया प्रति एकड़ का प्रयोग करें. वहीं, फसल की जरूरत को देखते हुए 70 दिन बाद 25 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालें. सही समय पर उर्वरकों का उपयोग करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और पैदावार बढ़ती है.
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