जुलाई में खेती के टिप्स (AI- तस्वीर)जुलाई का महीना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून सक्रिय रहता है और खरीफ फसलों की बुवाई और रोपाई का काम तेजी से चलता है. धान की रोपाई, मक्का, बाजरा और चारा फसलों की बुवाई के साथ-साथ नर्सरी प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण जैसे कई खेती-किसानी से जुड़े कामों पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है. समय पर किए गए ये काम फसल की अच्छी बढ़वार और अधिक उत्पादन में मदद करते हैं. किसानों की इसी जरूरत को देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने जुलाई महीने में किए जाने वाले कृषि कार्यों के लिए सलाह जारी की है. ऐसे में जुलाई के 15 दिन बीत जाने के बाद आइए जानते हैं कि किसान किन-किन फसलों में कौन से जरूरी काम करें.
1. खरीफ धान की रोपाई करें: किसान समय पर खरीफ धान की रोपाई शुरू कर दें. जिन किसानों ने धान की पौध तैयार कर ली हैं वे पौधे तैयार होने के बाद बिचड़े उखाड़ने से करीब एक सप्ताह पहले पौधशाला में कीट नियंत्रण के लिए कपूर 25 किलो या कार्बोफ्यूरान 3जी/अन्य अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग निर्धारित मात्रा के अनुसार करें. इससे पौधों को शुरुआती अवस्था में कीटों से सुरक्षा मिलती है.
2. पपीते के पौधों की रोपाई करें: बरसात का मौसम पपीते के पौधों की रोपाई के लिए भी सबसे उपयुक्त माना जाता है. किसान केवल स्वस्थ और रोगमुक्त पौधों का ही चयन करें. पौधा लगाने के लिए 45×45×45 सेंटीमीटर का गड्ढा तैयार करें. पौधे को सीधा खड़ा करके गड्ढे में लगाएं, मिट्टी को अच्छी तरह दबाएं और रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई जरूर करें. सही तरीके से रोपाई करने पर पौधों की बढ़वार बेहतर होती है, जल्दी फल लगते हैं, रोग और कीटों का प्रकोप कम होता है और अधिक उत्पादन से किसानों की आय बढ़ती है.
3. पौधों का करें ग्राफ्टिंग: यदि किसान फलदार बाग लगाना चाहते हैं या पुराने बागों का विस्तार करना चाहते हैं, तो जुलाई में ग्राफ्टिंग, स्टूलिंग और एयर लेयरिंग जैसे काम शुरू कर सकते हैं. इन तकनीकों से अच्छी क्वालिटी वाले पौधे तैयार होते हैं, नई किस्मों का तेजी से विस्तार होता है, पौधे अधिक मजबूत बनते हैं और जल्दी फल देने लगते हैं.
4. चारा फसलों की बुवाई करें: पशुपालन करने वाले किसानों के लिए भी जुलाई का महीना काफी महत्वपूर्ण होता है. इस समय खरीफ चारा फसलों की बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए. नेपियर बाजरा, ज्वार, मक्का जैसी फसलें समय पर बोने से पशुओं को सालभर पौष्टिक हरा चारा मिलता है. इससे दूध उत्पादन बढ़ता है, चारे की क्वालिटी बेहतर होती है, पशुओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और चारे पर होने वाला खर्च भी कम होता है.
5. सब्जियों का करें बीजोपचार: सब्जी उत्पादक किसानों को बीजोपचार के बाद मिर्च, टमाटर और अगात गोभी के बीज नर्सरी तैयार करनी चाहिए. मिर्च की नर्सरी के लिए बीजोपचार करना जरूरी है, जबकि टमाटर की बीज समतल और भुरभुरी मिट्टी में बोएं. वहीं, अगात गोभी के लिए केवल अच्छी क्वालिटी वाले बीजों का उपयोग करें. साथ ही नर्सरी में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें और रोग-कीटों की रोकथाम के लिए नियमित निगरानी करते रहें.
6. संकर बाजरा की करें बुवाई: जुलाई के तीसरे सप्ताह को संकर बाजरा की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. किसान बुवाई के लिए उन्नत और प्रमाणित बीजों का ही प्रयोग करें, खेत की अच्छी जुताई कर उसे भुरभुरा बनाएं और लाइन से लाइन की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर रखें. यदि बारिश न हो तो बुवाई के बाद हल्की सिंचाई अवश्य करें.
7. जिमीकंद की करें खेती: इसी महीने किसान श्रीमीकंद (सूरन/जिमीकंद) की बुवाई भी कर सकते हैं. बरसात के मौसम में इसकी बुवाई करने से कंदों का अच्छा विकास होता है और बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है. उचित जल निकासी वाले खेत में उन्नत बीज सामग्री का उपयोग कर समय पर बुवाई करने से किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान जुलाई महीने में इन सभी कृषि कार्यों को समय पर पूरा करते हैं और वैज्ञानिक सलाह का पालन करते हैं, तो खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी भी हासिल कर सकते हैं.
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