मई में गहरी जुताई के लाभ (Photo- AI)साल भर खेतों से बेहतर पैदावार लेने के लिए मई का महीना बेहद अहम होता है. रबी फसलों की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने के बजाय उनकी गहरी जुताई करना जमीन को सेहतमंद और उपजाऊ बनाने का सबसे अच्छा तरीका है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) पूसा, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवधर मिश्रा के अनुसार, मई महीने में सूरज की सीधी और तेज धूप के कारण दिन का तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इस मौसम में मिट्टी पलटने वाले हल से खेतों की 12 इंच तक गहरी जुताई करके कुछ समय के लिए खुला छोड़ देना चाहिए. ध्यान रहे कि गहरी जुताई का यह काम हर हाल में मई तक जरूर पूरा कर लेना चाहिए, जो आने वाली खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित होता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, जुताई का कार्य सुबह 7 से 11 बजे तक या फिर शाम को 4 से 6 बजे के बीच करना सबसे सही रहता है. इस समय कीटों के प्राकृतिक दुश्मन यानी परभक्षी पक्षी खेतों में ज्यादा सक्रिय होते हैं, जो जुताई के दौरान बाहर निकलने वाले कीड़ों और उनके लार्वा को चुन-चुन कर खा जाते हैं. जुताई हमेशा ढलान के विपरीत दिशा में करनी चाहिए. जुताई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मिट्टी के ढेले बड़े-बड़े रहें और मिट्टी भुरभुरी न होने पाए, ताकि गर्मियों की तेज हवाओं से उपजाऊ मिट्टी उड़ने न पाए. इसके साथ ही, बहुत अधिक रेतीले इलाकों में गर्मी के समय जुताई करने से बचना चाहिए. इस प्रकार की गहरी जुताई हर दो-तीन साल में एक बार खेतों में जरूर की जानी चाहिए.
गर्मियों की गहरी जुताई करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले शत्रु कीट, उनके अंडे और बीमारियों के जीवाणु, जो जमीन के अंदर छिपे रहते हैं वह तेज धूप के संपर्क में आकर पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं. इससे आने वाली फसलों पर कीड़ों का प्रकोप बहुत कम हो जाता है और किसानों का कीटनाशकों पर होने वाला खर्च बचता है. इसके अलावा, खेत में उगे हुए जिद्दी खरपतवार, पौधों की जड़ें और पत्तियां जुताई के कारण मिट्टी में काफी नीचे दब जाती हैं. तेज गर्मी के कारण ये खरपतवार सूखकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे अगली फसल को उगने और फैलने के लिए साफ मैदान मिलता है.
ढलान के विपरीत की गई गहरी जुताई से बनने वाले बड़े-बड़े ढेले हवा और बारिश के पानी से धीरे-धीरे टूटते रहते हैं. यह प्रक्रिया मिट्टी की वर्षा जल को सोखने की क्षमता को बढ़ा देती है, जिससे बारिश का पानी बहने के बजाय जमीन के काफी नीचे तक पहुंच जाता है. इससे न केवल मिट्टी का कटाव रुकता है, बल्कि जमीन के जरूरी पोषक तत्व भी बहने से बच जाते हैं. अनुसंधान के परिणामों से पता चला है कि गर्मी की जुताई करने से भूमि के कटाव में लगभग 66.5% तक की भारी कमी आती है. जमीन के नीचे तक पानी जमा होने के कारण खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, जिससे फसलों को सूखे से सुरक्षा मिलती है और बार-बार सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ती.
गहरी जुताई के लिए मोल्डबोर्ड हल, डिस्क हल, सब सॉयलर या कल्टीवेटर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करना चाहिए. जब गेहूं की कटाई हार्वेस्टर से की जाती है, तो खेतों में फसल के अवशेष (नरवाई) बच जाते हैं. गहरी जुताई से ये अवशेष मिट्टी के नीचे दबकर अच्छी तरह सड़ जाते हैं और कार्बनिक खाद व ह्यूमिक एसिड में बदल जाते हैं, जिससे जमीन में 'जीवांश' की मात्रा बढ़ती है. इससे मिट्टी में हवा का संचार सुधरता है और फसलों को लाभ पहुंचाने वाले सूक्ष्म जीव बढ़ते हैं. जलवायु और सूरज की रोशनी के इस प्राकृतिक प्रभाव से पौधे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को आसानी से भोजन के रूप में ले पाते हैं. समय पर की गई इस जुताई से जल, वायु और मिट्टी का प्रदूषण कम होता है और फसलों की पैदावार में 50 प्रतिशत तक की शानदार बढ़ोतरी देखी जा सकती है.
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