Pink Ballworm: रोजेट फूलों को न करें नजरअंदाज, कपास को बचाने के लिए तुरंत करें ये उपाय

Pink Ballworm: रोजेट फूलों को न करें नजरअंदाज, कपास को बचाने के लिए तुरंत करें ये उपाय

कपास में कलियां और फूल आने के दौरान यदि 10% फूल खराब या रोजेट (गुलाब के आकार के) दिखाई दें, तो यह गुलाबी सुंडी के प्रकोप का शुरुआती संकेत हो सकता है. ऐसे में किसान तुरंत वैज्ञानिक सलाह के अनुसार निगरानी बढ़ाएं और समेकित कीट प्रबंधन उपाय अपनाकर फसल को नुकसान से बचाएं.

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Pink Ballworm: रोजेट फूलों को न करें नजरअंदाज, कपास को बचाने के लिए तुरंत करें ये उपायकपास में गुलाबी सुंडी का प्रकोप

देश में कपास की खेती का सीजन इस समय पूरे शबाब पर है, लेकिन इसी के साथ किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती भी आकर खड़ी हो गई है. कपास को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कीट गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) का प्रकोप तेजी से देखा जाता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इस सुंडी के प्रकोप पर काबू नहीं पाया गया, तो किसानों की पूरी फसल तबाह हो सकती है.
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ICAR-केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (नागपुर) ने खरीफ सीजन के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. संस्थान ने किसानों को हर स्तर पर फसल की निगरानी करने और जरा भी लक्षण दिखने पर तुरंत समाधान करने की सलाह दी है.

सही समय पर फसल खत्म करना और चक्र अपनाना जरूरी

ICAR के वैज्ञानिकों के अनुसार, गुलाबी सुंडी के जीवन चक्र को तोड़ना सबसे ज्यादा जरूरी है. इसके लिए जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि उत्तर भारत के किसान अक्टूबर तक और मध्य व दक्षिण भारत के किसान दिसंबर से मध्य जनवरी तक अपनी कपास की फसल को पूरी तरह खत्म कर दें. फसल को जनवरी के बाद खेतों में बिल्कुल न रखें क्योंकि पुरानी फसल अगर सुंडी से संक्रमित है तो नई फसल में भी उसका प्रकोप जाएगा.
वैज्ञानिकों ने कहा है, कीटों के प्रभाव को कम करने के लिए फसल चक्र (Crop Rotation) को अपनाना अनिवार्य है. यानी एक ही फसल बार-बार न लगाएं. कपास के बाद उस खेत में कोई दूसरी फसल लगाएं ताकि गुलाबी सुंडी को पनपने का मौका न मिले.

किसान हमेशा अधिकृत और असली Bt-कपास हाइब्रिड या प्रमाणित किस्मों के बीजों की ही खरीदारी करें. साथ ही क्षेत्र के अनुसार अनुशंसित, जल्दी तैयार होने वाली किस्मों की एक साथ (synchronous) बुवाई करें ताकि कीट के हमले से बचा जा सके.

खेतों में ऐसे करें सुंडी की निगरानी (ETL स्तर)

संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल की 'स्क्वायरिंग' (कलियां बनने) और फूल आने के चरणों में लगातार जांच करें कि कहीं फूलों के अंदर गुलाबी सुंडी के लार्वा तो नहीं हैं.

फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल

कपास बुवाई के 45 दिनों के बाद खेतों में 5 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से फेरोमोन ट्रैप लगाएं. इसके अलावा जिनिंग मिलों, गोदामों और मार्केट यार्ड के पास भी इन्हें लगाएं. यदि लगातार 3 दिनों तक प्रति ट्रैप 8 पतंगे पकड़े जाते हैं, तो समझें कि आर्थिक नुकसान का स्तर (ETL) शुरू हो चुका है.

खराब फूलों की जांच

कलियां और फूल आते समय यदि 10% फूल खराब या रोज़ेट (गुलाब के आकार के) दिखें, तो यह खतरे का संकेत है.

टिंडों (Green Bolls) की जांच

टिंडे बनने की अवस्था में विभिन्न पौधों से रैंडमली 20 हरे टिंडे तोड़कर देखें. अगर 20 में से 2 टिंडों (10%) में सफेद या गुलाबी लार्वा या छेद दिखाई दें, तो तुरंत कीटनाशक का छिड़काव करें. जिन खेतों में पिछले साल भारी नुकसान हुआ था, वहां विशेष निगरानी रखें.

रासायनिक दवाओं से बचें, अपनाएं जैविक उपाय

वैज्ञानिकों ने किसानों को अंधाधुंध रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से बचने की सख्त हिदायत दी है. किसान नीम का फॉर्मूला इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें बुवाई के 50-60 दिनों के बाद 10 लीटर पानी में 5% नीम के बीज के गिरी का अर्क, 50 मिली नीम का तेल और 10 ग्राम सर्फ/साबुन मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. किसान मित्र कीटों का सहारा ले सकते हैं जिसमें बुवाई के 90-120 दिनों के बीच हर हफ्ते तीन बार 60,000 प्रति एकड़ की दर से 'ट्राइकोग्रामा बैक्ट्रे' नामक मित्र कीट छोड़ें. ध्यान रहे कि इन्हें छोड़ने के बाद 10 दिनों तक कोई कीटनाशक न छिड़कें.

किसानों को खतरनाक रसायनों पर रोक लगानी चाहिए. बहुत ज्यादा खतरनाक (लाल त्रिकोण) और अत्यधिक खतरनाक (पीला त्रिकोण) कीटनाशकों का इस्तेमाल न करें. ये पर्यावरण के साथ-साथ कपास के मित्र कीड़ों (जैसे कोक्सिनिलिड बीटल और परजीवी ततैया) को भी मार देते हैं.

किसान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

नवंबर से पहले पाइरेथ्रॉइड्स या किसी भी प्रकार के कीटनाशकों के मिश्रण (टैंक मिक्सचर) का छिड़काव कतई न करें, अन्यथा सफेद मक्खी और चेपा (एफिड) का प्रकोप बढ़ सकता है. फसल की चुनाई करते समय साफ कपास और कीड़े लगी कपास को अलग-अलग रखें. कीड़े लगी कपास को तुरंत नष्ट कर दें और उसे गोदामों में स्टोर न करें. सीजन खत्म होने के बाद खेतों से बचे हुए डंठल और आधे खुले हुए टिंडों को साफ करके पूरी तरह नष्ट कर दें.

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