जीरो टिलेज मशीन से गेहूं बुवाई के कई फायदे हैं (फोटो-Unsplash)वैसे तो गेहूं की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ राज्यों में पछेती गेहूं की खेती अभी जारी है. जो किसान इससे पिछड़ गए हैं, उनके लिए एक अच्छा तरीका बिना जुताई गेहूं की बुवाई का है. आप चौंक रहे होंगे कि आखिर बिना जुताई किए गेहूं की बुवाई कैसे संभव है. लेकिन यह बात बिल्कुल सही और मुमकिन है. इसके लिए कुछ खास मशीनें बनाई गई हैं जो बिना जुताई किए गेहूं की बुवाई कर सकती हैं. इसमें नाम आता है हैपी सीडर और जीरो टिलेज मशीनों (zero tillage machine) का जो खेत की जुताई के बिना गेहूं की बुवाई करती हैं.
आइए जानते हैं कि हैपी सीडर और जीरो टिलेज मशीनों (zero tillage machine) की मदद से कैसे बिना जुताई किए गेहूं की बुवाई (wheat sowing) की जा सकती है. यह भी जान लेते हैं कि क्यों मशीनों की जरूरत पड़ती है और क्यों बिना जुताई के गेहूं बोने की नौबत आती है. उत्तर भारत में गर्मी बीतने और जाड़ा की शुरुआत के साथ गेहूं की बुवाई शुरू होती है. या यूं कहें कि धान की कटाई के बाद तुरंत गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है. ऐसे में धान कटनी और गेहूं बोने के बीच बहुत कम समय रह जाता है. अगर किसान बहुत दिन तक खेत को खाली छोड़े तो बाद में गहरी जुताई और पलेवा लगाने की जरूरत होगी. इससे खेती की लागत बढ़ जाएगी. ऐसे में किसानों के लिए यह मुश्किल है कि वे खेत को अधिक दिनों तक खाली छोड़ें.
इस स्थिति में यही विकल्प बचता है कि बिना खेत की जुताई किए गेहूं की बुवाई कर दी जाए. इसके लिए वैज्ञानिकों ने कुछ खास मशीनें तैयार की हैं. इसके लिए शून्य जुताई मशीन जिसे जीरो टिलेज मशीन भी कहते हैं, का इजाद किया गया है. इसी में हैपी सीडर का भी नाम है. जीरो टिलेज मशीन की खासियत ये होती है धान की कटाई के बाद बिना खेत को तैयार किए सीधे गेहूं बोया जा सकता है, वह भी पराली जलाए बिना क्योंकि पराली जलाना भी आज की तारीख में गंभीर अपराध है.
जीरो टिलेज मशीन या शून्य जुताई मशीन (zero tillage machine) साधारण सीड ड्रिल की तरह होती है जिसमें सात कतार लगी होती है. इसी में आप चाहें तो 9 कतार वाली या 11 कतार वाली मशीन भी ले सकते हैं. खेत का जैसा रकबा रहता है, वैसी जीरो टिलेज मशीन ली जाती है. इस मशीन में जुताई करने के लिए ब्लेड या पंजी लगी होती है जो सिर्फ आधा इंच की होती है. यह ब्लेड धान की बची ठूंठों या डंठलों के बीच गेहूं की बुवाई में मदद करती है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि गेहूं के बीज की बर्बादी नहीं होगी और बीज भी कम लगेंगे.
जीरो टिलेज मशीन से अगर गेहूं की बुवाई (wheat sowing) की जाए तो एक एकड़ में 35 से 40 किलो बीज से काम हो जाएगा. अगर वही पारंपरिक तौर पर जुताई कर बुवाई करनी हो तो बीज अधिक लगेगा. इस तरह जीरो टिलेज मशीन किसानों का समय बचाने के साथ पैसा भी बचाती है. जीरो टिलेज मशीन गेहूं बोने के दौरान धान की पराली को नहीं निकालती. इसका खेतों को फायदा मिलता है. पराली खेत में रहने से सड़ जाती है और बाद में उर्वरक बन जाती है जिससे गेहूं के पौधों को पोषण मिलता है.
इस तरह जीरो टिलेज मशीन (zero tillage machine) से जुताई का खर्च तो बचता ही है, पलेवा का पैसा भी नहीं लगता. इससे किसानों को दोहरा लाभ होता है. खाद की बचत होती है और पराली खेत में ही बचे रहने से नमी बनी रहती है. इससे किसानों को अधिक पानी देने की जरूरत नहीं होती. जीरो टिलेज मशीन से एक घंटे में एक एकड़ खेत में गेहूं बोया जा सकता है. इस मशीन को चलाने के लिए अधिक डीजल नहीं लगता और 3 से 3.5 लीटर डीजल एक घंटे में लगता है. यानी एक एकड़ खेत में गेहूं बोने के लिए किसान को मात्र 3-3.5 लीटर ही डीजल देना होगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today