Animal & Human Conflict: छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों के प्रकोप से गांव वालों को बचाने में एआई बना मददगार

Animal & Human Conflict: छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों के प्रकोप से गांव वालों को बचाने में एआई बना मददगार

स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर यातायात प्रबंधन तक, तमाम क्षेत्रों में एआई यानी Artificial Intelligence के इस्तेमाल की बात अब सामान्य है, लेकिन इंसानों और जंगली जानवरों के संघर्ष को रोकने में भी एआई का इस्तेमाल अचरज भरी बात तो लगती ही है. एआई के लगातार बढ़ते दायरे के मद्देनजर छत्तीसगढ़ सरकार ने वन क्षेत्रों में बसे गांवों के लोगों को जंगली हाथियों के प्रकोप से बचाने के लिए इस तकनीक को मददगार बनाया है.

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Animal & Human Conflict: छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों के प्रकोप से गांव वालों को बचाने में एआई बना मददगारछत्तीसगढ़ सरकार मोबाइल ऐप की मदद से बचाएगी ग्रामीणों को जंगली हाथि‍यों के प्रकोप से, फोटो: साभार, छत्तीसगढ़ सरकार

छत्तीसगढ़ सरकार ने Animal & Human Conflict की लगातार बढ़ती घटनाओं में इंसानों और वन्य जीवों, दोनों के नुकसान को देखते हुए अब एएआई का सहारा लिया है. इसके लिए राज्य सरकार ने एआई आधारित एक ऐसा मोबाइल ऐप विकसित किया है, जिसकी मदद से जंगली हाथियों की रियल टाइम निगरानी कर वन क्षेत्रों में बसे गांवों के लोगों को इनके प्रकोप से महफूज रखा जाता है. इस ऐप की मदद से जंगली हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों की गजराज से संभावित मुठभेड़ को टालने में काफी हद तक सफलता प्राप्त की है. राज्य में वन विभाग, पंचायती राज विभाग और अन्य सम्बद्ध विभागों के साथ मिलकर एआई की मदद से Animal & Human Conflict को टाला जा रहा है. साथ ही ग्रामीणों को भी जन जागरूकता अभियान चलाकर सह अस्तित्व का पाठ पढ़ाते हुए वन्य जीवों के साथ सामंजस्य कायम कर जीने की बात सिखाई जा रही है.

ऐप एक, खूबियां अनेक

पूरी दुनिया में 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस मौके पर छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने बताया कि राज्य के वन क्षेत्रों में जलवायु सहित अन्य परिस्थितियों के लिहाज से हाथियों के लिए उपयुक्त हालात हैं. इस कारण से राज्य के वन क्षेत्रों में हाथियों की भरपूर संख्या हमेशा से रही है.

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इसकी मदद से छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों के मूवमेंट की Hitech Monitoring शुरू कर दी गई है. उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत पिछले 3 महीनों से उदंती सीतानदी Tiger Reserve में इस ऐप का उपयोग किया जा रहा है. इसकी मदद से जंगल में 10 किलोमीटर के इलाके में हाथियों के Real Time Movement का अलर्ट ग्रामीणों के मोबाइल फोन पर सफलतापूर्वक भेजा रहा है.

ऐसे काम करता है ऐप

अकबर ने बताया कि इस एप में ग्रामीणों के मोबाइल नंबर और जीपीएस लोकेशन काे दर्ज किया जाता है. हाथियों की लोकेशन को ट्रेस करने के लिए वन विभाग ने एलीफैंट ट्रैकर्स ग्रुप यानी हाथी मित्र दल तैनात किए हैं. इनके द्वारा हाथियों के मूवमेंट का ब्योरा मोबाइल एप पर दर्ज किया जाता है.

इसके आधार पर ऐप द्वारा ग्रामीणों के मोबाइल फोन पर अलर्ट भेज दिया जाता है. इससे ग्रामीणों को पता चल जाता है कि हाथियों के झुंड उनके गांव से कितनी दूर हैं. इनमें से किसी हाथी के उग्र रूप अख्तियार करने की जानकारी भी ऐप की मदद से मिल जाती है.

यह एप वन प्रबंधन सूचना प्रणाली (FMIS) और वन्यजीव विंग द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है. यह ऐप एलीफैंट ट्रैकर्स से प्राप्त इनपुट की मदद से एआई के आधार पर काम करता है. इस एप के जरिए संबंध‍ित गांव के प्रत्येक व्यक्ति को मोबाइल फोन पर कॉल करके, एसएमएस भेजकर या व्हाट्सएप अलर्ट के माध्यम से हाथियों की मौजूदगी के बारे में सूचनाएं पहुंचाई जाती हैं.

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हाथी प्रभावित क्षेत्रों में चल रहा जन-जागरूकता अभियान

अकबर ने बताया कि छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में इंसान और हाथि‍यों के टकराव की घटनाओं पर नियंत्रण करने के लिए वन विभाग द्वारा जन-जागरूकता अभि‍यान चलाया जा रहा है. इनमें जंगली हाथियों के आने की पूर्व सूचना गांव वालों को वायरलेस, मोबाइल फोन तथा माइक आदि के माध्यम से मुनादी करके दी जा रही है. हाथियों के विचरण वाले इलाकों के आसपास बसे गांवों के लोगों को हाथियों के साथ साहचर्य बना कर रखने के गुर भी सिखाए जा रहे हैं. अकबर ने बताया कि हाथ‍ियों के साथ संघर्ष में जन-धन की हानि से प्रभावित हुए परिवारों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मुआवजा देने के अलावा स्व-रोजगार आदि से जोड़कर उन्हें राहत दी जा रही है.

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