देश में पशु चिकित्सकों की कमी है.कोरोना (कोविड19) के बाद से पशुपालन और मुर्गीपालन (पोल्ट्री) को लेकर नए तरह से सोचा जाने लगा है. इस सोच के पीछे भी एक बड़ी वजह है. एक्सपर्ट के मुताबिक 70 फीसद वायरल बीमारियां ऐसी हैं जो दुधारू पशु और मुर्गियों से होती हैं. यही वजह है कि संक्रमण से होने वाली बीमारियों को लेकर लोग सजग हो रहे हैं. संक्रमण से होने वाली महामारी के बारे में किसी को नहीं पता कि कब और कहां से संक्रमण लग जाएगा. इसी को देखते हुए वर्ल्ड लेवल पर वन हैल्थ मिशन शुरू किया गया है.
भारत में भी नेशनल वन हैल्थ मिशन (NOHM) शुरू किया गया है. लेकिन इसके लिए भी बड़ी संख्या में पशु चिकित्सक (Veterinarian), वेटरनरी कालेज, पैरा वेट कॉलेज, वेटरनरी हॉस्पिटल, डायग्नोस्टिलक, लेबोरेटरी की जरूरत होगी. इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पशुपालन के लिए बजट में बड़ा ऐलान किया है.
एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कोविड, स्वाइन फ्लू, एशियन फ्लू, इबोला, जीका वायरस, एवियन इंफ्लूंजा समेत और भी न जानें ऐसी कितनी महामारी हैं जो पशु-पक्षियों से इंसानों में आई हैं. इसकी पूरी एक लम्बी फेहरिस्त है. हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक 17 लाख वायरस जंगल में फैले होते हैं. इसमे से बहुत सारे ऐसे हैं जो जूनोटिक हैं. जूनोटिक के ही दुनिया में हर साल एक बिलियन केस सामने आते हैं और इससे एक मिलियन मौत हो जाती हैं.
लेकिन अब वर्ल्ड लेवल पर इस पर काबू पाने की कवायद शुरू हो गई है. भारत में भी एनओएचएम के नाम से अभियान शुरू कर दिया गया है.. हालांकि शुरुआती दौर में यह पहले पांच राज्यों से शुरू किया गया था. लेकिन अब जी-20 महामारी कोष से बजट मिलने के बाद इसे देशभर में चलाया जाएगा.
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