कम पानी में ज्यादा धान, 26 जिलों के किसानों को सिखाया गया DDSR तकनीक

कम पानी में ज्यादा धान, 26 जिलों के किसानों को सिखाया गया DDSR तकनीक

किसानक्राफ्ट ने देश भर के 26 से ज़्यादा ज़िलों में DDSR (ड्राई डायरेक्ट सीडेड राइस) पर एक जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया. इस अभियान के ज़रिए, हज़ारों किसानों को कम पानी में चावल उगाने की एक नई और आसान तकनीक सिखाई गई, जिससे खेती ज़्यादा किफायती, फायदेमंद और पर्यावरण के लिए टिकाऊ बन गई.

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कम पानी में ज्यादा धान, 26 जिलों के किसानों को सिखाया गया DDSR तकनीकपानी बचाओ, फसल बढ़ाओ

किसानक्राफ्ट नाम की एक कृषि कंपनी ने पूरे भारत में किसानों के लिए एक खास जागरूकता अभियान चलाया. यह अभियान ड्राई डायरेक्ट सीडेड राइस (DDSR) यानी बिना पानी भरे खेत में धान उगाने की नई विधि के बारे में था. यह अभियान 10 अक्टूबर 2025 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर से शुरू हुआ और 26 से ज्यादा जिलों में सफलतापूर्वक पूरा हुआ.

कितने राज्यों और किसानों तक पहुंचा अभियान?

इस अभियान के दौरान किसानक्राफ्ट ने भारत के 10 राज्यों में काम किया. इनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और ओडिशा शामिल हैं. इन राज्यों में 213 किसानों के खेतों में धान की फसल का प्रदर्शन किया गया. कुल मिलाकर यह काम 124 एकड़ जमीन पर किया गया. इसके साथ ही 30 अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 2,000 किसानों ने भाग लिया.

किसानों को क्या-क्या सिखाया गया?

इन कार्यक्रमों में किसानक्राफ्ट के विशेषज्ञ किसानों से सीधे मिले. उन्होंने किसानों को आसान भाषा में बताया कि DDSR कैसे किया जाता है. किसानों को जमीन तैयार करने, बीज बोने का सही तरीका, खरपतवार यानी घास को हटाने और फसल को कीड़ों से बचाने की जानकारी दी गई. किसानों ने खेत में खड़े होकर फसल को देखा और सवाल पूछे. इससे उन्हें नई तकनीक को समझने में मदद मिली.

धान की खेती में बदलाव क्यों जरूरी है?

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा चावल पैदा करता है. लेकिन एक किलो चावल उगाने में लगभग 5,000 लीटर पानी लगता है. इससे पानी की बहुत बर्बादी होती है. आजकल पानी कम हो रहा है और मौसम भी बदल रहा है. ऐसे में धान उगाने के नए और आसान तरीकों की जरूरत है.

DDSR क्या है और यह क्यों फायदेमंद है?

DDSR यानी ड्राई डायरेक्ट सीडेड राइस एक नई और अच्छी तकनीक है. इसमें खेत में पानी भरने की जरूरत नहीं होती. इस तरीके से धान उगाने पर 50 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है. बीज भी कम लगते हैं और दवाइयों व खाद का खर्च भी कम होता है. इससे मिट्टी भी अच्छी रहती है और मजदूरी का खर्च घटता है. इस विधि से हवा और पर्यावरण को भी कम नुकसान होता है.

किसानक्राफ्ट का क्या कहना है?

किसानक्राफ्ट के चेयरमैन रविंद्र अग्रवाल ने कहा कि DDSR किसानों और प्रकृति दोनों के लिए अच्छा है. इससे फसल अच्छी होती है, खर्च कम आता है और पानी भी बचता है. किसानक्राफ्ट भविष्य में भी किसानों को इस तकनीक की जानकारी देता रहेगा.

किसानों के लिए उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम

किसानक्राफ्ट की DDSR किस्में 110 से 140 दिनों में तैयार हो जाती हैं और अलग-अलग मिट्टी में आसानी से उगाई जा सकती हैं. कंपनी का मानना है कि अगर ज्यादा किसान इस तकनीक को अपनाएं, तो भारत में खेती और मजबूत होगी और आने वाले समय में खाने की कमी नहीं होगी.

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