बालोद की चित्ररेखा साहू नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़कर किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो उर्वरकों का छिड़काव कर रही है. ड्रोन दीदी बनने के बाद उनकी आय बढ़ी, स्कूटी खरीदी, घर का निर्माण पूरा कराया और बेटी की बेहतर शिक्षा का सपना मजबूत हुआ.
बलरामपुर में Digital Crop Survey के जरिए खेत-खेत पहुंचकर बोई गई फसल की वास्तविक जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जा रही है. इससे फसलवार सटीक डेटा तैयार होगा और आगामी धान खरीदी को आसान, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी.
छत्तीसगढ़ के सरकंडा में ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम’ के जरिए अब हितग्राहियों को लंबी कतारों में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ रहा है.बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद मशीन स्क्रीन पर पात्रता के अनुसार मात्रा दिखाती है और निर्धारित राशन स्वतः थैले में भर देती है.
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्मों को आधुनिक विज्ञान से नई पहचान मिली है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के सहयोग से लंबी धान किस्मों को बौना बनाया गया है. बौनी सफरी, जावा फूल और दुबराज जैसी किस्मों से फसल गिरने की समस्या कम हुई है और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आमदनी का लाभ मिल रहा है.
महासमुंद की भारती बंसल ने धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ग्राफ्टेड टमाटर को अपनाकर यह साबित किया है कि खेती में बदलाव, तकनीक का इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान कम क्षेत्र में भी बेहतर आर्थिक परिणाम हासिल कर सकते हैं.
छत्तीसगढ़ की ‘सौर सुजला योजना’ ने नारायणपुर के वनांचल किसानों की खेती की तस्वीर बदल दी है.9 वर्षों में 4,722 से अधिक किसानों के खेतों में सोलर सिंचाई पंप लगाए गए हैं. अब किसान धान के साथ साग-सब्जियों और नकदी फसलों की खेती कर साल में एक से अधिक फसल ले रहे हैं.
कोरबा की महिला किसान राजश्री मार्को ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर 1.20 हेक्टेयर में हाइब्रिड टमाटर की खेती से 100-120 टन उत्पादन हासिल किया. उन्होंने एक सीजन में करीब 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया. राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली तकनीकी मदद ने उनकी खेती को नई दिशा दी.
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के किसान आनंद राम पैकरा ने सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 55 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाकर कम पानी में टमाटर और गोभी का बेहतर उत्पादन हासिल किया.आधुनिक तकनीक से उनकी खेती की लागत घटी और आय में बढ़ोतरी हुई.
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के किसान महादेव मौर्य ने राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से 16 एकड़ में धान की रोपाई कर खेती में नई मिसाल पेश की है.सरकार से 4 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद उन्होंने 9 लाख की मशीन खरीदी, जिससे रोपाई की लागत प्रति एकड़ 7-8 हजार रुपये से घटकर 2-2.5 हजार रुपये रह गई.
छत्तीसगढ़ में खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.अब किसानों को सहकारी समितियों के जरिए ड्रोन स्प्रेयर की सुविधा मिलेगी. बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की 5 समितियों में 11 ड्रोन तैनात किए गए हैं और इस खरीफ सीजन में 50 हजार एकड़ में ड्रोन से खाद और कीटनाशकों के छिड़काव का लक्ष्य रखा गया है.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इससे रोपाई की लागत लगभग आधी हो रही है, मजदूरों पर निर्भरता कम हो रही है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने की अपील की है.
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