छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 2026-27 के लिए ‘तुंहर टोकन’ एप से किसान घर बैठे 24×7 ऑनलाइन टोकन ले सकेंगे.जानिए जमीन के रकबे के अनुसार कितने टोकन मिलेंगे और बचा हुआ धान अगले टोकन से कैसे बेच सकेंगे.
कोंडागांव के सुरेश देवांगन ने गांव-गांव कृषि उपकरण किराये पर देने से शुरुआत की और आज ‘किसान मितान एग्रो’ के जरिए करीब 7 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा कर लिया है. PMEGP के तहत 50 लाख रुपये का ऋण और 12.50 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. आज उनकी इकाई में 25 लोगों को रोजगार मिल रहा है.
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मुंगेली की गोदावरी साहू किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं। ड्रोन से एक दिन में 20-25 एकड़ तक छिड़काव हो रहा है, जिससे किसानों का समय और लागत बच रही है.
सरगुजा के दयासागर ने पशुपालन विभाग की सलाह पर कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार अपनाया.एचएफ, गिर और साहीवाल जैसी नस्लों के पशुओं के साथ बेहतर प्रबंधन से दूध उत्पादन 15–20 लीटर प्रतिदिन तक पहुंचा, जिससे परिवार की नियमित आमदनी को मजबूती मिली.
बालोद की चित्ररेखा साहू नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़कर किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो उर्वरकों का छिड़काव कर रही है. ड्रोन दीदी बनने के बाद उनकी आय बढ़ी, स्कूटी खरीदी, घर का निर्माण पूरा कराया और बेटी की बेहतर शिक्षा का सपना मजबूत हुआ.
बलरामपुर में Digital Crop Survey के जरिए खेत-खेत पहुंचकर बोई गई फसल की वास्तविक जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जा रही है. इससे फसलवार सटीक डेटा तैयार होगा और आगामी धान खरीदी को आसान, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी.
छत्तीसगढ़ के सरकंडा में ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम’ के जरिए अब हितग्राहियों को लंबी कतारों में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ रहा है.बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद मशीन स्क्रीन पर पात्रता के अनुसार मात्रा दिखाती है और निर्धारित राशन स्वतः थैले में भर देती है.
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्मों को आधुनिक विज्ञान से नई पहचान मिली है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के सहयोग से लंबी धान किस्मों को बौना बनाया गया है. बौनी सफरी, जावा फूल और दुबराज जैसी किस्मों से फसल गिरने की समस्या कम हुई है और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आमदनी का लाभ मिल रहा है.
महासमुंद की भारती बंसल ने धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ग्राफ्टेड टमाटर को अपनाकर यह साबित किया है कि खेती में बदलाव, तकनीक का इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान कम क्षेत्र में भी बेहतर आर्थिक परिणाम हासिल कर सकते हैं.
छत्तीसगढ़ की ‘सौर सुजला योजना’ ने नारायणपुर के वनांचल किसानों की खेती की तस्वीर बदल दी है.9 वर्षों में 4,722 से अधिक किसानों के खेतों में सोलर सिंचाई पंप लगाए गए हैं. अब किसान धान के साथ साग-सब्जियों और नकदी फसलों की खेती कर साल में एक से अधिक फसल ले रहे हैं.
कोरबा की महिला किसान राजश्री मार्को ने ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर 1.20 हेक्टेयर में हाइब्रिड टमाटर की खेती से 100-120 टन उत्पादन हासिल किया. उन्होंने एक सीजन में करीब 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया. राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली तकनीकी मदद ने उनकी खेती को नई दिशा दी.
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के किसान आनंद राम पैकरा ने सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत 55 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाकर कम पानी में टमाटर और गोभी का बेहतर उत्पादन हासिल किया.आधुनिक तकनीक से उनकी खेती की लागत घटी और आय में बढ़ोतरी हुई.
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