25 साल बाद भी कायम है Co 86032 की पकड़, किसान आज भी क्यों चुनते हैं नयना?

25 साल बाद भी कायम है Co 86032 की पकड़, किसान आज भी क्यों चुनते हैं नयना?

Co 86032 (नयना) गन्ने की एक उच्च पैदावार देने वाली चमत्कारिक किस्म है, जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में लोकप्रिय है. यह किस्म बेहतर चीनी रिकवरी, रोग प्रतिरोधक क्षमता और 18 से अधिक रटून फसलों के लिए जानी जाती है.

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25 साल बाद भी कायम है Co 86032 की पकड़, किसान आज भी क्यों चुनते हैं नयना?गन्ने की उन्नत किस्म Co 86032 नयना

गन्ना भारत की एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, जो 50 लाख किसानों, डेढ़ करोड़ खेतिहर मजदूरों, पांच लाख कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की आजीविका का सहारा है. गन्ना देश के कई इलाकों में उगाया जाता है और बड़े पैमाने पर खेती की जाती है. इन इलाकों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश शामिल हैं. गन्ने की कई किस्में हैं जो किसानों की आय बढ़ाने में मदद करती हैं. इन किस्मों में Co86032, Co312, Co419, Co6304, Co740 आदि प्रमुख किस्में हैं जिन्होंने गन्ने को एक प्रमुख फसल और चीनी उद्योग को इस क्षेत्र में एक प्रमुख कृषि-उद्योग बनाया है.

Co 86032 (नयना)

Co 86032 (नयना) गन्ने की एक किस्म है जिसे प्रायद्वीपीय क्षेत्र में व्यावसायिक खेती के लिए तैयार किया गया है, जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और आंतरिक आंध्र प्रदेश शामिल हैं.

यह किस्म अक्टूबर के साथ-साथ जनवरी-फरवरी में रोपाई के लिए उपयुक्त है और गन्ने की उपज में कमी के बिना 120 सेमी की चौड़ी क्यारियों में बुवाई के साथ बेहतर उत्पादन देती है.

Co 86032 स्मट रोग के प्रति प्रतिरोध और विल्ट के प्रति मध्यम प्रतिरोधी किस्म है.

CoC 671 किस्म 

Co 86032 की तरह CoC 671 भी बेहतर पैदावार देने वाली किस्म है. इस किस्म के तैयार होने के बाद शुगर फैक्ट्री के लिए गन्ने की खेती फायदेमंद हो गई, हालांकि रटून फसल (पेड़ी फसल) में इसकी पैदावार कम थी. राज्यों के खारे और सूखे क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती में समस्याएं आईं. साथ ही, किसानों की तरफ से ऐसी किस्मों की मांग थी जो कई बार पेड़ी लगाने के लिए सक्षम हों.

इस किस्म में फूल आना एक और समस्या थी जिसने सही किस्म की मांग को बढ़ा दिया. साथ ही, 14 महीने की उम्र तक कटाई के लिए उपयुक्त किस्मों की भी मांग थी, क्योंकि मौसम में उतार-चढ़ाव, कटाई के लिए मजदूरों की उपलब्धता सहित कई समस्याओं के कारण गन्ने की कटाई में कभी-कभी देरी हो जाती थी. इन सभी बातों ने उपयुक्त किस्मों को विकसित करने की दिशा में वैज्ञानिकों ने आगे बढ़ाया. इसे देखते हुए Co 86032 जैसी किस्में तैयार की गईं.

1970 में Co 6304 (उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए दूसरी चमत्कारिक किस्म के रूप में जानी जाने वाली) और 1949 में Co 740 (महाराष्ट्र के लिए बहुत उपयुक्त) के जारी होने के बाद, प्रायद्वीपीय क्षेत्र की अलग-अलग कृषि-जलवायु परिस्थितियों में चीनी रिकवरी और गन्ने की पैदावार में ठहराव आ गया था. अधिक सुक्रोज वाली दो किस्मों Co 62198 और CoC 671 को क्रॉस कर Co 86032 बनाया गया.

Co 86032 की विशेषताएं

  • उच्च पैदावार
  • रोपण के 14-15 महीने बाद तक उच्च क्वालिटी बनाए रखना
  • सामान्य खेती के तरीकों के साथ भी अच्छा उत्पादन देता है और उर्वरक जैसे खुराक बढ़ाने पर अधिक पैदावार मिलती है
  • एक अच्छा रटूनर है, यानी पेड़ी से भी बेहतर उत्पादन मिलता है. किसान Co 86032 के साथ 18 से अधिक रटून ले रहे हैं
  • यह सामान्य (90 सेमी) और चौड़ी (120 से 150 सेमी) पंक्तियों सहित अलग-अलग खेत के आकार में भी उपयुक्त है
  • यह किस्म खेत में रेड रॉट के प्रति सहनशील है और 25 साल की खेती के बाद भी रेड रॉट के प्रति प्रतिरोधी बनी हुई है
  • यह स्मट रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है
  • यह विल्ट रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है
  • यह सूखे के प्रति मध्यम सहनशील है
  • यह किस्म खारेपन के प्रति मध्यम सहनशील है
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