बिहार के बक्सर जिले के मैकेनिकल इंजीनियर संजीत राय ने सिंगल यूज प्लास्टिक कचरे को संसाधन में बदलने की अनोखी पहल की है. उन्होंने प्लास्टिक से ऐसे स्लैब तैयार किए हैं, जिनका उपयोग बेंच, डेस्क, अलमारी और अन्य फर्नीचर बनाने में किया जा रहा है. यह मॉडल न केवल प्लास्टिक प्रदूषण कम करने में मदद कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है.
बिहार सरकार ने गन्ना किसानों के लिए 34.60 करोड़ रुपये की गन्ना यंत्रीकरण योजना को मंजूरी दी है. वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यभर में 3,218 आधुनिक कृषि यंत्र बांटे जाएंगे और 80 नए यंत्र बैंक स्थापित होंगे. किसानों को कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी और यंत्र बैंक के लिए 8 लाख रुपये तक सहायता मिलेगी.
बिहार सरकार ने किसानों के लिए कृषि ऐप लॉन्च किया है, जिससे वे घर बैठे खाद की उपलब्धता, नजदीकी दुकानों और स्टॉक की जानकारी ले सकते हैं. यह ऐप कालाबाजारी रोकने के साथ किसानों को डिजिटल सुविधाएं और खेती से जुड़ी अहम जानकारी भी प्रदान करेगा.
मुजफ्फरपुर की शाही लीची के लिए नई “नॉन-वॉवेन बैग” तकनीक से फल की क्वालिटी, मिठास और उत्पादन बढ़ेगा. इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने और आय में वृद्धि की उम्मीद है.
बिहार सरकार 1 अप्रैल 2026 से राजस्व प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग शुरू करने जा रही है. हर जिले में 5 सदस्यीय एआई सेल बनेगा, अधिकारियों-कर्मचारियों को एआई प्रशिक्षण मिलेगा और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में चैटजीपीटी के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा.
I-STEM की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन इंस्ट्रूमेंट’ सूची में शामिल होने वाला XRD उपकरण, बीएयू सबौर को मिला अब तक का सबसे बड़ा सम्मान. अब कृषि, सामग्री विज्ञान और नैनो अनुसंधान को मिलेगा बड़ा लाभ.
बैल-हल के दौर से निकलकर अब किसान ट्रैक्टर चालित यंत्रों जैसे रोटावेटर, एम.बी. प्लाऊ, कल्टीवेटर और रिजर यंत्र की मदद से खेत की जुताई कर रहे हैं, जिससे समय, श्रम और लागत की बचत के साथ फसल की गुणवत्ता भी सुधरी है.
बिहार के नालंदा में 31 अक्टूबर तक OFMAS पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें. SC/ST किसानों को 60–80% तक सब्सिडी, सामान्य वर्ग को 40–50%. पहले पूरा भुगतान, बाद में खाते में सब्सिडी ट्रांसफर. लॉटरी के माध्यम से चयन, पारदर्शिता सुनिश्चित.
20 साल में बिहार कृषि रोड मैप की बदौलत कृषि यंत्रों का उपयोग बढ़ा है. अब तक 28 लाख से अधिक लोगों को कृषि यंत्रों पर अनुदान मिल चुका है. वहीं, किसानों का कहना है कि उपज का उचित बाजार नहीं मिलने के कारण सारी सुविधाएं बेकार साबित हो रही हैं.
बिहार के डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में केंद्रीय पुस्तकालय अब पूर्णतया स्वचालित और डिजिटल हो चुका है. आरएफआईडी (RFID) और माइलाफ्ट (MyLoft) तकनीक की मदद से किताबें विद्यार्थियों को आसानी से उपलब्ध होगी. बिहार में डिजिटल स्वचालित तकनीक से लैस यह पहला विश्वविद्यालय है.
Bihar News: कृषि विभाग को राज्य में जलवायु अनुकूल कृषि के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने को लेकर किया गया सम्मानित. कृषि सचिव ने तीनों पुरस्कार राज्य के किसानों को समर्पित किए. जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन.
सीएम नीतीश कुमार ने की खरीफ महाअभियान की शुरुआत. वहीं किसान 'बिहार कृषि' मोबाइल ऐप के जरिए खेती से जुड़ी और सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल कर सकेंगे. इसके साथ ही आरा में खुलेगा कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय.
गांव के किसान हरेंद्र कुमार ने कबाड़ के पुर्जों से एक ऐसी देसी "जुगाड़ गाड़ी" तैयार की है, जो न केवल खेतों की जुताई करती है, बल्कि खाद, बीज, पानी और फसल को मंडी तक ले जाने जैसे हर काम में इस्तेमाल होती है. इस अनोखे आविष्कार ने बड़े-बड़े ऑटोमोबाइल इंजीनियरों को भी हैरान कर दिया है.
बिहार कृषि विभाग कृषि यंत्रों पर मिलने वाले अनुदान को लेकर कई तरह के बदलाव करने जा रही है. जहां अनुपयोगी कृषि यंत्रों को सूची से हटाने की कवायद शुरू कर दी है. वहीं,नए कृषि यंत्रों को शामिल करने पर विचार कर रही है.
बिहार कृषि विश्वविद्यालय और सी-डैक मिलकर विश्वविद्यालय में ‘कृषि सूचना विज्ञान और एआई अनुसंधान केंद्र (CAIR)’ नामक एक एआई प्रयोगशाला स्थापित करेंगे, जो पूरी तरह से कृषि को लेकर काम करेगी. बीएयू, सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा, "कृषि में एआई का प्रयोग केवल एक नवाचार नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है. एआई-आधारित समाधानों का उपयोग करके हम उत्पादन क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि कर सकते हैं.
ड्रोन तकनीक कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है. रोहतास जिले के कोचस प्रखंड के रूपीबांध गांव की रहने वाली जूही कुमारी ने इफको फूलपुर (प्रयागराज) से ट्रेनिंग ली. ट्रेनिंग के बाद उन्हें सरकार की ओर से इफको कंपनी द्वारा निःशुल्क कृषि ड्रोन उपलब्ध कराया गया जिसकी मदद से आज जूही कुमारी खेतों में छिड़काव का काम बड़ी आसानी से कर पा रही हैं.
ड्रोन के माध्यम से किसान खाद, कीटनाशक, मछली का चारा तालाब में हर जगह ऊपर से ही डाल सकते हैं. साथ ही इसकी मदद से अब तालाबों में मछली की गिनती भी की जा सकती है. अगर किसान खुद का ड्रोन खरीदना चाहेंगे तो उन्हें सरकार अधिकतम 60 प्रतिशत सब्सिडी देगी. और जो किसान सरकारी ड्रोन से लाभ उठाना चाहेंगे उनको भी शुल्क में से 240 रुपया सरकार देगी.
बिहार के जो किसान ड्रोन खरीदना चाहते हैं वे 25 दिसंबर तक जरूर ऑनलाइन आवेदन कर दें. जिन किसानों को इसके लिए चुना जाएगा, वे 60 परसेंट सब्सिडी यानी कि 3 लाख 65 हजार रुपये पाने के हकदार होंगे. इस योजना का लाभ खेती-बाड़ी करने वाले किसान के अलावा कृषि क्लीनिक चलाने वाले व्यक्ति को दिया जाएगा.
ये इंडिया का पहला ट्रैक्टर है जो थ्री व्हील में लांच किया गया है. मोटरसाइकिल की तरह ये सेल्फ स्टार्ट होता है. 10 लीटर टैंक की कैपेसिटी वाला ये ट्रैक्टर एक लीटर डीजल में एक घंटा चलता है. इसमें बीज और खाद ले जाने की व्यवस्था है. ये जरूरत पड़ने पर फोर व्हील में भी कन्वर्ट हो जाता है और सभी तरह की मिट्टी में ये काम करता है.
बिहार में कृषि रोडमैप के तहत 13 विभाग एकसाथ काम कर रहे हैं. इसमें सिंचाई, खाद, कीटनाशी और प्रोसेसिंग विभाग महत्वपूर्ण हैं. इन सभी विभागों के काम में कृषि मशीन का बड़ा रोल होता है. बिहार मखाना और शहद बनाने में भी नंबर वन है. ये दोनों काम ऐसे हैं जिनमें मशीनरी बड़ी भूमिका निभाती है. कृषि यंत्र मेले में इन मशीनों की अच्छी खासी भूमिका देखी गई.
पटना के गांधी मैदान में राज्यस्तरीय कृषि यांत्रिकरण मेला (एग्रो बिहार 2024) आ आयोजन किया गया है. यहां किसानों को तकनीकी जानकारी और उन्हें कृषि यंत्रों पर अनुदान का लाभ दिया जा रहा है. यह मेला 29 नवंबर से 2 दिसंबर तक कृषि विभाग बिहार और सीआईआई के सहयोग से आयोजित किया गया है. इस मेले में 5 ऐसे यंत्र ऐसे आए हैं जिसे देखकर किसान काफी प्रभावित हुए हैं.
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