किसान ने बताई अपनी समस्याउत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मदद की गुहार लगाई है. किसानों ने कहा कि अगर जल्द ही छुट्टा जानवरों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो खेती करना नामुमकिन हो जाएगा. अलग-अलग गांवों और इलाकों से किसानों ने कहा कि दिन-रात की मेहनत पर आवारा पशु पानी फेर रहे हैं और खेतों की रखवाली ही उनकी सबसे बड़ी मजबूरी बन चुकी है.
इंद्रपुर गांव के किसान अजय कुमार पांडे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि छुट्टा जानवरों से इतनी परेशानी है कि फसल बचाना सबसे बड़ा संघर्ष बन गया है. उन्होंने मांग की कि सरकार इस समस्या का ठोस समाधान करे और साथ ही खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसान को दोहरी मार न झेलनी पड़े. उन्होंने कहा कि अगर जानवरों से राहत मिल जाए तो किसान अपनी मेहनत सही दिशा में लगा सकता है.
वहीं, भटवलिया गांव के किसान जितेंद्र तिवारी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि इलाके का हर किसान छुट्टा जानवरों से परेशान है. दिन में खेतों में पसीना बहाते हैं और रात होते ही जानवर फसलों को चट कर जाते हैं. कई किसान रात-रात भर जागकर खेतों की निगरानी करने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि तार की बाड़ भी लगाई गई है, लेकिन जानवर उसे तोड़कर खेतों में घुस जाते हैं.
किसानों ने यह भी कहा कि इस बार खाद मिल गई, लेकिन पहले खाद के लिए भारी मारामारी होती थी और लंबी लाइनें लगानी पड़ती थीं. किसानों ने कहा कि खाद से भी ज्यादा जरूरी छुट्टा जानवरों से निजात है, क्योंकि बिना फसल बचे खाद का कोई मतलब नहीं रह जाता.
कुछ किसानों ने वीबी जी राम योजना जैसी व्यवस्थाओं में सुधार की बात कही और मांग की कि जॉब कार्ड और पारिश्रमिक के नाम पर बिचौलियों की भूमिका खत्म की जाए, ताकि असली लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे. बुजुर्ग किसान राम कृपाल ने कहा कि अगर जानवरों की जल्द व्यवस्था नहीं हुई तो खेती बंद करनी पड़ेगी.
वहीं, किसान श्याम स्वरूप शुक्ला ने भी केंद्रीय मंत्री से छुट्टा जानवरों से निजात दिलाने की अपील की. उन्होंने कहा कि इससे खेती का स्तर लगातार गिर रहा है और किसान आर्थिक रूप से टूटता जा रहा है. साथ ही धान खरीदी में दलालों की मौजूदगी खत्म करने की मांग उठाई गई. उन्होंने कहा कि इसमें बड़ा खेल चल रहा है और अगर जांच हो जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी. (आंचल श्रीवास्तव की रिपोर्ट)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today