ए-1 फार्मिंग सिस्टम से गन्ने की खेतीगन्ने की खेती में A-1 फार्मिंग सिस्टम से क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है. गन्ने की कम पैदावार से जूझते किसानों के लिए यह नई तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है. इस तकनीक की मदद से किसान कम पानी, कम खाद में 200 टन प्रति एकड़ तक गन्ने का उत्पादन ले सकते हैं. ए-1 फार्मिंग सिस्टम गन्ने की खेती की ऐसी विधि है जिसमें मिट्टी की सेहत सुधारने पर फोकस किया जाता है जिससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है.
गन्ने की खेती में A-1 सिस्टम मौसम में बदलाव, मिट्टी की नमी और खाद, कीटनाशकों के सही इस्तेमाल के बारे में पूरी जानकारी देता है. इस सिस्टम की मदद से किसान खाद के इस्तेमाल, ऑर्गेनिक इनपुट, मौसम की स्थिति, धूप, पानी की जरूरत, बुवाई के तरीकों और फसलों के बीच की दूरी के बारे में भी जानकारी पा सकते हैं.
गन्ने की खेती में बढ़ती लागत किसानों के सामने बड़ी समस्या है. लागत बढ़ाने में खाद और उर्वरकों का खर्च बड़ा हिस्ता होता है. यही वजह है कि ए-1 सिस्टम में उर्वरक प्रबंधन पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाता है और रासायनिक खादों की जगह प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खादों को महत्व दिया जाता है. यह नया सिस्टम बताता है कि उर्वरकों का सही और संतुलित प्रयोग किया जाए तो फसल में पानी की जरूरत भी कम होती है.
ए-1 फार्मिंग सिस्टम में मुख्य तौर पर तीन बातों पर ध्यान दिया जाता है-ऑर्गेनिक खाद, उर्वरक का सटीक प्रबंधन और फसल बुवाई के लिए क्यारियों के बीच अधिक स्पेसिंग. यह स्पेसिंग 5 गुणा 2 फीट का होनी चाहिए और इसी के मुताबिक पौधों की बुवाई की सलाह दी जाती है. इससे पौधों के बीच पानी, हवा, पोषक तत्वों और धूप आदि के लिए मारामारी नहीं होती है और पौधे तेजी से विकास करते हैं.
मिट्टी और उर्वरक प्रबंधन: ए-1 सिस्टम में खेतों में केमिकल खाद के अधिक प्रयोग से परहेज करते हैं या पूरी तरह से निषेध भी कर सकते हैं. उसकी जगह ऑर्गेनिक खाद जैसे कंपोस्ट आदि का प्रयोग किया जाता है. कंपोस्ट खुद से बनाएं तो और भी अच्छा. खादों का सटीक इस्तेमाल यानी जितना जरूरी और जितनी मांग हो, फसल में उतना ही छिड़काव करना है. इससे मिट्टी में जहर फैलने से रोका जा सकता है.
वैज्ञानिक खेती: ए-1 सिस्टम में गन्ने की बुवाई पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से की जाती है. इसमें गन्ने की क्यारियों के बीच स्पेसिंग का पूरा ध्यान रखा जाता है और 5 गुणा 2 फीट की दूरी पर बुवाई की जाती है. वैज्ञानिक विधि में रिंग पिट मेथड यानी गालाई में छोटा गड्ढा बनाकर भी बुवाई कर सकते हैं. इससे फसल को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है और पौधा मोटा और हेल्दी होता है.
सिंचाई प्रबंधन: ए-1 सिस्टम पारंपरिक, पानी बर्बाद करने वाली बाढ़ के बजाय, मिट्टी में सही नमी बनाए रखने पर फोकस करता है, जिससे 40% तक पानी की बचत होती है.
पौधे लगाने की तकनीक: यह विधि बीज की जरूरत को 75% तक कम करने के लिए नर्सरी में उगाए गए, स्वस्थ पौधों या सिंगल-बड चिप्स का इस्तेमाल करने की सलाह देती है.
इंटरक्रॉपिंग: इनकम बढ़ाने और खरपतवार की ग्रोथ को 60% तक कम करने के लिए पंक्तियों के बीच दूसरी फसलें उगाने को बढ़ावा देता है.
विशेषज्ञों की सलाह: ज्यादा से ज्यादा पौधे और स्वस्थ पौधे उगाने के लिए मौसम, मिट्टी की नमी और कीट नियंत्रण के बारे में तकनीकी सलाह का सख्ती से पालन करना शामिल है.
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