धान की खेती (Paddy farming)देश में खरीफ सीजन शुरू होते ही किसान धान की खेती की तैयारी में जुट जाते हैं. धान भारत की सबसे जरूरी फसलों में से एक है. हर किसान चाहता है कि उसकी फसल जल्दी तैयार हो, कम खर्च आए और ज्यादा पैदावार मिले. ऐसे में अब किसान पुराने बीज छोड़कर नई और उन्नत किस्मों की तरफ बढ़ रहे हैं. ये नई किस्में कम समय में ज्यादा उत्पादन देती हैं और कई बीमारियों से भी फसल को बचाती हैं.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान सही किस्म का चुनाव करें, तो कम मेहनत में भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. आज हम आपको धान की ऐसी 5 शानदार किस्मों के बारे में बता रहे हैं, जो किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं.
CSR-10 धान की एक खास किस्म है. यह उन जगहों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है जहां जमीन में नमक ज्यादा हो या खेत में पानी भर जाता हो. कई बार किसान ऐसी जमीन में अच्छी खेती नहीं कर पाते, लेकिन यह किस्म वहां भी अच्छा उत्पादन देती है.
यह धान करीब 120 से 125 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी पैदावार लगभग 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है. इसके दाने छोटे, चमकदार और सफेद होते हैं, इसलिए बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है.
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे कई राज्यों में किसान इसकी खेती कर रहे हैं. कम खराब होने वाली यह किस्म किसानों को अच्छा फायदा देती है.
NDR-359 धान की बहुत लोकप्रिय किस्म है. यह जल्दी पकने वाली फसल मानी जाती है. किसान इसे इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह सिर्फ 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है.
इसकी पैदावार भी काफी अच्छी होती है. एक हेक्टेयर में करीब 50 से 55 क्विंटल धान मिल सकता है. इसके पौधे ज्यादा लंबे नहीं होते, इसलिए तेज हवा और बारिश में गिरने का डर कम रहता है.
सबसे बड़ी बात यह है कि यह कई खतरनाक बीमारियों से लड़ने की ताकत रखती है. उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा के किसान इसकी खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. कम समय में अच्छी कमाई करने के लिए यह किस्म बहुत फायदेमंद मानी जाती है.
अनामिका धान की ऐसी किस्म है जिसे पूर्वी भारत में बहुत पसंद किया जाता है. बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के किसान इसकी खेती ज्यादा करते हैं.
यह धान करीब 130 से 135 दिनों में तैयार होती है. इसकी पैदावार लगभग 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है. इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं. पकने के बाद इसका चावल स्वादिष्ट और हल्का चिपचिपा बनता है.
अच्छे स्वाद की वजह से बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. किसान बताते हैं कि इस किस्म से उन्हें अच्छी कीमत मिलती है और मुनाफा भी ज्यादा होता है.
WGL-32100 धान की एक उन्नत और ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म है. यह करीब 125 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी खास बात यह है कि इसकी पैदावार 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है.
इसके पौधे ज्यादा ऊंचे नहीं होते. इसलिए तेज हवा और बारिश में फसल गिरती नहीं है. इसके दाने छोटे और पतले होते हैं, जिन्हें बाजार में काफी पसंद किया जाता है. अच्छी गुणवत्ता और मजबूत पौधों की वजह से यह किस्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
IR-36 धान की एक पुरानी लेकिन भरोसेमंद किस्म है. यह खासतौर पर उन इलाकों के लिए अच्छी मानी जाती है जहां बारिश कम होती है.
यह धान करीब 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी पैदावार 40 से 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है. यह सूखा सहन करने वाली किस्म है, इसलिए कम पानी में भी अच्छी फसल दे देती है. इसके अलावा यह कई कीटों और बीमारियों से भी लड़ने की ताकत रखती है. यही वजह है कि किसान आज भी इस किस्म पर भरोसा करते हैं.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी खेती के लिए सही बीज का चुनाव बहुत जरूरी है. अगर किसान उन्नत किस्मों का इस्तेमाल करें, तो कम खर्च में ज्यादा उत्पादन पा सकते हैं.
आज के समय में मौसम तेजी से बदल रहा है. ऐसे में ऐसी किस्में चुनना जरूरी है जो कम समय में तैयार हों और बीमारियों से सुरक्षित रहें. धान की ये 5 किस्में किसानों के लिए कमाई का शानदार मौका बन सकती हैं.
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