
इसके फलों का औसत भार 90 से 100 ग्राम तक होता हैभारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) वाराणसी द्वारा अपने उन्नत टमाटर संकर ‘काशी अभिमान’ के अनुसंधान, उत्पादन एवं विपणन अधिकारों के लिए रियल एग्री क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर, महाराष्ट्र के साथ लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता भारतीय सब्जी बीज उद्योग में संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियों की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है. संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए ‘काशी अभिमान’ संकर की विशेषताओं की जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि यह संकर निर्धारक वृद्धि प्रकृति वाला है, जिसके फल गहरे लाल रंग और सख्त बनावट वाले होते हैं. इसके फलों का औसत भार 90 से 100 ग्राम तक होता है. डॉ. कुमार ने बताया कि ‘काशी अभिमान’ की उत्पादन क्षमता 800 से 900 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है. इसकी उच्च उत्पादन क्षमता किसानों और बीज कंपनियों दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी.
उन्होंने इस अवसर पर संस्थान द्वारा विकसित अन्य लोकप्रिय प्रजातियों जैसे भिंडी की ‘काशी सहिष्णु’ तथा मटर की ‘काशी तृप्ति’ और ‘काशी अगेती’ का भी उल्लेख किया.

डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि आईआईवीआर की तकनीकों ने देशभर की बीज कंपनियों के बीच विशेष पहचान बनाई है और कई कंपनियां पहले से ही इन प्रजातियों का लाइसेंस लेकर सफल उत्पादन एवं विपणन कर रही हैं.
उधर, रियल एग्री क्रिएशन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से उत्तर विभाग के विपणन एवं विक्रय प्रमुख अरविंद कृष्णावत ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आईआईवीआर के साथ यह साझेदारी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण और लाभकारी साबित होगी. इस दौरान उन्होंने टमाटर प्रजनकों और वैज्ञानिकों के साथ तकनीकी विषयों पर चर्चा भी की. कंपनी की ओर से जितेंद्र कुमार भी उपस्थित रहे.
इस दौरान यह भी बताया गया कि भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित अनेक उन्नत एवं उच्च उत्पादन क्षमता वाली सब्जी प्रजातियां और संकर भविष्य में भी विभिन्न बीज कंपनियों को लाइसेंस के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे. संस्थान किसानों की आय बढ़ाने, गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराने तथा भारतीय सब्जी बीज उद्योग को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है.

आईआईवीआर की तकनीकों एवं संकरों के प्रति निजी क्षेत्र की बढ़ती रुचि इस बात का प्रमाण है कि संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियां भविष्य में देश के कृषि एवं बीज क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एबी. सिंह, डॉ. डीपी. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके. सिंह, डॉ. सुदर्शन मौर्य, डॉ. त्रिभुवन चौबे, डॉ. जेके. तिवारी तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वाईएस. रेड्डी मौजूद रहे. कार्यक्रम का समन्वयन वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सदस्य सचिव आईटीएमयू डॉ. इन्दीवर प्रसाद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीरज सिंह ने प्रस्तुत किया.
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