नकली बीज की पहचान का सटीक तरीकाइन दिनों खरीफ की फसलों की बुआई के लिए किसान जोर-शोर से तैयारी कर रहे होंगे और खेतों से अच्छी पैदावार लेने के लिए हमारे किसान बड़ी मात्रा में खाद, उत्तम गुणवत्ता वाले बीज और कीटनाशक दवाएं खरीद रहे हैं. लेकिन दुख की बात यह है कि इस भारी मांग का फायदा उठाकर कुछ लालची दुकानदार किसानों को पुराने या गलत बीज, मिलावटी खाद और नकली दवाएं बेच देते हैं. इस धोखाधड़ी की वजह से किसानों की मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो जाते हैं और अंत में भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इससे बचने के लिए हमेशा असली बीज पहचानने के लिए पैकेट पर लगे सरकारी टैग का रंग जरूर देखें. ठगी से बचने और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए खरीदारी के समय कुछ बेहद जरूरी सावधानियां रखनी चाहिए.
बीज ही अच्छी फसल का आधार है, इसलिए इसमें कोई चूक नहीं होनी चाहिए. बीज खरीदने से पहले यह तय कर लें कि आपको किस वैरायटी का और कितना बीज चाहिए, ताकि फिजूलखर्ची न हो. हमेशा सरकार से रजिस्टर्ड और भरोसेमंद दुकान से ही खरीदारी करें. असली और अच्छी क्वालिटी के बीज पहचानने के लिए सरकार द्वारा दिए गए टैग का रंग देखें. प्रजनक (Breeder) बीज के लिए सुनहरा पीला टैग, आधार (Foundation) बीज के लिए सफेद टैग और प्रमाणित (Certified) बीज के लिए नीले रंग का टैग लगा होता है. इसके अलावा, पैकेट को ध्यान से देखें कि वह कहीं से फटा न हो, उस पर दोबारा हाथ से सिलाई न की गई हो और सील बिल्कुल दुरुस्त हो. सबसे जरूरी बात, पैकेट पर लिखे जमाव प्रतिशत, एक्सपायरी डेट और उपयोग की अंतिम तिथि जांचना कभी न भूलें.
दुकान से लाए गए बीजों की शुद्धता और उनके उगने की क्षमता (अंकुरण प्रतिशत) को जांचने के लिए घर पर एक छोटा सा टेस्ट जरूर करें. इसके लिए बोने वाले बीज के ढेर में से 4-5 अलग-अलग जगहों से थोड़े-थोड़े सैंपल लें और देखें कि उसमें कंकड़, घास-फूस या दूसरी फसल के दाने तो नहीं हैं. इसके बाद अंकुरण जांचने के लिए दो आसान तरीके अपना सकते हैं. पहला तरीका पेपर विधि - इसमें 3-4 कागज जैसे अखबार या सोख्ता पेपर को गीला करके एक के ऊपर एक रखें, उस पर लाइन से 100 बीज बिछा दें और पेपर को मोड़कर रख दें. समय-समय पर पानी छिड़ककर नमी बनाए रखें. दूसरा तरीका सीड बॉक्स विधि है. इसमें एक लकड़ी के बॉक्स में रेत बिछाकर उस पर बीज रखें और ऊपर से डेढ़ सेंटीमीटर भुरभुरी मिट्टी डाल दें. 4-5 दिनों में पौधे बाहर आ जाएंगे. अगर 100 में से 80 से 90 बीज ठीक से अंकुरित होते हैं, तो समझें बीज की क्वालिटी दमदार है.
रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक दवाओं में मिलावट का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इसलिए कभी भी खुली हुई खाद या ढीली दवाएं न खरीदें. हमेशा सीलबंद और ब्रांडेड बैग या डिब्बे ही लें. खाद का बोरा लेते समय हाथ मारकर देख लें कि अंदर खाद के कड़े ढेले या पत्थर तो नहीं बन गए हैं, क्योंकि नमी के कारण ढेले बनने से खाद की ताकत खत्म हो जाती है. इसी तरह, कीटनाशक दवाओं की शीशी या पैकेट को चेक करें कि वह कहीं से लीक या क्षतिग्रस्त न हो. दवाओं पर लिखी एक्सपायरी डेट को तो बिल्कुल कड़ाई से जांचें, अगर डेट निकल चुकी हो या कुछ ही दिन बचे हों, तो उसे भूलकर भी न खरीदें.
खेती का कोई भी सामान खरीदते समय दुकानदार से पक्का बिल मांगना आपका अधिकार है और संकट के समय यही आपकी सबसे बड़ी ढाल बनता है. पक्के बिल पर खरीद की तारीख, खाद/बीज/दवा का पूरा नाम, मात्रा, कीमत, बैच नंबर और उसकी एक्सपायरी डेट साफ-साफ लिखी होनी चाहिए. अगर कोई दुकानदार आपको पक्का बिल देने से मना करता है, तो तुरंत इसकी लिखित शिकायत अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय या जिला उप-संचालक कृषि से करें. याद रखें, सजग किसान ही समृद्ध किसान बनता है. इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर आप नकली सामान बेचने वालों के जाल से बच सकते हैं और अपनी फसलों से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं.
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