गन्ना किसानों के लिए 'कड़वा' हुआ नए कानून का ड्राफ्ट, अन्नदाता के मुनाफे पर लगी सरकारी 'पाबंदी'

गन्ना किसानों के लिए 'कड़वा' हुआ नए कानून का ड्राफ्ट, अन्नदाता के मुनाफे पर लगी सरकारी 'पाबंदी'

Sugarcane Control Order 2026: जब खुले बाजार में फसलों को MSP से ज्यादा भाव मिलने का हक है, तो गन्ने पर यह बेड़ियां क्यों? जब बाजार में मांग है, तो तय सरकारी रेट से ज़्यादा दाम पर क्यों लाया गया रोक लगाने का प्रावधान? गन्ना किसानों के साथ अन्याय क्यों? क्या यह चीनी मिलों को 'सस्ता' गन्ना दिलाने की सरकारी साठगांठ? जान‍िए, नए शुगर कंट्रोल ऑर्डर पर क्यों हो रहा बवाल?  

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गन्ना किसानों के लिए 'कड़वा' हुआ नए कानून का ड्राफ्ट, अन्नदाता के मुनाफे पर लगी सरकारी 'पाबंदी' नए शुगर कंट्रोल ऑर्डर से क‍िसानों में असंतोष.

प्रस्तावित शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर-2026 में एक ऐसा प्रावधान क‍िया गया है जो सीधे तौर पर क‍िसानों के ह‍ितों पर चोट है. जब क‍िसानों को क‍िसी फसल का दाम उसके सरकारी रेट (MSP)  से कम म‍िलता है तो सरकार मौन हो जाती है, लेक‍िन जब दाम अच्छा म‍िलने लगे तो उस पर अंकुश लगाने के ल‍िए तरह-तरह के पैंतरे चलती है. खासतौर पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने, एक्सपोर्ट बैन करने और स्कॉक लगाने जैसे प्रावधान करके क‍िसानों के ह‍ितों पर चोट मारी जाती है. हालांक‍ि, आमतौर पर यह कहने से बचती है क‍ि कोई भी चीज इस कीमत से अध‍िक पर नहीं ब‍िकेगी. लेक‍िन नए शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर के ड्राफ्ट में कहा गया क‍ि खांडसारी यून‍िटें एफआरपी (Fair and Remunerative Price) या एसएपी (State Advised Price) से अध‍िक कीमत नहीं देंगी. गन्ना क‍िसानों में इस प्रावधान को लेकर व‍िरोध है. बड़ा सवाल यह है क‍ि नए नियम लगाकर क्या सरकार किसानों को 'जबरन' चीनी मिलों का बंधक बना रही है?

भारतीय क‍िसान यून‍ियन-अराजनैत‍िक के राष्ट्रीय प्रवक्ता  धर्मेंद्र मल‍िक ने इस प्रावधान पर तीखी प्रत‍िक्रिया दी है. उन्होंने कहा है क‍ि खांडसारी उद्योग द्वारा FRP से अधिक भुगतान पर सीमा या प्रतिबंध लगाना किसानों के हितों के खिलाफ घातक कदम है. यदि बाजार में मांग हो तो सभी कृषि उत्पाद MSP या FRP से अधिक कीमत पर बिकते हैं. फिर केंद्र सरकार गन्ने के अधिक मूल्य पर रोक क्यों लगाना चाहती है?क्या यह खुले बाजार में क‍िसानो को अच्छा भाव दे रही खांडसारी यूनिटों के हाथ बांधने की तैयारी है? इस प्रावधान को हटाया जाए.  

ड्राफ्ट में क्या ल‍िखा है? 

नए शुगर कंट्रोल ऑर्डर के ड्राफ्ट में ल‍िखा है क‍ि केंद्र सरकार या राज्य सरकार, केंद्र सरकार की सहमति से, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, खांडसारी चीनी बनाने वालों या उनके एजेंटों द्वारा खरीदे गए गन्ने के लिए, गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) या कीमत तय कर सकती है. बशर्ते कि इस प्रकार तय किया गया गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य या कीमत, उस क्षेत्र में चीनी बनाने वालों द्वारा भुगतान के लिए तय किए गए गन्ने के उचित मूल्य से अधिक नहीं होगी. 

दबाव में हैं चीनी म‍िलें 

केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल 2026 को भारत सरकार के अवर सचिव जयवीर सिंह (उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग) के कार्यालय के माध्यम से गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 में संशोधन के ल‍िए एक ड्राफ्ट जारी किया है, ताकि अंतिम आदेश जारी करने से पूर्व सभी हितधारकों की राय प्राप्त की जा सके. इसके कई प्रावधान गन्ना किसानों के ख‍िलाफ हैं. उत्तर प्रदेश में कई गुड़ और खांडसारी यूनिट किसानों को 425 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव दे रही है. इनसे चीनी मिलों को कड़ी टक्कर मिल रही है. उन पर दबाव बढ़ गया है और उन्हें गन्ने की पर्याप्त सप्लाई जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में ड्राफ्ट क‍िसानों की बजाय चीनी म‍िलों का ह‍ित साधने वाला लगता है. 

खांडसारी यून‍िटों का व‍िस्तार क्यों? 

इस समय रोजाना 500 टन तक गन्ने की पेराई करने वाली 66 खांडसारी यूनिटों का पता चला है. देश में कुल 373 खांडसारी यूनिटें हैं, जिनकी पेराई क्षमता रोजाना लगभग 95000 टन की है. 1 मई 2025 को यह आंकड़ा खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने द‍िया था. खांडसारी अनप्रोसेस्ड चीनी होती है जो गन्ने के रस से बनाई जाती है. इसे देसी खांड कहते हैं. सफेद चीनी से होने वाले नुकसान की वजह से लोगों ने इसका सेवन बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से चीनी मिलों को जाने वाला गन्ना बड़े पैमाने पर खांडसारी यूनिटों में डायवर्ट हो गया है.

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