बारिश से गेहूं को फायदादेश में मौसम का मिजाज काफी तेजी से बदल रहा है. फरवरी की शुरूआत में बढ़ती गर्मी के बाद अब कई राज्यों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश ने गेहूं किसानों के माथे से चिंता की लकीर को हटा दिया है. दरअसल, हरियाणा के कई जिलों में बुधवार और गुरुवार की रात हुई बारिश से किसानों को राहत मिली है, जो गेहूं की फसल के लिए एक वरदान की तरह है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में असामयिक वृद्धि, जो 24 से 26 डिग्री के बीच थी, उसने चिंता पैदा कर दी थी, लेकिन बारिश से तापमान में कमी आई है. वहीं, इससे फसल की वृद्धि में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों ने कहा कि बारिश से एक बार सिंचाई का काम बच गया है, जिससे किसानों के ईंधन और मेहनत की भी बचत हुई है.
भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने कहा कि बारिश से हवा में नमी बढ़ गई है, जो गेहूं की फसल के लिए बहुत फायदेमंद है. उन्होंने कहा कि गेहूं अभी दाना बनने और दाना भरने की अवस्था में है. इस महत्वपूर्ण समय में तापमान में गिरावट से बेहतर उपज में योगदान मिलेगा.
बता दें कि इस सीजन पूरे देश में 32.4 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की गई है, जिसका महत्वाकांक्षी उत्पादन लक्ष्य 115 मिलियन टन है. वहीं, पिछले साल देश में 113.29 मिलियन टन उत्पादन हुआ था वो भी अनुकूल जलवायु परिस्थितियों के साथ. ऐसे में बारिश के बाद विशेषज्ञों को इस साल भी अच्छी फसल की उम्मीद है.
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आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने बताया कि पिछले एक पखवाड़े से तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी ने किसानों के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों की भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे उत्पादन में कमी आ सकती है. उन्होंने कहा कि अभी मौसम की स्थिति गेहूं के दाने के विकास के लिए बहुत अनुकूल है.
हालांकि, फायदे के साथ-साथ, विशेषज्ञों ने नमी के बढ़ते स्तर के कारण रस्ट (पीले और भूरे रंग के) की संभावना के बारे में भी सलाह जारी की है. इसके लिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों पर पीले या भूरे रंग के रस्ट के किसी भी लक्षण के लिए बारीकी से निगरानी करें और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उसे नष्ट करने का उपाय करें.
डॉ. तिवारी ने कहा कि हालांकि, यह बारिश काफी हद तक लाभदायक है, लेकिन किसानों को रस्ट रोग के बढ़ने के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जिसे समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो उपज पर असर पड़ सकता है. इस बीच कैथल जिले के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि के साथ बारिश से फसलें बर्बाद भी हो गई हैं और किसानों ने मुआवजे के लिए विशेष गिरदावरी की मांग की है.
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