महाराष्ट्र में प्याज संकट पर एक्शनमहाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में बार-बार गिरावट और उतार-चढ़ाव से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है. इस समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने अब राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को घोषणा की है कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई जाएगी. इस समिति में कृषि विभाग और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, साथ ही विपणन विभाग के सचिव शामिल होंगे. सरकार ने इस समिति को दो बड़े काम दिए हैं. पहला जिन किसानों को प्याज की कीमत गिरने से नुकसान हुआ है, उन्हें तुरंत राहत कैसे दी जाए इस पर सुझाव देना. वहीं, दूसरा भविष्य में प्याज की कीमतें बार-बार न गिरे, इसके लिए लंबी अवधि की योजना तैयार करना है.
सरकार सभी किसानों को तुरंत मदद भी देना चाहती है और साथ ही ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है जिससे आगे चलकर उन्हें बार-बार नुकसान न झेलना पड़े. वहीं, मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करके उसे मजबूत और बेहतर बनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी. उन्होंने बताया कि प्याज के व्यापार में जो गड़बड़ियां होती हैं, उन्हें रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे. साथ ही, कीमतों को स्थिर रखने के लिए प्याज के निर्यात को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सके. इस मुद्दे पर चर्चा के लिए जल्द ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ एक बैठक भी होने वाली है.
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब प्याज का उत्पादन तो बहुत ज्यादा हो गया है, लेकिन बाजार उतनी तेजी से नहीं बढ़ा है. इसी वजह से कीमतों में बार-बार गिरावट और उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है. अधिकारियों के अनुसार, कई बार बिचौलिए किसानों से सस्ते दाम पर प्याज खरीद लेते हैं और फिर उसे भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नाफेड) जैसी सरकारी एजेंसियों को ज्यादा दाम पर बेच देते हैं. इससे किसानों को सही मुनाफा नहीं मिल पाता है. सरकार अब इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने की योजना बना रही है.
इसके अलावा बनाई गई समिति यह भी देखेगी कि नासिक, पुणे, अहिल्यानगर और सोलापुर जैसे बड़े प्याज उत्पादक इलाकों में किसान सिर्फ प्याज पर निर्भर न रहें. इसके लिए फसल विविधीकरण (यानी अलग-अलग फसलें उगाने) के विकल्प तलाशे जाएंगे, ताकि किसानों की आय स्थिर और सुरक्षित रह सके. राज्य सरकार की योजना है कि आने वाले खरीफ सीजन से ही फसल विविधीकरण का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाए. ताकि वे सिर्फ प्याज पर निर्भर न रहें. इसके साथ ही प्याज की खेती में भी सुधार करने पर ध्यान दिया जाएगा. बेहतर किस्म के बीज चुनने और उत्पादन बढ़ाने के लिए काम किया जाएगा, ताकि किसानों को ज्यादा फायदा मिल सके.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर किसानों को ज्यादा लाभ देने वाली फसलों की ओर धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, तो अगले 2 से 3 साल में बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि अभी जो स्थिति है, ज्यादा उत्पादन, सप्लाई में दिक्कतें और बार-बार सरकारी हस्तक्षेप ये सब मिलकर आखिरकार किसानों के लिए नुकसान का कारण बनते हैं. इसलिए इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है. सरकार ने समिति को निर्देश दिया है कि वह तुरंत ऐसे सुझाव दें, जिससे किसानों को जल्दी राहत मिल सके. वहीं, लंबे समय के सुधारों के लिए 2 से 3 महीनों के भीतर एक पूरा प्लान (रोडमैप) तैयार करने को कहा गया है.
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