बिहार में एमएसपी पर होगी मसूर दाल की खरीदबिहार के मसूर दाल उगाने वाले किसानों को एक बड़ा फायदा होने वाला है. नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NAFED) इस रबी सीजन में लगभग 32,000 मीट्रिक टन मसूर दाल, सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,000 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदने की तैयारी कर रहा है.
यह पहली बार है जब केंद्रीय खरीद एजेंसी राज्य के खेतों से सीधे MSP पर मसूर दाल खरीदेगी. अब तक, बिहार में केवल धान और गेहूं को ही इस तरह की पक्की खरीद का फायदा मिलता था. यह कदम केंद्र सरकार से मिली तुरंत मंजूरी के बाद उठाया गया है. राज्य ने 11 फरवरी को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान इस मामले में दखल की मांग की थी.
राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने इस फैसले को किसानों के लिए "एक बहुत अच्छी खबर" बताया. उन्होंने कहा, "पहली बार, बिहार में दालों की भी MSP पर खरीद की जाएगी," और इस मंजूरी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिया. "इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि दालों के उत्पादन को भी जोरदार बढ़ावा मिलेगा."
NAFED के बिहार प्रमुख, रंजय कुमार ने पुष्टि की कि खरीद का काम प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) और व्यापार मंडलों के जरिए किया जाएगा. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हमारे पास खरीद पूरी करने के लिए 60 दिनों का समय है, जो खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से घोषित तारीख से शुरू होगा."
अधिकारियों का कहना है कि यह समय एकदम सही है. जहां बाजार में अभी मसूर दाल 6,300-6,400 प्रति क्विंटल के भाव बिक रही है, वहीं 7,000 रुपये का MSP किसानों को साफ तौर पर ज्यादा फायदा देता है. पिछले साल, केंद्र ने सरसों, चना और मसूर की खरीद को मंजूरी दी थी, लेकिन यह प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी क्योंकि खुले बाजार के भाव MSP से ज्यादा थे. इस सीजन में, बिहार में लगभग 137,000 मीट्रिक टन मसूर का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिससे NAFED को अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा मिल जाएगी.
मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत, खरीद के तीन दिनों के भीतर ही किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान जमा कर दिया जाएगा. मंत्री ने भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया आधार (Aadhaar) से जुड़ी होगी और पूरी तरह से पारदर्शी होगी. राज्य सरकार खरीद केंद्र बनाएगी, रजिस्ट्रेशन का काम संभालेगी, भंडारण और भुगतान की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करेगी. यादव ने मसूर उगाने वाले किसानों से बड़ी संख्या में रजिस्ट्रेशन करवाने की अपील की. उन्होंने कहा, "आप जितना ज्यादा रजिस्ट्रेशन करवाएंगे, आपको उतना ही ज्यादा फायदा होगा." उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार किसानों को समय पर हर संभव फायदा पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.
इस पहल को चावल और गेहूं से आगे बढ़कर फसलों की संख्या बढ़ाने, आयातित दालों पर देश की निर्भरता कम करने और ग्रामीण आय को मजबूत करने के बड़े अभियान के एक हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है. बिहार के छोटे और सीमांत किसानों के लिए—जो राज्य के मसूर उत्पादक क्षेत्र की रीढ़ हैं—MSP पर खरीद की यह गारंटी इस सीजन में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है.
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