UP: फसल खराब होने पर अब किसानों को नहीं पड़ेगा भटकना, इस हेल्पलाइन नंबर पर मिलेगी मदद

UP: फसल खराब होने पर अब किसानों को नहीं पड़ेगा भटकना, इस हेल्पलाइन नंबर पर मिलेगी मदद

Crop Damage: डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने आगे बताया कि इन सभी डिजिटल माध्यमों के अतिरिक्त, यदि किसानों को फसल बीमा से संबंधित किसी भी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वे उसके त्वरित समाधान के लिए अपने जनपद के उप कृषि निदेशक या जिला कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. 

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UP: फसल खराब होने पर अब किसानों को नहीं पड़ेगा भटकना, इस हेल्पलाइन नंबर पर मिलेगी मददबारिश, आंधी या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता होती हैं

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत दी है. दरअसल, बारिश, आंधी या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता होती हैं. कई बार मेहनत से उगाई गई फसल कुछ ही दिनों में खराब हो जाती है. ऐसे में प्रदेश में संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) एवं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल क्षति की सूचना देने तथा योजनाओं के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए किसानों को विभिन्न डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं. अब किसान फसल नुकसान की तत्काल सूचना देने या जानकारी प्राप्त करने के लिए टोल-फ्री नंबर (KRPH) 14447 का प्रयोग कर सकते हैं. यह जानकारी प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने दी.

कृषि विभाग ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

उन्होंने बताया कि 'क्राप-इन्श्योरेन्स एप्प' (Crop-Insurance-App) और व्हाट्सएप चैटबॉट नंबर 7065514447 के माध्यम से भी सूचना साझा की जा सकती है. कृषक योजनाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए फसल बीमा पोर्टल https://pmfby.gov.in पर भी लॉग-इन कर सकते हैं. डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने आगे बताया कि इन सभी डिजिटल माध्यमों के अतिरिक्त, यदि किसानों को फसल बीमा से संबंधित किसी भी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो वे उसके त्वरित समाधान के लिए अपने जनपद के उप कृषि निदेशक या जिला कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. 

किसानों को आपदा में राहत पहुंचाना लक्ष्य

साथ ही, संबंधित जनपद में कार्यरत बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से भी सीधे संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है. उन्होंने बताया कि योगी सरकार का उद्देश्य इन माध्यमों के जरिए किसानों को आपदा की स्थिति में समयबद्ध तरीके से राहत पहुंचाना और बीमा प्रक्रियाओं को अधिक सरल बनाना है.

इन फसलों के नुकसान पर मिलता है मुआवजा

1- बुवाई न हो पाने की स्थिति (कम बारिश या खराब मौसम)
2- खड़ी फसल का नुकसान (सूखा, बाढ़, कीट, तूफान, ओलावृष्टि आदि)
3- कटाई के बाद 14 दिनों तक नुकसान (बारिश या चक्रवात)
4- स्थानीय आपदाएं जैसे जलभराव या भूस्खलन
 हालांकि, युद्ध या जानबूझकर किए गए नुकसान को इसमें शामिल नहीं किया जाता.

कितना देना होता है प्रीमियम

कृषि निदेशक डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस योजना में किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होता है. खरीफ फसल के लिए 2%, रबी फसल के लिए 1.5% और बागवानी/व्यावसायिक फसल के लिए 5%. बाकी का पैसा सरकार देती है, जिससे किसानों पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है.

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