सरसों की खेती का दायरा बढ़ना भारत के लिए राहत की बात. खाद्य तेलों पर बढ़ती विदेशी निर्भरता के बीच तिलहन फसलों के मोर्चे पर खेतों से एक अच्छी खबर आई है. तिलहन फसलों के एरिया में पिछले साल के मुकाबले 1.06 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है. इस साल अब तक 109.88 लाख हेक्टेयर में तिलहन फसलें बोई गई हैं. जबकि पिछले साल इनका रकबा 108.82 लाख हेक्टेयर ही था. सरसों का एरिया भारत के इतिहास में पहली बार 10 मिलियन हेक्टेयर के पार पहुंच गया है. इस साल 19 जनवरी तक देश में रिकॉर्ड 100.15 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.27 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. अब किसानों को अच्छा दाम मिले तो बल्ले-बल्ले हो जाएगा. पिछले साल इस अवधि तक सिर्फ 97.88 लाख हेक्टेयर में सरसों बोया गया था. सरसों को छोड़कर रबी सीजन की अन्य तिलहन फसलों, जैसे मूंगफली, कुसुम, सूरजमुखी, तिल और अलसी की बुवाई पिछले साल के मुकाबले पिछड़ी हुई है.
रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई ने भी इस बार रिकॉर्ड बना दिया है. पिछले वर्ष यानी 2023 में 19 जनवरी तक देश में सिर्फ 337.50 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था, जबकि इस बार इसी अवधि में 340.08 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी है. इस प्रकार पिछले वर्ष की तुलना में 2.58 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र कवर किया गया है. कुछ राज्य जनवरी के अंत तक क्षेत्र कवरेज की रिपोर्ट देते हैं. तब यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.
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उधर, धान की रोपाई अभी भी जारी है. हालांकि इस साल पिछली बार के मुकाबले इसका एरिया 1.09 लाख हेक्टेयर कम है. लेकिन मंत्रालय के अधिकारियों को उम्मीद है कि सामान्य या इससे अधिक क्षेत्र होगा. रबी सीजन के दौरान धान 52.50 लाख हेक्टेयर में बोया जाता है. इस साल अब तक 28.25 लाख हेक्टेयर में धान लगाया जा चुका है. जबकि पिछले साल इसी अवधि में यानी 19 जनवरी 2023 तक 29.33 लाख हेक्टेयर में रोपाई हो चुकी थी.
पश्चिम बंगाल, असम जैसे पूर्वी राज्यों और पूर्वोत्तर राज्यों में ग्रीष्मकालीन धान की रोपाई दिसंबर-जनवरी से शुरू हो जाती है, जबकि दक्षिणी राज्यों में मुख्य रूप से तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में रबी या ग्रीष्मकालीन धान की बुवाई और रोपाई फरवरी-मार्च तक जारी रहेगी.
रबी सीजन 2023-24 के दौरान 19 जनवरी तक 155.13 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुवाई हुई है. जबकि 2022-23
में इसी अवधि के दौरान 162.66 लाख हेक्टेयर में दलहन फसलों की बुवाई हो चुकी थी. यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार दलहन फसलों की बुवाई में 7.52 लाख हेक्टेयर की कमी है. कुछ राज्यों में, कम क्षेत्र कवरेज का कारण खरीफ फसलों की देर से कटाई, अन्य फसलों की ओर शिफ्ट करना, मिट्टी में नमी की कमी और धान की कटाई में देरी आदि है.
चना उत्पादन करने वाले मुख्य राज्यों में चने की बुआई लगभग पूरी हो गई है. आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड तमिलनाडु और ओडिशा जैसे कुछ राज्य रबी सीजन के दलहन के अंतर्गत क्षेत्र कवरेज की सूचना दे रहे हैं. इसलिए जनवरी के अंत तक राज्यों से क्षेत्र कवरेज की सूचना प्राप्त की जाएगी. पिछले साल के मुकाबले चना का एरिया 6.83, मूंग का 1.01 और उड़द का 0.95 लाख हेक्टेयर कम है.
मोटे अनाजों के एरिया में पिछले साल के मुकाबले 3.06 लाख हेक्टेयर का उछाल दर्ज किया गया है. इस साल अब तक 53.83लाख हेक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई की गई है. जबकि पिछले साल इस अवधि तक 50.77 लाख हेक्टेयर में ही मोटे अनाज बोए गए थे. मिलेट ईयर के दौरान हुई जागरूकता का असर खेतों तक दिख रहा है. रबी सीजन के मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का और जौ आते हैं. इनकी बुआई अभी भी जारी है. मक्का की बुवाई 21.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. ज्वार 23.52 और जौ 8.19 लाख हेक्टेयर में बोया गया है.
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