खेत में बिछी गेहूं की फसलएक बहुत पुरानी कहावत है गरीबी में आटा गीला, और यह कहावत गरीबों के जीवन में बार-बार सच होती हुई दिखाई देती है. इस समय, पूरे देश में गेहूं की कटाई का काम चल रहा है. कई राज्यों में कटाई का काम पूरा हो चुका है, जबकि कुछ अन्य राज्यों में यह अभी भी जारी है. हालाँकि, इन सबके बीच, सरकार और बारिश दोनों ही देश के किसानों से नाराज़ नज़र आ रहे हैं. अगर हम पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों और बिहार पर नज़र डालें, तो वहाँ गेहूं की कटाई अभी भी अधूरी है. नतीजतन, लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की फसलों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. वहीं दूसरी ओर, मध्य प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में, जहां गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है, वहां भी किसान अपनी उपज बेच नहीं पा रहे हैं.
ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सरकार गेहूं की खरीद की तारीखें रोज़ाना बदल रही है, जिसके चलते किसानों की गेहूं की फसलें बिना बिके ही पड़ी हुई हैं. हरियाणा सहित कई सूबों में किसान गेहूं खरीद के नियमों से परेशान हैं. इतने कंडीशन लगा दिए गए हैं कि सरकार को एमएसपी पर गेहूं बेचना किसानों के लिए आसान नहीं है. हरियाणा में किसान संगठन नए नियमों का विरोध कर रहे हैं ताकि गेहूं के किसानों को इससे राहत मिल सके.
पंजाब में इस बार अचानक हुई बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. करीब 1.30 लाख एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल खराब हो गई है. यह बारिश उस समय हुई जब फसल कटाई के लिए लगभग तैयार थी. ऐसे में किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है. आमतौर पर इस समय मंडियों में खूब गेहूं पहुंचता है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं. बारिश के कारण गेहूं की कटाई में देरी हो रही है. साथ ही मंडियों में भी गेहूं कम मात्रा में पहुंच रहा है. अभी तक करीब 11,984 मीट्रिक टन गेहूं ही मंडियों में आया है, जिसमें से लगभग 7,693 मीट्रिक टन की खरीद हुई है. आमतौर पर बैसाखी के समय तक मंडियां गेहूं से भर जाती हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है.
नूंह जिला में बेमौसमी बारिश ने किसानों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं. खेतों में खड़ी गेहूं की फसल लगातार बारिश से भीगकर खराब हो रही है. जो फसल किसान मंडी तक लेकर पहुंचे हैं, वह भी सुरक्षित नहीं रह पा रही है. पुन्हाना अनाज मंडी समेत कई मंडियों में अनाज खुले में पड़ा है, जो बारिश के कारण भीगकर सड़ने लगा है और वहां बदबू फैल रही है. किसानों का कहना है कि उनकी करीब आधी फसल बर्बाद हो चुकी है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है.
मंडी में शेड होने के बावजूद कई जगह आढ़तियों के कब्जे के कारण किसानों को अपना अनाज खुले में रखना पड़ रहा है. प्रशासन ने हालात को सामान्य बताया है, लेकिन किसान इससे सहमत नहीं हैं. किसानों ने सरकार से मांग की है कि फसल का जल्द सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए. साथ ही मंडियों में रखे अनाज को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, ताकि आगे और नुकसान से बचा जा सके. फिलहाल यह स्थिति किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है.
संगरूर में लगातार बारिश ने एक किसान की मेहनत को पूरी तरह बर्बाद कर दिया. अपनी फसल को खराब होता देख किसान फूट-फूटकर रो पड़ा. किसान मोहम्मद शफी ने बताया कि उन्होंने करीब पांच एकड़ जमीन में सब्जियों की खेती की थी. इसमें चार एकड़ में करेला और एक एकड़ में दूसरी सब्जियां लगाई थीं.
किसान का आरोप है कि नाले की समय पर सफाई नहीं होने और पुल के पास पानी जमा रहने के कारण उनका खेत पूरी तरह पानी में डूब गया. कई दिनों तक खेत में पानी भरा रहने से फसल सड़ने लगी. खासकर करेला की बेलें खराब हो रही हैं और पूरी फसल नष्ट होने की कगार पर है.
मोहम्मद शफी का कहना है कि उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी इस खेती में लगाई थी, लेकिन अब उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस नुकसान से उनका परिवार भी चिंतित है, क्योंकि उनकी आय का मुख्य साधन यही खेती थी. किसान ने सरकार से मदद और मुआवजे की मांग की है, ताकि उन्हें इस मुश्किल समय में राहत मिल सके.
फाजिल्का में लगातार हुई बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है. किसानों ने बताया कि उनकी मेहनत और निवेश अब पानी में बह गया है. इस अचानक और बेमौसमी बारिश ने उन्हें भारी आर्थिक संकट में डाल दिया है. प्रभावित किसानों ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि उनकी स्थिति को देखते हुए तुरंत मुआवजा दिया जाए. उनका कहना है कि इस मुश्किल समय में सरकार की मदद ही उनके लिए सबसे बड़ी राहत होगी. साथ ही किसानों ने हरियाणा के कृषि मंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए बयान की भी निंदा की है. उनका कहना है कि मंत्री के बे तुके बयान किसानों की पीड़ा और बढ़ा रहे हैं. किसानों का कहना है कि उनके सामने फसल नष्ट होने जैसी गंभीर समस्या है, इसलिए सरकार को उनके लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. कुल मिलाकर, फाजिल्का के किसान इस समय बेहद परेशान हैं और चाहते हैं कि सरकार उनकी फसल का नुकसान जल्दी से जल्दी आंकड़े और मुआवजा सुनिश्चित करे, ताकि वे अपने जीवन और परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकें.
धौलपुर जिला में मंगलवार को मौसम अचानक बदल गया. मौसम विभाग के अलर्ट के बाद तेज आंधी और भारी बारिश हुई. बारिश और हवा के चलते कई जगहों पर टीनशैड, बैनर और होर्डिंग उड़ गए. किसानों के लिए यह बारिश बड़ी आफत बन गई. खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल दोबारा भीग गई है, जिससे फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है. किसान अपनी मेहनत और फसल को बचाने के लिए चिंतित हैं. मौसम की इस अचानक तबाही ने धौलपुर के किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
हिमाचल प्रदेश में पिछले दो दिनों से मौसम ने कोहराम मचाया हुआ है. भारी बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है, जबकि मध्यपर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और ओलावृष्टि के साथ तेज तूफान भी देखे जा रहे हैं. इस बेमौसमी मौसम का असर फसलों और बागबानों पर भी पड़ा है. खासकर ऊपरी शिमला में सेब की फसल को नुकसान हुआ है. यहां बगीचों में हेल नेट से बचाव किया जाता है, लेकिन अचानक हुई बर्फबारी और ओलावृष्टि से कई बगीचों में नुकसान हुआ है. किसान चिंतित हैं.
मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं उपार्जन को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर 7 अप्रैल से ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी है. इसके तहत किसान पहले से अपना समय निर्धारित करके सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेच सकेंगे, जिससे लंबा इंतजार और भीड़ नहीं होगी. इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभागों में 10 अप्रैल से और बाकी संभागों में 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू होगी.
प्रदेश में इस साल 3627 उपार्जन केंद्र तैयार किए गए हैं और 19 लाख से ज्यादा किसानों ने पंजीकरण कराया है. गेहूं की खरीद 2625 रुपये प्रति क्विंटल दर से होगी, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस शामिल है.
भोपाल जिले में एडीएम सुमित पांडे ने खरीद की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसान आसानी से अपनी उपज बेच सकें और अनावश्यक भीड़ न हो. इस कदम से किसानों के लिए उपार्जन प्रक्रिया डिजिटल, सरल और पारदर्शी हो गई है.
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