Wheat Procurement: गेहूं खरीदी का टूटा रिकॉर्ड, पिछले साल से इतनी ज्‍यादा प्रोक्‍योरमेंट, कौन-सा राज्‍य है आगे?

Wheat Procurement: गेहूं खरीदी का टूटा रिकॉर्ड, पिछले साल से इतनी ज्‍यादा प्रोक्‍योरमेंट, कौन-सा राज्‍य है आगे?

देशभर में गेहूं की सरकारी खरीद 333 लाख टन के पार पहुंच गई है. पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में खरीद में तेजी दर्ज की गई है, जबकि बेमौसम बारिश से प्रभावित फसल को राहत देते हुए सरकार ने गुणवत्ता मानकों में छूट भी दी है.

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Wheat Procurement: गेहूं खरीदी का टूटा रिकॉर्ड, पिछले साल से इतनी ज्‍यादा प्रोक्‍योरमेंट, कौन-सा राज्‍य है आगे?गेहूं खरीदी ने बनाया रिकॉर्ड (फाइल फोटो)

देशभर में रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के दौरान गेहूं की सरकारी खरीद लगातार बढ़ रही है. 21 मई तक केंद्र सरकार की कुल खरीद 333 लाख टन तक पहुंच गई है. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 13 फीसदी ज्‍यादा है. हालांकि, तय लक्ष्य 345 लाख टन से सरकार अब भी 12 लाख टन पीछे चल रही है. पिछले सीजन में कुल 300 लाख टन गेहूं खरीदा गया था, जबकि इस बार रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान के चलते खरीद लक्ष्य बढ़ाया गया है.

पंजाब में खरीद लगभग लक्ष्य तक पहुंची

पंजाब में इस सीजन सरकारी एजेंसियों ने 121.6 लाख टन गेहूं खरीदा है, जो पिछले साल की तुलना में थोड़ा ज्‍यादा है. केंद्र ने राज्य के लिए 122 लाख टन खरीद का लक्ष्य तय किया था. इस बार मार्च और अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कई जिलों में गेहूं की चमक प्रभावित हुई, जिसके कारण बड़ी मात्रा में फसल को गुणवत्ता मानकों में छूट देकर खरीदा गया. यानी गेहूं में लस्टर लॉस होने के बावजूद किसानों की उपज को सरकारी खरीद में शामिल किया गया.

हरियाणा ने लक्ष्य से ज्यादा गेहूं खरीदा

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुता‍बिक, हरियाणा में सरकारी खरीद 81 लाख टन के पार पहुंच चुकी है. राज्य में खरीद प्रक्रिया 15 मई को समाप्त हो गई थी और यह तय लक्ष्य 72 लाख टन से काफी ज्यादा रही. पिछले साल हरियाणा से लगभग 71 लाख टन गेहूं खरीदा गया था. इस बार बेहतर आवक और तेज खरीद व्यवस्था का असर आंकड़ों में दिखाई दिया.

MP में धीमी शुरुआत के बाद खरीद में बड़ा उछाल

मध्य प्रदेश में इस बार गेहूं खरीद ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है. राज्य में अब तक करीब 95 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 78 लाख टन था. शुरुआत में खरीद की रफ्तार बेहद धीमी रही. एजेंसियों के पास पर्याप्त बारदाना और खरीद केंद्रों की तैयारी नहीं होने से किसानों को परेशानी हुई थी.

हालात ऐसे थे कि अप्रैल के अंत तक राज्य में खरीद पिछले साल के मुकाबले करीब 59 फीसदी कम चल रही थी. इसके बाद विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने लगातार दबाव बनाया. केंद्र सरकार ने भी राज्य की मांग स्वीकार करते हुए खरीद लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया. मई महीने में खरीद में अचानक तेजी आई और सिर्फ 1 से 21 मई के बीच लगभग 92 लाख टन गेहूं खरीदा गया.

यूपी, राजस्थान और बिहार में भी खरीद लक्ष्य बढ़ा

वहीं, उत्तर प्रदेश में अब तक लगभग 14.8 लाख टन गेहूं खरीदा जा चुका है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 10 लाख टन था. केंद्र ने राज्य का खरीद लक्ष्य 10 लाख टन से बढ़ाकर 25 लाख टन कर दिया है. राजस्थान में भी खरीद बढ़कर 20.3 लाख टन तक पहुंच गई है.

इधर, बिहार में सरकारी खरीद अभी सीमित है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले इसमें तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है. बिहार में अब तक 33 हजार टन से ज्यादा गेहूं खरीदा गया है. केंद्र ने बिहार का खरीद लक्ष्य भी बढ़ाते हुए 18 हजार टन से 1.8 लाख टन कर दिया है.

अलग रखा जा रहा URS गेहूं

इस सीजन मार्च और अप्रैल में हुई बारिश ने गेहूं की गुणवत्ता पर असर डाला. कई इलाकों में दानों में नमी बढ़ गई, सिकुड़न और चमक कम होने जैसी समस्याएं सामने आईं. बड़ी मात्रा में गेहूं तय गुणवत्ता मानकों से बाहर हो रहा था, जिससे खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने लगी. इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने गुणवत्ता मानकों में राहत दी. अब राज्य एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि छूट वाले मानकों यानी URS श्रेणी के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से रखा जाए और उसका अलग हिसाब रखा जाए.

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