अनानास की खेती पर संकटकेरल के अनानास उत्पादक संघ ने एक अभियान शुरू किया है, जिसमें किसानों से अगले 12 महीनों तक ताजे अनानास की खेती न करने और इसके बजाय मौजूदा खेतों की देखभाल पर ध्यान देने का आग्रह किया गया है. यह फैसला मजदूरों की भारी कमी और अनानास की गिरती कीमतों को देखते हुए लिया गया है. संगठन के अध्यक्ष बेबी जॉन ने बताया कि चुनाव के दौरान कई मजदूर उत्तर भारत लौट गए, जिससे खेतों में काम करने वाले मजदूरों की संख्या काफी कम हो गई है. इसके कारण किसानों को फसल की कटाई करने और बागानों का सही तरीके से रखरखाव करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसी वजह से किसानों को फिलहाल नई खेती शुरू करने के बजाय मौजूदा फसलों के बेहतर प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी गई है.
संगठन के अध्यक्ष बेबी जॉन ने कहा कि अभी किसानों की सबसे बड़ी प्राथमिकता मौजूदा अनानास के खेतों की अच्छी तरह देखभाल करना होना चाहिए. उनका कहना है कि इससे किसानों का बेवजह होने वाला खर्च कम होगा, मजदूरों की कमी का असर भी कम पड़ेगा और बाजार में अनानास की आपूर्ति संतुलित बनी रहेगी. इससे भविष्य में किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ सकती है.
फिलहाल अच्छी क्वालिटी वाला हरा अनानास करीब 46 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि थोक बाजारों में पका हुआ अनानास सिर्फ 10 से 13 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है. किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी लागत निकालने के लिए कम से कम 35 से 40 रुपये प्रति किलो का भाव चाहिए. ऐसे में मौजूदा कम कीमतों के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
अनानास उत्पादक संघ का कहना है कि मार्च और अप्रैल में पड़े अत्यधिक गर्म मौसम का भी फसल पर बुरा असर पड़ा. ज्यादा तापमान के कारण पौधों में फूल और फल आने की प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन का संतुलन बिगड़ गया और बाजार में अनानास की आपूर्ति जरूरत से ज्यादा हो गई. आमतौर पर एक बार अनानास की खेती करने पर 2 से 3 साल के दौरान तीन बार फसल मिलती है, लेकिन उर्वरकों की बढ़ती कीमतों और मजदूरों की कमी ने छोटे और मध्यम किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई किसान अपने मौजूदा खेतों से भी अच्छी पैदावार लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
किसानों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अनानास की अच्छी मांग और ऊंची कीमतों को देखकर कई नए लोग भी इसकी खेती करने लगे. साथ ही मौसम और अन्य परिस्थितियां भी खेती के लिए अनुकूल रहीं, जिससे उत्पादन तेजी से बढ़ गया. नतीजतन बाजार में अनानास की भरमार हो गई और कीमतें तेजी से गिर गईं. इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट और अन्य आतिथ्य क्षेत्र से मांग भी कम हुई है. जूस और प्रसंस्कृत फलों के उत्पादों की खपत में भी कमी आई है. इस वजह से बड़ी मात्रा में अनानास बिक नहीं पा रहा है और किसानों के पास ही पड़ा हुआ है.
संघ ने यह भी चिंता जताई है कि केंद्र सरकार द्वारा उर्वरकों के कम उपयोग पर दिए जा रहे जोर और वैश्विक तनाव के कारण खाद की संभावित कमी नई खेती को और मुश्किल बना सकती है. नई फसल लगाने में ज्यादा उर्वरकों की जरूरत पड़ती है, इसलिए किसानों की लागत और बढ़ सकती है. इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए उत्पादक संगठन का मानना है कि यदि एक साल तक नई अनानास की खेती नहीं की जाए, तो बाजार में संतुलन बनेगा, अतिरिक्त उत्पादन कम होगा और किसानों को आर्थिक नुकसान से राहत मिल सकेगी.
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