ओलावृष्टि से बागवानी फसलें बर्बाद (AI- तस्वीर)उत्तराखंड के टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक मुख्यालय में शनिवार शाम अचानक बदले मौसम ने भारी तबाही मचा दी. तेज बारिश के साथ हुई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया. कई गांवों में खेत ओलों की मोटी परत से ढक गए, जिससे पूरा इलाका सफेद चादर जैसा नजर आया और खड़ी फसलें पूरी तरह चौपट हो गईं. कुंवा गांव निवासी किसान रघुवीर नौटियाल ने बताया कि यह ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि उनकी सात से आठ खेतों में बोई गई राजमा की पूरी फसल नष्ट हो गई. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही आलू, मटर, बींस, धनिया और प्याज जैसी नगदी फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. गेहूं और मसूर जैसी पारंपरिक फसलें भी इस आपदा से नहीं बच सकीं.
शनिवार रात करीब 9 बजे टॉर्च की रोशनी में बनाए गए वीडियो में खेतों की भयावह स्थिति साफ देखी गई, जहां चारों ओर केवल ओले ही ओले दिखाई दे रहे थे. क्षेत्र के अन्य किसानों, वीरेंद्र नौटियाल, रत्नमणि गौड़, जगत राणा, वीर सिंह राणा, विमल नौटियाल, लोकेंद्र सिंह सजवाण और कृपाल सिंह रावत ने भी बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी भयंकर ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी. उनका कहना है कि इस आपदा ने उनकी पूरी फसल तबाह कर दी है, जिससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
किसानों ने यह भी बताया कि कृषि के साथ-साथ बागवानी को भी भारी नुकसान हुआ है. सेब, आड़ू, प्लम (पूलम), चुल्लू और खुमानी जैसे फलों के पेड़ों में लगे फूल (फ्लोरिंग) ओलों की मार से झड़ गए हैं, जिससे आने वाली फसल की उम्मीद भी खत्म हो गई है. इस ओलावृष्टि का असर क्षेत्र के खेड़ा, पापरा, भूयासारी, टिक्क, किन्शु, बंगशील, मोलधार, तेवा, ओतड़, डिगोन, मूगलोडी सहित दर्जनों गांवों में देखने को मिला है, जहां कृषि और बागवानी को भारी नुकसान पहुंचा है.
पीड़ित किसानों ने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की. उनका कहना है कि अगर समय रहते सहायता नहीं मिली, तो उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा. इस संबंध में धनोल्टी के तहसीलदार बिरम सिंह पवार ने बताया कि राजस्व उप निरीक्षकों को प्रभावित गांवों में भेजा जा रहा है, जो नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेंगे. वहीं, प्रभारी कृषि अधिकारी सुनील डोगरा ने कहा कि कृषि और बागवानी विभाग द्वारा संयुक्त सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाएगा, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जा सके. (पंकज भट्ट की रिपोर्ट)
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