
फसल नुकसान की जानकारी देते हुए किसानअमृतसर जिले में लगातार हो रही बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने किसानों की हालत बेहद खराब कर दी है. किसानों की छह महीने तक देखभाल की गई गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. खेतों में खड़ी फसल जमीन पर गिर चुकी है, जिससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. किसान नेता गुरदेव सिंह गुरपाल ने अपनी पत्नी के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इस साल मौसम की मार ने किसानों को पूरी तरह तोड़ कर रख दिया है. पहले असमय गर्मी के कारण गेहूं का दाना छोटा रह गया और कीटों के प्रकोप के चलते बार-बार स्प्रे करनी पड़ी, जिससे लागत काफी बढ़ गई.
इसके बाद आई बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने बची-खुची फसल भी तबाह कर दी. उन्होंने कहा कि मजीठा क्षेत्र में लगभग 100 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है, जबकि उनके इलाके में भी 50 प्रतिशत से अधिक फसल खराब हो चुकी है. किसानों ने कहा कि गेहूं की फसल छह महीने की मेहनत का नतीजा होती है, जिसमें बुवाई से लेकर कटाई तक लगातार देखभाल करनी पड़ती है.

किसानों को उम्मीद थी कि 13 अप्रैल को बैसाखी के मौके पर फसल की कटाई शुरू होगी और उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी, लेकिन बारिश ने उनकी सारी खुशियों पर पानी फेर दिया. किसानों का कहना है कि गेहूं ही उनकी आय का मुख्य स्रोत है, जिससे वे अपने परिवार का खर्च, बच्चों की जरूरतें और शादी-ब्याह जैसे काम पूरे करते हैं.
किसानों ने बताया कि फसल गिरने के कारण कटाई का खर्च भी बढ़ जाएगा, क्योंकि मशीनों का किराया दोगुना तक हो जाता है. वहीं, गिरी हुई फसल का बाजार भाव भी कम मिलता है, जिससे उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.
किसानों ने सरकार से अपील की है कि तुरंत पटवारी और तहसीलदार को भेजकर फसल का सर्वे करवाया जाए और उन्हें कम से कम 70 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें. किसानों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द मदद नहीं मिली तो उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से तबाह हो सकती है.
बता दें कि हाल के दिनों में पूरे पंजाब में 1.25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा फसल खराब हुई है. इसमें सबसे ज्यादा गेहूं की फसल प्रभावित हुई है. पंजाब सरकार ने गिरदावरी कर जल्द किसानों को राहत देने की बात कही है. वहीं, केंद्र सरकार से भी टीम भेजकर नुकसान पर किसानाें को मदद देने की मांग की है. (अमित शर्मा की रिपोर्ट)
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