गन्ने के खेत में पहुंचा अमेर‍िकी क‍िसान, महाराष्ट्र के क‍िसानों ने समझाया खेती का पूरा गण‍ित

गन्ने के खेत में पहुंचा अमेर‍िकी क‍िसान, महाराष्ट्र के क‍िसानों ने समझाया खेती का पूरा गण‍ित

Sugarcane Farming: पुणे के हवेली तालुका स्थ‍ित प‍िंपरी सांडस गांव का बीते द‍िनों अमेर‍िकी क‍िसान ने मुआवयना क‍िया. गांव के क‍िसान तानाजी हरपाले ने बताया क‍ि अमेर‍िकी क‍ि‍सान गन्ने की खेती जानकारी जुटाने के लि‍ए खेेत पर पहुंचा था. आइए जानते हैं क‍ि पूरा मामला क्या है.

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गन्ने के खेत में पहुंचा अमेर‍िकी क‍िसान, महाराष्ट्र के क‍िसानों ने समझाया खेती का पूरा गण‍ित अमेर‍िकी शख्स को गन्ने की खेती की जानकारी देते हुए किसान

महाराष्ट्र में गन्ना और चीनी उत्पादन की सफलता अमेर‍िका तक पहुंच गई है. अमेर‍िका का एक क‍िसान बीते द‍िनों गन्ने की खेती के बारे में जानकारी लेने पुणे पहुंचा. यहां हवेली तालुका स्थ‍ित प‍िंपरी सांडस गांव में उसने स्थानीय क‍िसानों से बातचीत की. यहां गन्ने की खेती करने वाले क‍िसान तानाजी हरपाले ने नॉर्थ अमेर‍िका के क‍िसान ज्वैल को यहां की खेती का पूरा गण‍ित समझाया. खेत की तैयारी से लेकर गन्ना को म‍िल तक पहुंचाने और फ‍िर दाम की पूरी जानकारी दी. महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है. इसने यूपी को पीछे छोड़ द‍िया है. राज्य में औसत चीनी रिकवरी 10.36 प्रतिशत है, जो देश के कई राज्यों से अध‍िक है. ऐसे में यहां के क‍िसान गन्ने की अच्छी खेती के बारे ज्यादा अच्छे से बता पाएंगे. 

तानाजी हरपाले ने अमेर‍िका के क‍िसान को बताया क‍ि महाराष्ट्र में गन्ने की फसल 8 महीने में भी तैयार हो जाती है और ज्यादा उत्पादन लेना है तो इसमें 14 महीने भी लग जाता है. उन्होंने एक जून 2022 को गन्ना लगाया था और अब जाकर उसे बेचा है. एक एकड़ में 1 लाख 12 हजार रुपये का गन्ना ब‍िका है. जबक‍ि 70 हजार रुपये का खर्च आया था. यानी 42 हजार रुपये का फायदा हुआ है. लेक‍िन इस फायदे के ल‍िए आठ महीने का इंतजार करना पड़ा है.  

गन्ने की खेती का गण‍ित 

हरपाले ने बताया क‍ि उन्होंने गन्ने की दाम लाइनों के बीच 4 फुट की जगह छोड़ी है. लाइन में गन्ने से गन्ने की दूरी सवा फुट है. यह ज्यादा पानी वाली फसल है, ऐसे में खर्च काफी लगता है. अच्छी शुगर र‍िकवरी वाला गन्ना करीब 14 महीने में तैयार होता है, लेक‍िन जूस के ल‍िए तो आठ महीने में खेत से न‍िकाल सकते हैं. हम क‍िसान लोग सुबह से शाम तक काम करते हैं तब जाकर एक एकड़ में मुश्क‍िल से 40 हजार का फायदा होता है. बातचीत में वो प्याज की खेती से हो रहे घाटे का ज‍िक्र करने लगे. उन्होंने बताया क‍ि महाराष्ट्र में गन्ने का दाम यूपी, पंजाब और हर‍ियाणा की तरह तीन सौ रुपये प्रति क्व‍िंटल से ज्यादा नहीं है. लेक‍िन यहां खेत से गन्ना न‍िकालने और म‍िल तक ले जाने तक का काम म‍िलों के ज‍िम्मे है. हरपाले ने बताया क‍ि महाराष्ट्र में 280 रुपये प्रत‍ि क्व‍िंटल का भाव है.  

क‍ितना आता है खर्च 

पुणे के क‍िसान हरपाले ने अमेर‍िकी क‍िसान को गन्ने के खेत में ले जाकर बताया क‍ि यहां प्रत‍ि एकड़ खर्च क‍ितना है और ज्यादा पैसा कहां-कहां खर्च होता है. उन्होंने बताया क‍ि शुरुआत में खेत की जुताई के ल‍िए 2800 रुपये लग जाते हैं. फ‍िर उस पर रोटावेटर चलाने के ल‍िए 3000 रुपये का खर्च आता है. फ‍िर बात आती है खाद की. यहां सबसे पहले गोबर और वेस्ट कंपोस्ट को डालते हैं, ज‍िसका खर्च प्रत‍ि एकड़ पर 15,000 रुपये तक है. इसके बाद एक जुताई फ‍िर होती है, उस पर भी 2800 रुपये लगते हैं. फ‍िर मजदूरों से मेड़ और नाली बनवाने पर खर्च होता है. इस पर भी और इससे जुड़े दूसरे कार्यों पर 2800 रुपये तक का खर्च आ जाता है.  

क‍ितने का लगता है सीड 

एक एकड़ में डेढ़ टन सीड लगता है. ज‍िस पर 4500 रुपये का खर्च आता है. मजदूर का खर्च 6000 रुपये लगता है. जब फसल एक महीने की होती है तो उसको खाद की जरूरत पड़ती है. पहली खाद 3500 रुपये प्रत‍ि एकड़ पड़ती है. दो बार स्प्रे करने का 2000 रुपये लग जाता है. खरपतवार न‍िकासी पर 1500 रुपये लगता है. उसके बाद म‍िट्टी लगाते हैं खाद के साथ. इस पर 10,000 रुपये लग जाता है. म‍िट्टी लगाने पर ट्रैक्टर का खर्च 3000 रुपये का आता है. पानी पर 15000 रुपये के आसपास का खर्च आता है. गन्ना आठ महीने में 40 से 45 टन और 14 महीने में 60 टन न‍िकलता है.

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