
अमरेली में आम की फसल को भारी नुकसानदेश के कई राज्यों में तेज हवा, आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. खासकर गुजरात के जूनागढ़ और अमरेली जिलों में फसलों और बागवानी को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है. जूनागढ़ जिले में मौसम की अचानक करवट ने किसानों को बड़ा झटका दिया है. बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण खेतों में कटी हुई फसल बर्बाद हो गई है. भैंसान तहसील के बलियावाड़ गांव में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां करीब डेढ़ इंच बारिश दर्ज की गई और कई जगह ओले भी गिरे.
बारिश के कारण खेतों में पड़ी गेहूं, चना और बाजरी जैसी फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों को उचित कीमत मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है. जूनागढ़ की प्रमुख बागवानी फसल केसर आम भी इस बार मौसम की मार से नहीं बच सकी. आम के पेड़ों पर आए कच्चे फल तेज हवा के कारण बड़ी संख्या में जमीन पर गिर गए हैं.
बलियावाड़ गांव के किसान युवराज पढ़ियार ने बताया कि उनके करीब 60 एकड़ के आम बाग में पहले ही लगभग 60 प्रतिशत फल गिरकर खराब हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि जो फल बचे हैं उनमें भी रोग लगने का खतरा बढ़ गया है, जिससे इस साल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा.
वहीं, आम बाग के इजारेदार (ठेकेदार) अमृतभाई ने बताया कि बारिश, ठंड और तेज हवा के कारण आम के फूल और छोटे फल गिर गए हैं, जिससे पूरे साल की कमाई पर संकट खड़ा हो गया है. बागवानी करने वाले किसान अब अपनी मेहनत बर्बाद होते देख चिंतित हैं.
इधर, अमरेली जिले में भी लगातार दो दिनों से हो रही बेमौसम बारिश और तूफानी हवाओं ने खेती और बागवानी को भारी नुकसान पहुंचाया है. धारी, खांभा, सावरकुंडला, बगसरा और वडिया समेत कई इलाकों में आम की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है. सावरकुंडला तालुका के सेंजल गांव में आम के पेड़ों से बड़ी मात्रा में कच्चे आम गिर गए हैं, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

सेंजल गांव के किसान रावतभाई, गौतमभाई खुमान और शिवराजभाई ने बताया कि आम के बागों से होने वाली सालाना आय पर ही उनका पूरा गुजारा चलता है, लेकिन इस बार बेमौसम बारिश ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया है. किसान मजदूर लगाकर गिरे हुए आम इकट्ठा कर रहे हैं, लेकिन इससे नुकसान की भरपाई संभव नहीं है.
अमरेली में सिर्फ आम ही नहीं, बल्कि गेहूं, चना, बाजरा, धनिया, प्याज, केला, जामुन और चीकू जैसी फसलें भी तेज हवा और बारिश से बर्बाद हो गई हैं. किसानों का कहना है कि इस बार पहले ही उत्पादन कम था और अब बची हुई फसल भी तूफान की भेंट चढ़ गई है. किसानों ने सरकार से मांग की है कि फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर जल्द मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें.
कच्छ में पिछले दो दिनों से जारी बेमौसम बारिश ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. तेज हवाओं और बारिश के कारण गेहूं, अरंडी, सौंफ और ईसबगोल की फसलें बर्बाद हो गई हैं, वहीं टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसी बागवानी फसलें भी प्रभावित हुई हैं. केसर आम के बौर झड़ने से उत्पादन पर संकट गहरा गया है, जिससे इस बार आम महंगा होने की आशंका है. नुकसान से परेशान किसान अब सरकार से सर्वे कराकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं और मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं. (जूनागढ़ से भार्गवी जोशी/अमरेली से फारुखभाई/कच्छ से का इनपुट)
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