गुजरात में इस साल बेमौसम बारिश की वजह से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था, जिसके बाद राज्य सरकार ने किसानों को आर्थिक मदद के लिए फसल सर्वे पूरा करके 10 हज़ार करोड़ रुपये के ऐतिहासिक पैकेज का ऐलान किया था.
राजकोट पुलिस कंट्रोल रूम को आया धमकी भरा कॉल. जामनगर, राजकोट और सुरेंद्रनगर में कई घंटों तक तलाशी, ट्रेन से लेकर स्टेशन तक कुछ नहीं मिला. गुस्से में किसान ने किया था फर्जी कॉल.
सरकार ने अब तक 1.62 लाख टन मूंगफली MSP पर खरीदी. बेमौसम बारिश से 42 लाख हेक्टेयर की फसल प्रभावित—दो राहत पैकेजों के लिए 11 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन. रबी सीजन में 7 जिलों को अतिरिक्त बिजली देने का निर्णय.
गुजरात के अमरेली जिले में बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद होने पर किसानों ने गुस्से में मूंगफली की फसल जला दी. शांतिनगर और जबल गांव के किसानों ने कहा कि सरकार ने भले समर्थन मूल्य तय किया हो, पर व्यापारी उपज नहीं खरीद रहे हैं. किसानों ने सरकार से मुआवजा और राहत पैकेज की मांग की है.
गुजरात में बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि सरकार किसानों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है और जल्द ही राहत एवं सहायता पैकेज की घोषणा की जाएगी. प्रशासन ने फसल क्षति सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
Gujarat Crop Survey: गुजरात में सालों बाद हुई बेमौसम बारिश से लाखों हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई और अधिकारियों को तुरंत सर्वे कर तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं.
गुजरात में बेमौसम बारिश से 33 जिलों के 239 तहसीलें प्रभावित हुई हैं, जहां करीब 10 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है. इसे देखते हुए सीएम भूपेंद्र पटेल ने अफसरों को सात दिन में सर्वे पूरी कर किसानों को जल्द मुआवजा देने के निर्देश दिए है.
गुजरात के अमरेली जिले में बेमौसम बारिश ने अंधेरा सा कर दिया है. किसान नीलेश सभाया ने बताया कि कल रात से बहुत भारी बारिश हो रही है और इससे सभी खेतों को बहुत बड़ा नुकसान है. मूंगफली में, कपास में नुकसान है, प्याज में नुकसान है, सभी फसलों में नुकसान है.
रमेशभाई कहते हैं, हमने गोभी, मिर्च और करेला लगाया है, लेकिन दाम नहीं मिल रहे हैं और हमें फेंकना पड़ रहा है. सरकार से विनती है कि सब्ज़ियों के दाम दिए जाएं. हमें इससे कुछ नहीं मिल रहा है. सब्जियों के दाम इतने गिर गए हैं कि उसकी ढुलाई और बिक्री भी महंगी पड़ रही है. इससे बचने के लिए हम सब्जियों को मवेशियों को खिला देते हैं या नाले में फेंक देते हैं.
Banaskantha News: गुजरात के बनासकांठा जिले में जल संकट से जूझते किसानों ने सामूहिक प्रयासों और नवाचार से एक मिसाल कायम की है. भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट और सूखे की स्थिति से उबरने के लिए किसानों ने अपने खेतों में ‘खेत तलावड़ी’ (तालाब) बनाना शुरू किया है. इस पहल से न केवल बारिश का पानी संरक्षित हो रहा है, बल्कि हजारों बोरवेल को भी रिचार्ज कर भूमिगत जल स्तर में सुधार लाया जा रहा है.
Natural Farming: गुजरात में 9.7 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरी है और इनपुट लागत कम हुई है. किसान जीवामृत, बीजामृत जैसे देशी उपायों का उपयोग कर आय बढ़ा रहे हैं. राज्य सरकार प्राकृतिक खेती के लिए 13,500 रुपये तक की सहायता और अन्य सब्सिडी भी प्रदान कर रही है. प्राकृतिक खेती से एक किसान 20 लाख सालाना कमा रहा है.
गुजरात में कई इलाकों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी बेमौसम बारिश जारी रही, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है. हालांकि, बारिश होने से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने अगले कुछ दिनों में और ज्यादा बारिश होने का अनुमान जताया है.
जूनागढ़ के गिर केसर आम देश विदेश के आम रसिकों की पसंद रहे हैं. केसर आम का केसरिया रंग, सुगंध और मिठास ही उसकी पहचान है. विश्व विख्यात तलाला गिर के केसर की नीलामी आज से शुरू हो गई जिससे केसर आम रसिकों को आज से बाजार में आम देखने ओर खरीदने को मिलेंगे.
मक्के की मांग हर साल बढ़ रही है, खासकर पशुपालन, पोल्ट्री और इथेनॉल उत्पादन के लिए. इस वजह से मक्के का बाजार मूल्य स्थिर रहता है. रबी सीजन में मक्के की उपलब्धता कम होने के कारण इसकी कीमतें भी बेहतर होती हैं. इसलिए रबी सीजन में मक्के की खेती किसानों के लिए अधिक मुनाफा कमाने का एक अहम जरिया हो सकती है, क्योंकि रबी सीजन की जलवायु परिस्थितियां मक्के की खेती के लिए बेहद अनुकूल होती है, जिससे खरीफ सीजन की तुलना में अधिक पैदावार मिलती है.
गुजरात में बाढ़ के चलते फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. इसके कारण सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं. बाढ़ से सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में हुआ है. यहां सब्जियों के दाम दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गए हैं. तो आइए सब्जियों के ताजा भाव जान लेते हैं.
मध्य कर्नाटक के किसानों को अभी तक सूखा राहत कोष का इंतजार है. यहां के कई जिलों में सूखा राहत कोष का वितरण अधूरा रह गया है. इसकी वजह से हजारों किसान आर्थिक सहायता से वंचित रह गए हैं जिसकी उन्हें सख्त जरूरत है. कई तकनीकी मुद्दों ने कई किसानों के बैंक खातों तक मुआवज़ा पहुंचने पर रोक लगा दी है. इससे प्रभावित किसानों में निराशा और गुस्सा है.
मियाज़ाकी आम जापान के मियाज़ाकी शहर में ही उगाया जाता है और इस आम को खाने के कई फायदे हैं. इस आम में विटामिन सी, ए और कैंसर रोधी तत्व पाए जाते हैं और इस आम की मिठास भी अन्य आमों से अलग होती है.मियाज़ाकी आम" यह आम केवल जापान के मियाज़ाकी में उत्पादित होता है और इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2.50 से 3 लाख के बीच है.
एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी, भावनगर के अध्यक्ष घनश्याम भाई पटेल ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में कहा है कि 'जय किसान' के साथ यह कहना चाहता हूं कि केंद्र सरकार के प्याज निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से कीमतें अब पहले की तुलना में सिर्फ 25% रह गई हैं. एक्सपोर्ट बैन होने की वजह से आवक बढ़ गई है. जिससे किसानों को कम दाम मिल रहा है.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान) एक केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम है. इस योजना की शुरुआत किसानों को आर्थिक रूप से मजूबत बनाने के लिए की गई है. ऐसे केंद्र सरकार ने दिसंबर 2018 में इस योजना को लागू किया था.
गुजरात में इस वक्त कॉटन का अधिकतम दाम 8000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. यहां की मंडियों में 6 दिसंबर को औसत दाम 6659 और अधिकतम भाव 8000 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो देश में सबसे अधिक है. कपास सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है और कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग 25 यहीं पैदा होता है. दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक महाराष्ट्र है.
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