रायपुर में ICAR-NIBSM द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत 170 से अधिक किसानों को उन्नत धान बीज वितरित किए गए. किसानों को उच्च उत्पादन वाली धान किस्मों के साथ वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, नर्सरी एवं रोपाई तकनीकों की जानकारी भी दी गई.
गुजरात के राजकोट में मिर्च किसान पारंपरिक बुवाई की जगह वैज्ञानिक नर्सरी तकनीक अपना रहे हैं. नर्सरी विकास, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग पर सरकारी सहायता मिलने से फसल प्रबंधन बेहतर हो रहा है. इससे उत्पादन बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद मिल रही है.
गुजरात के डांग जिले में स्ट्रॉबेरी खेती किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन रही है. तीन साल में उत्पादन और खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है. अब यहां की स्ट्रॉबेरी बड़े शहरों तक पहुंच रही है और किसानों को पारंपरिक खेती से ज्यादा कमाई मिल रही है.
गुजरात में किसान प्राकृतिक और गाय आधारित खेती अपनाकर आम की फसल से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. तापी और डांग जिले के किसान बिना किसी केमिकल या कीटनाशक के पूरी तरह से प्राकृतिक तरीकों से आम की खेती कर रहे हैं. इन बागों में सिंचाई के लिए केवल बारिश के पानी का उपयोग होता है और खाद के रूप में जीवामृत और पंचगव्य का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्राकृतिक तरीके के कारण आम की मिठास और क्वालिटी काफी बेहतर होती है. वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम के तहत आयोजित मैंगो फेस्टिवल में इन प्राकृतिक आमों को बाजार से काफी अच्छे दाम पर बेचा जा रहा है.
तलाला गिर को केसर आमों का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां हर साल बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी पहुंचते हैं. बाजार समिति के अनुसार, पहले दिन नीलामी को लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिला.
Gujarat Crop Damage: तेज आंधी और बारिश ने गुजरात के कई इलाकों में खेती को प्रभावित किया है. आम के बागों में बड़ी मात्रा में फल गिर गए हैं और खेतों में पड़ी रबी फसलें भी बर्बाद हुई हैं. उत्पादन घटने और आर्थिक नुकसान से किसान चिंतित हैं.
World Pulses Day: गुजरात ने दलहन खेती में बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. चना उत्पादकता में देश में पहला स्थान और तूर उत्पादन में भी राज्य ने बढ़त हासिल की है. रकबे और उत्पादन में तेज बढ़ोतरी से दलहन सेक्टर में नया संतुलन बनता दिख रहा है.
गुजरात में इस साल बेमौसम बारिश की वजह से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था, जिसके बाद राज्य सरकार ने किसानों को आर्थिक मदद के लिए फसल सर्वे पूरा करके 10 हज़ार करोड़ रुपये के ऐतिहासिक पैकेज का ऐलान किया था.
राजकोट पुलिस कंट्रोल रूम को आया धमकी भरा कॉल. जामनगर, राजकोट और सुरेंद्रनगर में कई घंटों तक तलाशी, ट्रेन से लेकर स्टेशन तक कुछ नहीं मिला. गुस्से में किसान ने किया था फर्जी कॉल.
सरकार ने अब तक 1.62 लाख टन मूंगफली MSP पर खरीदी. बेमौसम बारिश से 42 लाख हेक्टेयर की फसल प्रभावित—दो राहत पैकेजों के लिए 11 लाख से ज्यादा किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन. रबी सीजन में 7 जिलों को अतिरिक्त बिजली देने का निर्णय.
गुजरात के अमरेली जिले में बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद होने पर किसानों ने गुस्से में मूंगफली की फसल जला दी. शांतिनगर और जबल गांव के किसानों ने कहा कि सरकार ने भले समर्थन मूल्य तय किया हो, पर व्यापारी उपज नहीं खरीद रहे हैं. किसानों ने सरकार से मुआवजा और राहत पैकेज की मांग की है.
गुजरात में बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि सरकार किसानों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है और जल्द ही राहत एवं सहायता पैकेज की घोषणा की जाएगी. प्रशासन ने फसल क्षति सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
Gujarat Crop Survey: गुजरात में सालों बाद हुई बेमौसम बारिश से लाखों हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्थिति पर गहरी चिंता जताई और अधिकारियों को तुरंत सर्वे कर तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं.
गुजरात में बेमौसम बारिश से 33 जिलों के 239 तहसीलें प्रभावित हुई हैं, जहां करीब 10 लाख हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है. इसे देखते हुए सीएम भूपेंद्र पटेल ने अफसरों को सात दिन में सर्वे पूरी कर किसानों को जल्द मुआवजा देने के निर्देश दिए है.
गुजरात के अमरेली जिले में बेमौसम बारिश ने अंधेरा सा कर दिया है. किसान नीलेश सभाया ने बताया कि कल रात से बहुत भारी बारिश हो रही है और इससे सभी खेतों को बहुत बड़ा नुकसान है. मूंगफली में, कपास में नुकसान है, प्याज में नुकसान है, सभी फसलों में नुकसान है.
रमेशभाई कहते हैं, हमने गोभी, मिर्च और करेला लगाया है, लेकिन दाम नहीं मिल रहे हैं और हमें फेंकना पड़ रहा है. सरकार से विनती है कि सब्ज़ियों के दाम दिए जाएं. हमें इससे कुछ नहीं मिल रहा है. सब्जियों के दाम इतने गिर गए हैं कि उसकी ढुलाई और बिक्री भी महंगी पड़ रही है. इससे बचने के लिए हम सब्जियों को मवेशियों को खिला देते हैं या नाले में फेंक देते हैं.
Banaskantha News: गुजरात के बनासकांठा जिले में जल संकट से जूझते किसानों ने सामूहिक प्रयासों और नवाचार से एक मिसाल कायम की है. भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट और सूखे की स्थिति से उबरने के लिए किसानों ने अपने खेतों में ‘खेत तलावड़ी’ (तालाब) बनाना शुरू किया है. इस पहल से न केवल बारिश का पानी संरक्षित हो रहा है, बल्कि हजारों बोरवेल को भी रिचार्ज कर भूमिगत जल स्तर में सुधार लाया जा रहा है.
Natural Farming: गुजरात में 9.7 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरी है और इनपुट लागत कम हुई है. किसान जीवामृत, बीजामृत जैसे देशी उपायों का उपयोग कर आय बढ़ा रहे हैं. राज्य सरकार प्राकृतिक खेती के लिए 13,500 रुपये तक की सहायता और अन्य सब्सिडी भी प्रदान कर रही है. प्राकृतिक खेती से एक किसान 20 लाख सालाना कमा रहा है.
गुजरात में कई इलाकों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी बेमौसम बारिश जारी रही, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है. हालांकि, बारिश होने से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने अगले कुछ दिनों में और ज्यादा बारिश होने का अनुमान जताया है.
जूनागढ़ के गिर केसर आम देश विदेश के आम रसिकों की पसंद रहे हैं. केसर आम का केसरिया रंग, सुगंध और मिठास ही उसकी पहचान है. विश्व विख्यात तलाला गिर के केसर की नीलामी आज से शुरू हो गई जिससे केसर आम रसिकों को आज से बाजार में आम देखने ओर खरीदने को मिलेंगे.
मक्के की मांग हर साल बढ़ रही है, खासकर पशुपालन, पोल्ट्री और इथेनॉल उत्पादन के लिए. इस वजह से मक्के का बाजार मूल्य स्थिर रहता है. रबी सीजन में मक्के की उपलब्धता कम होने के कारण इसकी कीमतें भी बेहतर होती हैं. इसलिए रबी सीजन में मक्के की खेती किसानों के लिए अधिक मुनाफा कमाने का एक अहम जरिया हो सकती है, क्योंकि रबी सीजन की जलवायु परिस्थितियां मक्के की खेती के लिए बेहद अनुकूल होती है, जिससे खरीफ सीजन की तुलना में अधिक पैदावार मिलती है.
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