गुजरात के खेड़ा और आणंद जिलों में लंबे इंतजार के बाद हुई भारी बारिश से किसानों को राहत मिली है. तारापुर में पांच घंटे में 3 इंच से ज्यादा और बोरसद में 5 से 6 इंच बारिश दर्ज की गई. हालांकि, बोरसद के व्हेरा गांव में तालाब ओवरफ्लो होने से घरों और दुकानों में पानी घुस गया और कई रास्ते बंद हो गए.
दक्षिण गुजरात में लंबे इंतजार के बाद मानसून ने जोरदार वापसी की है. भरूच, नवसारी और डांग में झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. भरूच में दो घंटे में ढाई इंच तक बारिश हुई, जबकि डांग के कई इलाकों में 4 से 6 इंच तक बारिश दर्ज की गई है.
गुजरात के पाटन जिले के भाटसर गांव में बारिश के बाद जलभराव से करीब 80 प्रतिशत कृषि भूमि प्रभावित हो गई है. कपास, उड़द और तुअर जैसी खरीफ फसलें खराब होने लगी हैं. किसानों का कहना है कि पिछले 10 वर्षों से हर मानसून में यही समस्या सामने आती है, लेकिन पानी निकासी का स्थायी समाधान नहीं हुआ है.
गुजरात में 7 जुलाई से पीएम-आशा योजना के तहत जायद मूंग की MSP पर खरीद शुरू होगी. 2025-26 सीजन के लिए MSP 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय है. राज्य के 14,383 किसानों ने पंजीकरण कराया है और 51 खरीद केंद्रों पर तय कार्यक्रम के अनुसार किसान अपनी उपज बेच सकेंगे.
रायपुर में ICAR-NIBSM द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत 170 से अधिक किसानों को उन्नत धान बीज वितरित किए गए. किसानों को उच्च उत्पादन वाली धान किस्मों के साथ वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, नर्सरी एवं रोपाई तकनीकों की जानकारी भी दी गई.
गुजरात के राजकोट में मिर्च किसान पारंपरिक बुवाई की जगह वैज्ञानिक नर्सरी तकनीक अपना रहे हैं. नर्सरी विकास, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग पर सरकारी सहायता मिलने से फसल प्रबंधन बेहतर हो रहा है. इससे उत्पादन बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद मिल रही है.
गुजरात के डांग जिले में स्ट्रॉबेरी खेती किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा जरिया बन रही है. तीन साल में उत्पादन और खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है. अब यहां की स्ट्रॉबेरी बड़े शहरों तक पहुंच रही है और किसानों को पारंपरिक खेती से ज्यादा कमाई मिल रही है.
गुजरात में किसान प्राकृतिक और गाय आधारित खेती अपनाकर आम की फसल से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. तापी और डांग जिले के किसान बिना किसी केमिकल या कीटनाशक के पूरी तरह से प्राकृतिक तरीकों से आम की खेती कर रहे हैं. इन बागों में सिंचाई के लिए केवल बारिश के पानी का उपयोग होता है और खाद के रूप में जीवामृत और पंचगव्य का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्राकृतिक तरीके के कारण आम की मिठास और क्वालिटी काफी बेहतर होती है. वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम के तहत आयोजित मैंगो फेस्टिवल में इन प्राकृतिक आमों को बाजार से काफी अच्छे दाम पर बेचा जा रहा है.
तलाला गिर को केसर आमों का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां हर साल बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी पहुंचते हैं. बाजार समिति के अनुसार, पहले दिन नीलामी को लेकर अच्छा उत्साह देखने को मिला.
Gujarat Crop Damage: तेज आंधी और बारिश ने गुजरात के कई इलाकों में खेती को प्रभावित किया है. आम के बागों में बड़ी मात्रा में फल गिर गए हैं और खेतों में पड़ी रबी फसलें भी बर्बाद हुई हैं. उत्पादन घटने और आर्थिक नुकसान से किसान चिंतित हैं.
World Pulses Day: गुजरात ने दलहन खेती में बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. चना उत्पादकता में देश में पहला स्थान और तूर उत्पादन में भी राज्य ने बढ़त हासिल की है. रकबे और उत्पादन में तेज बढ़ोतरी से दलहन सेक्टर में नया संतुलन बनता दिख रहा है.
गुजरात में इस साल बेमौसम बारिश की वजह से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था, जिसके बाद राज्य सरकार ने किसानों को आर्थिक मदद के लिए फसल सर्वे पूरा करके 10 हज़ार करोड़ रुपये के ऐतिहासिक पैकेज का ऐलान किया था.
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