सीआईआरजी में चारा खाते ब्रीडर बकरे. फोटो क्रेडिट-किसान तकसितम्बर महीने को कई तरह के मौसम से भरा हुआ माना जाता है. 15-20 सितम्बर के बाद दिन में गर्मी और सुबह-रात के वक्त ठंडा मौसम होना. बीच-बीच में बारिश का होना, ये सब एक अकेले सितम्बर में देखने को मिलता है. यही वजह है कि दूसरे पशुपालकों की तरह से बकरी पालक भी सितम्बर से ही बकरियों की देखभाल से लेकर उनके खानपान में बदलाव की तैयारी शुरू कर देते हैं. लेकिन सितम्बर में बकरियों की देखभाल को लेकर गोट एक्सपर्ट एक और खास सलाह देते हैं.
एक्सपर्ट का कहना है कि जितना जरूरी बकरियों के शेड में खास इंतजाम करना है उतना ही जरूरी बकरियों को टीके लगवाना भी है. और तो और इसी महीने में एक और काम बहुत जरूरी हो जाता है, और वो है बकरियों को प्लेग और चेचक की होने वाली बीमारियों से बचाना. क्योंकि आने वाले मौसम में ये दोनों बीमारियां बकरियों पर अटैक करती हैं.
गोट एक्सपर्ट का कहना है कि पीपीआर (पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स) की ही बकरियों का प्लेग कहा जाता है. ये एक संक्रमण बीमारी है. ये दूसरी बकरियों में भी बहुत जल्दी फैलती है. इसके साथ ही इसी मौसम में बकरियों को चेचक भी होती है. चेचक के दौरान बकरियों के शरीर पर चकते से बन जाते हैं. इसलिए ये जरूरी है कि सर्दी शुरू होते ही बकरियों को पीपीआर और चेचक का टीका लगवा दिया जाए. अगर पशुपालकों ने अभी तक ये दोनों टीके नहीं लगवाए हैं तो लगवाने में जरा भी देर ना करें. क्योंकि ये बीमारी किसी एक बकरी में हो जाए तो फिर बार्ड की दूसरी बकरियों के बीच तेजी से फैलती है.
गोट एक्सपर्ट ने बताया कि बकरियों में होने वाले प्लेग की पहचान यह है कि बकरी को दस्त लग जाते हैं. निमोनिया होता है और नाक बहने लगती है. तेज बुखार आ जाता है. बड़ी बकरियों में होने के चलते ये बीमारी बच्चों में भी फैलने लगती है. इसी तरह से बकरी को चेचक होने पर निमोनिया होता है और तेज बुखार आने लगता है. बकरी चारा खाना छोड़ देती है. और तो और बच्चे भी दूध पीना कम कर देते हैं.
बकरी प्लेग-चेचक का सबसे बड़ा उपाय तो यही है कि हम प्लान के मुताबिक बकरियों को प्लेग-चेचक के टीके लगवाते रहें. क्योंकि टीके लगवाने का खर्च जहां बहुत ही मामूली होता है और सरकारी केन्द्रों पर तो यह फ्री में भी लग जाते हैं. वहीं अगर यह बीमारी बकरियों को लग जाए तो इलाज में काफी पैसा खर्च हो जाता है. साथ ही एक जरूरी कदम यह भी उठाएं कि अगर बकरी को प्लेग या चेचक हो जाए तो उसे फौरन ही दूसरी बकरियों से अलग कर दें.
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