Tips For Lumpy: बायो सिक्योरिटी बचाएगी गाय को लंपी से, शव का ऐसे करें निस्तारण Tips For Lumpy: बायो सिक्योरिटी बचाएगी गाय को लंपी से, शव का ऐसे करें निस्तारण
Tips For Lumpy एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक खासतौर पर बारिश के दौरान या फिर जहां गंदगी हो वहां लंपी बीमारी जल्दी अपना असर दिखाती है. अगर जरा सी लापरवाही हुई तो वहीं लंपी का वायरस सक्रिय हो जाता है. इसलिए बाड़े में पशुओं के साथ ही वहां रहने वाले स्टाफ को भी बॉयो सिक्योरिटी का पालन करना चाहिए.
गोवंश में लंपी वायरस के लक्षणनासिर हुसैन - New Delhi,
- Sep 03, 2026,
- Updated Sep 03, 2026, 3:18 PM IST
देश के 220 जिलों में गायों की लंपी बीमारी अपना असर दिखा सकती है. हाल ही में एक सरकारी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने हाई अलर्ट जारी किया है. यूपी के कुछ जिलों और हिमाचल प्रदेश में तो लंपी से गायों की मौत भी हो चुकी है. राज्य सरकार ने एडवाइजरी भी जारी कर दी है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो लंपी बीमारी का वायरस मच्छर-मक्खी की वजह से फैलता है. इसलिए जरूरी है कि पशुओं के बाड़े में साफ-सफाई रखी जाए, बायो सिक्योरिटी का पालन किया जाए. अगर ऐसा किया तो लंपी वायरस को फैलने से रोका जा सकता है.
मच्छर-मक्खी न हों इसके लिए ये भी जरूरी है कि बाड़े के फर्श को सूखा रखें और वहां गंदगी न फैलने दें. पशुपालन के पुराने तौर-तरीकों के चलते ही बीमारी पशुओं में अपना घर बना लेती हैं. क्लाइमेट चेंज को देखते हुए आज बॉयो सिक्योरिटी वक्त की जरूरत है. सभी तरह के पशुओं में मृत्यु दर को कम करने के लिए भी साइंटीफिक तरीके से पशुपालन करना जरूरी हो गया है.
बाड़े में अपनाएं ये उपाय
- लंपी बीमारी से पीड़ित पशुओं को हेल्दी पशुओं से अलग कर देना चाहिए.
- बीमार पशुओं को हेल्दीत पशुओं के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए.
- बाड़े में मच्छर-मक्खियों को रोकने के लिए साइपिमैथिन, डेल्टामैविन, अवमिताज दवा दो मिली प्रति लीटर में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए.
- बीमारी वाले क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में पशुओं का आवागमन बंद कर देना चाहिए.
- बीमारी फैलने की अवस्था में पशुओं को पशु मेला इत्यादि में नहीं ले जाना चाहिए.
- पशुओं के प्रबंध में प्रयुक्त वाहन और उपकरण के साफ-सफाई करनी चाहिए.
- संक्रमित पशुओं की देखभाल में लगे व्यक्तियों को साबुन, सैनेटाइजेशन करना चाहिए.
- पशुओं के बाड़े में अनावश्यक बाहरी व्यक्ति और वाहन के प्रवेश पर रोक लगा देनी चाहिए.
- पशुशाला में नियमित चूना पाउडर का छिड़काव करना चाहिए.
- पशु आवास में गोबर-मूत्र गंदगी आदि को जमा नहीं होने देना चाहिए.
- बीमार पशु के दूध का इस्तेमाल उबालकर करना चाहिए.
- रोगी पशु को संतुलित आहार हरा चारा, दलिया खिलाए जिससे कि पशु में रोगों से लड़ने की क्षमता मजबूत हो.
मृत पशु के शव का निस्तारण
- लंपी से मृत पशुओं को गहरे गड्ढे में चूना और नमक डालकर दबा देना चाहिए.
- ऐसे पशु को खुले में नहीं फेंकना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से बीमारी और फैल सकती है.
- लंपी से मृत पशु को लोगों के रिहायशी स्थान से दूर दफनाना चाहिए.
- जहां पशु पानी पीते हों या चारा खाते हों वहां मृत पशु को नहीं दफनाना चाहिए.
- मृत पशुओं के परिवहन में इस्तेमाल वाहन को सोडियम हाइपोक्लोराइट से धोना चाहिए.
- मृत पशु के चारे दाने को भी जलाकर नष्ट कर देना चाहिए.
- मृत पशु के स्थान पर सूखी घास जलाकर संक्रमण मुक्तल करना चाहिए.
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