Animal Diet: गाय-भैंस लंपी-FMD बीमारी से पीडि़त है तो रोजाना खि‍लाएं ये खुराक

Animal Diet: गाय-भैंस लंपी-FMD बीमारी से पीडि़त है तो रोजाना खि‍लाएं ये खुराक

Animal Diet लंपी और खुरपका-मुंहपका (FMD) संक्रमित बीमारी है. दोनों ही बीमारियों की हालत में गाय-भैंस एकदम से टूट जाते हैं. ठीक से चल भी नहीं पाते हैं. कुछ खाने का मन नहीं करता है. मुंह में छाले होने के चलते कुछ खाया तक नहीं जाता है. इसी को देखते हुए एनिमल एक्सपर्ट कुछ खास तरह का चारा खि‍लाने की सलाह देते हैं.  

Advertisement
Animal Diet: गाय-भैंस लंपी-FMD बीमारी से पीडि़त है तो रोजाना खि‍लाएं ये खुराककोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके

हर हाल में एक पशु के लिए खुराक बहुत जरूरी होती है. फिर चाहें वो स्वस्थ हो या बीमार और चोटिल. पशु दूध उत्पादन कर रहा हो या नहीं. लेकिन उसके लिए रोजाना की खुराक बहुत जरूरी है. लेकिन जैसे ही गाय-भैंस बीमार होती हैं तो सबसे पहले वो चारा खाना छोड़ देती हैं. और ऐसा होते ही पशुपालक की परेशानी बढ़ जाती है. क्योंकि जब गाय-भैंस कुछ खाएगी नहीं तो दूध का उत्पादन भी नहीं होगा और पशु की हैल्थ भी खराब होगी. कई बार बीमारी या चोट लगने के चलते गाय-भैंस खाने के लिए अपने मुंह का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं. 

जैसे खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी की वजह से मुंह में छाले हो जाते हैं. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि बीमार और चोटिल पशु को खाने के लिए लुभाने का सबसे आसान तरीका ये है कि उसके सामने ऐसा चारा रखें जिसे वो बड़े ही शौक से खाता हो. जुगाली करने में ज्यादा मेहनत और वक्त ना लगता हो. वहीं कभी भी बीमार और चोटिल पशुओं को खाने में दवाई मिलाकर खाने को नहीं देनी चाहिए.

लंपी-FMD  में ऐसे खिलाएं चारा  

  • बीमार भैंस को ताजी कटी हुई रसीली घास देकर खाने के लिए ललचाया जा सकता है.
  • भैंस के मुंह में गहरी चोट है या मुंहपका हुआ है तो कई चारे मिलाकर बनाया गया सूप दे सकते हैं. 
  • भैंस को गुड़ या खाने में गुड़ मिलाकर खिलाया जा सकता है. 
  • बीमारी में भैंस की भूख बढ़ाने के लिए हिमालयन बतीसा खिलाया जा सकता है.
  • भैंस की खुराक में नमक मिलाकर भी उसे खिलाया जा सकता है. 
  • खुराक में एनर्जी और प्रोटीन बढ़ाने के लिए सोयाबीन या मूंगफली की खल, वनस्पति तेल, गुड़, प्रोपलीन ग्लाइकोल और कैसिइन खिला सकते हैं. 
  • एक बार में ज्यामदा खिलाने के बजाए थोड़ा-थोड़ा कई बार में दिया जा सकता है. 
  • अगर भैंस मुंह के रास्ते  खाने-पीने में बेबस है तो उसे नली से घोल के रूप में दिया जा सकता है. 
  • खाना ना खाने के हालात में भैंस को माइक्रोबियल कल्चर प्रोबायोटिक्स (जैसे लैक्टोबैसिलस, यीस्ट) खिलाया जा सकता है. 
  • पानी की कमी को इलेक्ट्रोलाइट्स से और एसिडोसिस को बाइकार्बोनेट से ठीक किया जा सकता है.

कड़वी दवाई नहीं खि‍लाएं

पशुओं को दी जानें वाली कुछ दवाई बेहद कड़वी होती हैं. इसलिए गाय-भैंस को गर्भकाल के दौरान कड़वी दवाएं मुंह से खिलाने से बचना चाहिए. जिसके चलते पशु उसे खाने के चक्कर में उठा पटक के चलते तनाव में न आ आए. क्योंकि इस तरह के तनाव के चलते भी भैंस का गर्भपात होने का खतरा बना रहता है. 

ये भी पढ़ें-

Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात 

Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम

POST A COMMENT