स्वाइन फ्लू का प्रसार तेजी से फैल रहा है ( PHOTO-ITGD) स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में किसी तरह का डर फैलाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उचित सावधानी और साफ-सफाई के जरिए इस बीमारी से बचाव संभव है. यह बात गाजियाबाद के मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. ईशान पांडेय ने कही है.
उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू (स्वाइन इन्फ्लुएंजा) एक वायरल श्वसन रोग है, जो मुख्य रूप से सूअरों में पाया जाता है. हालांकि कुछ मामलों में संक्रमित सूअरों के संपर्क में आने से यह संक्रमण इंसानों तक भी पहुंच सकता है. यदि वायरस मानव शरीर में संक्रमण करने और फैलने में सक्षम हो, तो यह व्यक्ति से व्यक्ति में भी फैल सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमित सूअर के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों, श्वसन स्राव या दूषित सतहों के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. पशुपालक, पशु चिकित्साकर्मी, फार्म कर्मचारी और पशु बाजार में काम करने वाले लोग अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले समूह में आते हैं.
स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं. इनमें अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, बदन दर्द और अत्यधिक थकान शामिल हैं. कुछ लोगों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी हो सकती है.
गंभीर मामलों में सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, निमोनिया और ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है.
विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमित सूअरों में बुखार, खांसी, छींक, नाक से स्राव, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी और भूख कम लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. यदि किसी फार्म में बड़ी संख्या में सूअरों में एक साथ ऐसे लक्षण दिखें तो तत्काल पशु चिकित्सा विभाग को सूचना देनी चाहिए.
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने पशुपालकों को बीमार पशुओं को अलग रखने, फार्म में बायो-सिक्योरिटी नियम लागू करने, नियमित सफाई करने और बीमार पशुओं को दूसरे फार्म में नहीं ले जाने की सलाह दी है. वहीं लोगों को पशुओं के संपर्क के बाद हाथ धोने, खांसते-छींकते समय मुंह ढकने और बीमार पशुओं से अनावश्यक संपर्क से बचने को कहा गया है.
डॉ. पांडेय ने स्पष्ट किया कि स्वाइन फ्लू और अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) अलग-अलग बीमारियां हैं. स्वाइन फ्लू के कुछ वायरस सूअर से इंसानों में फैल सकते हैं, जबकि अफ्रीकन स्वाइन फीवर इंसानों में नहीं फैलता. इसलिए दोनों बीमारियों को एक जैसा समझना गलत होगा.
उन्होंने कहा कि यदि किसी फार्म में बड़ी संख्या में सूअरों में बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी या अचानक मौत के मामले सामने आते हैं, तो बीमारी का अंदाजा लगाने के बजाय तत्काल पशु चिकित्साधिकारी को सूचना देकर प्रयोगशाला जांच करानी चाहिए.
सबसे बड़ा संदेश यही है कि स्वाइन फ्लू से घबराने की नहीं, बल्कि जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है.
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