Cow Disease: ये हैं लंपी बीमारी होने की बड़ी वजह, इन्हें कंट्रोल किया तो नहीं तड़पेंगी गाय

Cow Disease: ये हैं लंपी बीमारी होने की बड़ी वजह, इन्हें कंट्रोल किया तो नहीं तड़पेंगी गाय

Cow Disease एक आम पशुपालक जिन्हें मच्छर-मक्खी, जोंक, किलनी के नाम से जानता है, उन्हें साइंस की भाषा में परजीवी (पैरासाइटिक) कहा जाता है बरसात और बाढ़ के बाद ये पशुओं पर हमला करते हैं. इनके चलते पशु बीमार तो होते ही हैं कई बार गंभीर बीमारी होने के चलते उनकी मौत तक हो जाती है. 

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Cow Disease: ये हैं लंपी बीमारी होने की बड़ी वजह, इन्हें कंट्रोल किया तो नहीं तड़पेंगी गाय7 गौशालाओं से होगी 16 करोड़ की वसूली, सरकारी अनुदान में बड़ी गड़बड़ी के आरोप (Photo: itg))

देश के 220 जिलों में लंपी का अलर्ट जारी हो चुका है. लंपी अपना असर भी दिखा रही है. कई राज्य लंपी के संबंध में एडवाइजरी भी जारी कर चुके हैं. लंपी के लक्षण क्या हैं, लंपी रोकथाम के उपाय क्या हैं और पीडि़त गायों की देखभाल कैसे करनी है ये सब एडवाजरी में बताया गया है. लेकिन यहां सबसे ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत उन कीट से है जिनकी मदद से लंपी बीमारी फैलती है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं में होने वालीं बीमारियों की बड़ी वजह और पशुओं को सबसे ज्यादा परेशान करने वाले मच्छर-मक्खी, जोंक, किलनी होते हैं. 

और तो और पशुओं की ज्यादातर बीमारियों वाहक भी ये ही कीट होते हैं. मेडिकल की भाषा में इन्हें वेक्टर (परजीवी) कहा जाता है. अभी तक परजीवी रोगों का इलाज कुछ खास तरह की दवाई देकर हो जाता था. लेकिन अब परेशान करने वाली बात ये है कि बीते कुछ वक्त से दवाईयां भी पशुओं पर असर नहीं कर रही हैं. जिसकी बड़ी वजह है परजीवी विरोधी प्रतिरोध (एंटीपैरासिटिक रेसिस्टेंस) है.  

इसलिए मजबूत हो रहे परजीवी  

दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल (ओवरयूज). एंटीपैरासिटिक दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल और उस पर कंट्रोल ना होना परजीवियों में प्रतिरोधकता बढ़ने की एक बड़ी वजह है. सही तरह से दवाई ना लेना, पशुओं को सही तरीके से दवाई ना देना, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाई का पूरा कोर्स ना करना भी एक वजह है. पर्यावरणीय और जैविक कारण भी हैं. परजीवियों की प्राकृतिक चयन प्रक्रिया और उनके जीन में होने वाले बदलाव भी प्रतिरोधकता का कारण बन रहे हैं.

ऐसे रोक कंट्रोल कर सकते हैं परजीवी

  • केवल पशु चिकित्सक की सलाह पर ही पशुओं को एंटीपैरासिटिक दवाई खि‍लाएं. 
  • पशुओं के लिए डाक्टर के बताए कृमिनाशक शेडयूल का पालन करें.
  • पशुचिकित्सक द्वारा बताई गई दवाओं के कोर्स को पूरा करें.
  • दवाई की डाक्टर द्वारा बताई गई डोज ही दें, कम या ज्यादा मात्रा ना दें.
  • पशुओं का इलाज नीम-हकीमों से ना करवायें.
  • दवा का इस्तेमाल करने से पहले ड्रग लेबल पर दिए गए निर्देशों को पढ़ लें.
  • एक ही पशु में परजीवी रोधी दवाओं को सालाना बदलें.
  • परजीवी विरोधी प्रतिरोधकता पर शैक्षिक और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दें.
  • अपने फार्म में कृमि नियंत्रण का पूरा रिकॉर्ड रखें.
  • पशुओं में परजीवी नियत्रंण के लिए एथनोवेटरनरी दवाई (ईवीएम) का इस्तेमाल करें.

शेड में ना करें ये काम

  • डाक्टर की बताई दवाई ही पशुओं को खि‍लाएं.
  • लगातार एक जैसी दवाई पशुओं को ना खि‍लाएं. 
  • कभी भी पशुओं को खुद से कोई दवाई ना दें.
  • पशुओं में सामूहिक कृमिनाशन न करें.
  • सीधे स्टोर से दवाई खरीदकर पशुओं को ना खि‍लाएं.

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