FMD-Calf: गाय-भैंस के बछड़ों के हार्ट को प्रभावित करती है FMD बीमारी, ऐसे करें बचाव 

FMD-Calf: गाय-भैंस के बछड़ों के हार्ट को प्रभावित करती है FMD बीमारी, ऐसे करें बचाव 

FMD-Calf थोड़ी सी देखभाल से बछड़ों को खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी जैसी खतरनाक बीमारी से बचाया जा सकता है. इसके लिए डाक्टर की सलाह पर शेड में कुछ खास इंतजाम किए जा सकते हैं. साथ ही बछड़ों के व्यवहार पर भी नजर रखनी होगी. जैसे ही FMD के लक्षण दिखाई दें तो फौरन ही डॉक्टर के बताए गए उपायों पर काम करना शुरू कर दें. 

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FMD-Calf: गाय-भैंस के बछड़ों के हार्ट को प्रभावित करती है FMD बीमारी, ऐसे करें बचाव पेरियार गाय को मिला देसी नस्‍ल का दर्जा (सांकेतिक तस्‍वीर-AI Generated)

लंपी और खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी को लेकर हाई अलर्ट जारी हो चुका है. एफएमडी के बारे में तो ये आशंका जताई जा रही है कि इसका असर पूरे देश में देखा जा सकता है. वहीं लंपी देश के 220 जिलों में अपना असर दिखा सकती है. दोनों ही संक्रमण वाली बीमारियां हैं. इसमे अगर एफएमडी की बात करें तो ये गाय-भैंस के साथ ही उनके बछड़ों पर भी असर डालती है. बछड़ों के हार्ट पर इसका असर देखा जाता है. बड़े पशुओं की तरह से ही बछड़ों को भी उतनी ही परेशानी उठानी पड़ती है. 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि बछड़ों में ये कम ही होती है, लेकिन जब होती है तो बड़े पशु के जैसी परेशानियां बछड़ों को उठानी पड़ती है. खासतौर पर सर्दियों में इसकी होने की आशंका ज्यादा रहती है. इसलिए बछड़ों के शेड में ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है.  

बछड़ों को ऐसे बचाएं FMD से

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि FMD अगर बछड़ों में होती है तो वो उनके हॉर्ट को भी प्रभावित करती है. ऐसा होने पर बछड़ों की मौत तक हो जाती है. इसलिए जहां भी FMD संक्रमण फैला हो या फैलने की आशंका हो तो वहां बछड़ों की खास देखभाल करनी चाहिए. अगर बछड़ों में लक्षण दिखाई दें तो बछड़ों के शेड में भी दवाई का छिड़काव जरूरी हो जाता है. संक्रमण फैलते ही तेज बुखार के साथ मुंह और पैर में छाले हो जाते हैं. ऐसे कुछ लक्षण दिखाई देने पर फौरन ही शेड में ये जरूरत काम शुरू कर देने चाहिए. 

  • शेड को 0.1 फीसद पोटेशियम परमैंगनेट के घोल से धोना चाहिए. 
  • घावों पर बोरोग्लिसरीन लगानी चाहिए. 
  • पैरों को फिनाइल के घोल से धोना चाहिए.
  • संक्रमित बछड़े को स्वस्थ बछड़ों से अलग कर दें. 
  • बछड़ों का टीकाकरण एक महीने, तीन महीने और छह महीने की उम्र में कराना चाहिए.
  • हर छह महीने पर वैक्सीनेशन कराते रहना चाहिए. 
  • पेट के कीड़े मारने के लिए पाइपरजीन देना चाहिए. 
  • पशु शेड को साफ रखने से बाहरी कीड़े अंदर नहीं आते हैं. 
  • लेमनग्रास, तुलसी और निर्गुंडी जैसे फीड को शेड में लटकाना चाहिए.  

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