Tips for Animal Pregnancy: पहला बच्चा देने के बाद बांझ न हों गाय-भैंस तो जरूर अपनाएं ये 17 टिप्स Tips for Animal Pregnancy: पहला बच्चा देने के बाद बांझ न हों गाय-भैंस तो जरूर अपनाएं ये 17 टिप्स
Tips for Animal Pregnancy अक्सर पशुपालक बच्चा होने के तीन-चार घंटे बाद ही गाय-भैंस से नजर हटा लेते हैं. गाय-भैंस के बच्चा देने और जेर गिरने के बाद पशुपालक दूसरे काम में लग जाते हैं. इससे पशु के बांझ होने और उत्पादन कम होने का खतरा बढ़ जाता है. और 72 घंटे तक बरती गई ये ही लापरवाही गाय-भैंस को बांझ बना देती है.
गायों की खास देखभालनासिर हुसैन - New Delhi,
- Jan 29, 2026,
- Updated Jan 29, 2026, 12:09 PM IST
गाय-भैंस जब पहली बार गर्भवती होती है तो पशुपालक पहले बच्चे को लेकर खास उत्साहित रहते हैं. लेकिन खुशी के साथ-साथ एक डर भी बना रहता है कि पहला बच्चा देने के बाद पशु कहीं बांझ न हो जाए. पता नहीं दोबारा गाय-भैंस गाभिन होगी या नहीं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो बहुत सारे केस में पहला बच्चा देने के बाद गाय-भैंस दोबारा गाभिन नहीं होती हैं. कभी-कभी तो कुछ मामलों में गाय-भैंस पहला ही बच्चा नहीं देती हैं. हालांकि इसके पीछे एक बड़ा कारण खुराक को भी बताया जाता है. वैसे कई छोटी-बड़ी होने वाली बीमारियों के चलते भी गाय-भैंस बच्चा नहीं देती हैं.
हालांकि हर एक पशुपालक की चाहत होती है कि उसकी गाय या भैंस जो भी है वो हर साल बच्चा दे. प्राकृतिक रूप से गाय-भैंस का प्रजनन काल भी ऐसा है कि उससे हर साल बच्चा लिया जा सकता है. लेकिन पशुपालकों की लापरवाही के चलते की पशु छोटी-बड़ी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. अक्सर पशुपालक गाय-भैंस के साथ उस वक्त लापरवाही बरतते हैं जब उसे देखभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है.
72 घंटे में जरूर पहचानें ये लक्षण
- बच्चा देने के बाद कुछ भैसों के गर्भाशय में मवाद पड़ जाता है.
- मवाद की मात्रा कुछ मिली से लेकर कर्इ लीटर तक हो सकती है.
- बच्चा देने के दो महीने बाद तक गर्भाशय में संक्रमण हो सकता है.
- मवाद पड़ने पर भैंस की पूंछ के आसपास चिपचिपा मवाद दिखार्इ देता है.
- मवाद पड़ने पर भैंस की पूंछ के पास मक्खियां भिनकती रहती हैं.
- भैंस के बैठने पर मवाद अक्सर बाहर निकलता रहता है.
- मवाद देखने में फटे हुए दूध की तरह या लालपन लिए हुए गाढ़े सफेद रंग का होता है.
- पूंछ के पास जलन होने के चलते पशु पीछे की ओर जोर लगा़ते रहते हैं.
- जलन ज्यादा होने पर पशु को बुखार हो सकता है.
- संक्रमण के चलते भूख कम हो जाती है और दूध सूख जाता है.
- इलाज के तौर पर बच्चेदानी में दवार्इ रखी जाती है.
- पीडि़त पशु को इंजेक्शन लगाकर भी इलाज किया जाता है.
- पीडि़त पशु का इलाज कम से कम तीन से पांच दिन कराना चाहिए.
- पूरा इलाज न करवाने पर पशु बांझ हो सकता है.
- इस बीमारी के बाद पशु हीट में आए तो पहले डॉक्टरी जांच करा लें.
- डॉक्टरी जांच के बाद ही प्राकृतिक या कृत्रिम गर्भाधान कराना चाहिए.
- इस बीमारी के बाद हीट के एक-दो मौके छोड़ने पड़ सकते हैं.
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