Winter Care in Animal Shed: गाय-भैंस के बाड़े में अंगीठी-धुआं इस्तेमाल कर रहे हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर 

Winter Care in Animal Shed: गाय-भैंस के बाड़े में अंगीठी-धुआं इस्तेमाल कर रहे हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर 

Winter Care in Animal Shed पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उनके बाड़े में गर्माहाट पैदा करने के लिए किए जाने वाले इंतजाम कई बार उनके लिए जानलेवा और नुकसानदायक साबित होते हैं. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि बाड़े में अंगीठी और हीटर का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए एक्सपर्ट की ओर से एडवाइजरी जारी की जाती है जिसका पालन करना जरूरी होता है. 

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Winter Care in Animal Shed: गाय-भैंस के बाड़े में अंगीठी-धुआं इस्तेमाल कर रहे हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर 

जनवरी का आखि‍री हफ्ता चल रहा है. माना जाता है कि जनवरी खत्म होते ही ठंड भी कम होने लगती है. लेकिन जनवरी खत्म होने से पहले ही एक बार फिर मौसम ने रुख बदल लिया है. बीते दो दिन से मौसम बारिश, ओले और ठंडी हवाओं में बदल गया है. ऐसे में मौसम का विपरीत असर इंसान ही नहीं पशुओं पर भी पड़ता है. बदलता मौसम पशुओं और पशुपालक दोनों के लिए ही परेशानी लेकर आता है. ऐसे में सबसे ज्यादा ये जरूरी होता है कि पशुओं को ठंड से कैसे बचाया जाए. क्योंकि एक बार अगर पशुओं को ठंड लग गई तो गाय-भैंस और भेड़-बकरी बीमार पड़ जाएंगे. और बड़ी परेशानी ये है कि पशुओं के बीमार होते ही पशुपालक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है. पशुओं के इलाज के खर्च के साथ ही पशुओं का उत्पादन घटने लगता है.

इस बदलते मौसम से बचाव के लिए ही पशुपालक सर्दी बढ़ने पर पशुओं के बाड़े में अंगीठी-हीटर और धुएं का इंतजाम करते हैं. लेकिन क्या बाड़े में अंगीठी-हीटर और धुएं का इस्तेमाल करना सही है. या फिर इस्तेमाल करने का सही तरीका तरीका क्या हो सकता है. इसी तरह के सवालों पर लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार ने एक एडवाजरी जारी की है. वाइस चांसलर डॉ. विनोद कुमार वर्मा पशुओं के बाड़े में अंगीठी, कोयला, लकड़ी और धुएं वाले हीटर के इस्तेमाल को बहुत खतरनाक और जानलेवा बताया है. साथ ही इसके इस्तेमाल के दौरान बहुत ज्यादा ऐहतियात बरतने की सलाह दी है.

लापरवाही हुई तो ये होंगे नुकसान 

लुवास के एक्सपर्ट डॉ विशाल शर्मा का कहना है कि सर्दियों में पशुओं को ठंड से बचाने के लिए बंद या कम हवादार पशुओं के बाड़े में अंगीठी या कोयला जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस उत्पन्न होती है. यह गैस रंगहीन एवं गंधहीन होती है, जिससे इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है. गैस के कारण पशुशाला में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे पशुओं में घुटन, सुस्ती, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी तथा गंभीर मामलों में मौत तक हो सकती है. यह खतरा विशेष रूप से बछड़े बछड़ियों, गर्भवती, बीमार और कमजोर पशुओं में ज्यादा देखा जाता है.

पशुओं के बाड़े में कतई न करें ये काम 

लुवास के एक्सपर्ट ने पशुपालकों को खासतौर पर सलाह दी है कि रात के वक्त पशुओं के बाड़े में अगीठी, कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. अगर किसी परिस्थिति में गर्माहट की जरूरत हो तो सिर्फ खुले और पूरी तरह हवादार बाड़े में तय वक्त के लिए ही इसका इस्तेमाल करे. साथ ही सोने से पहले आग को पूरी तरह से बुझा दें. बाड़े में खिड़की और वेटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करें.

साथ ही एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि सूखा और मोटा बिछावन, ठंडी हवा रोकने के लिए तिरपाल या पर्दों का इस्तेमाल, पशुओं को झुंड में रखना और जरूरत पड़ने पर इन्फ्रारेड बल्ब का सुरथित इस्तेमाल करें. साथ ही सर्दी के मौसम में पशु आहार और पोषण पर भी खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है. जिससे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे. 

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