नई तकनीक की मदद से पुंगनूर गाय के इस बछड़े को जन्म दिया गया है.जब गाय-भैंस गर्भवती हों तो उनके वजन की निगरानी करना बहुत जरूरी हो जाता है. क्योंकि एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चा देने से पहले या बाद में गाय-भैंस का वजन घटने लगता है. इस तरह से वजन घटना कोई सामान्य नहीं होता है. ये एक बड़ी परेशानी का संकेत होता है. क्योंकि इसे लेकर पशुपालक अगर वक्त से अलर्ट नहीं हुए या फिर कुछ जरूरी उपाय नहीं किए तो फिर इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. एकसपर्ट के मुताबिक ऐसा तब होता है जब गर्भकाल के दौरान गाय को पोषण से भरपूर खुराक दी जाती है. जबकि इस दौरान गाय को घूमने-फिरने और व्यायाम का मौका नहीं मिल पाता है.
जिसके चलते शरीर में ग्लूकोज की मात्रा घट जाती है और फैट बढ़ जाता है. इसलिए गाय के बच्चा देने से पहले और बच्चा देने के 5-10 दिन तक उसकी देखभाल बहुत जरूरी होती है. क्योंकि कीटोसिस बीमारी उसी गाय को होती है जो दूध का उत्पादन ज्यादा करती है. दूध ज्यादा देने की वजह से उसे खुराक भी ज्यादा और अच्छी दी जाती है. लेकिन लगातार खड़े-खड़े खाते रहने के चलते गाय इस परेशानी की चपेट में आ जाती है.
छह सप्ताह तक हर रोज 110 ग्राम सोडियम प्रोपियोनेट की रोग निरोधी खुराक दें.
70 दिनों तक 350 मिली प्रति दिन प्रोपलीन ग्लाइकॉल या छह फीसद सांद्रित राशन दें.
स्तनपान के छठे सप्ताह के दौरान रक्त शर्करा और दूध कीटोन का आकलन करें.
गायों की तरह ही फ़ीड मिश्रण के रूप में 25 मिलीग्राम हर रोज मोनेंसिन सोडियम दें.
सुनिश्चित करें कि गर्भावस्था के दूसरे भाग में पोषण का स्तर बढ़ रहा हो.
गर्भ के आखिर के दो महीनों के दौरान 0.25 किलो प्रति दिन की दर से 10 फीसद प्रोटीन युक्त सांद्रित अंतिम दो सप्ताह के दौरान एक किलो प्रति दिन तक बढ़ रहा हो.
खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त भोजन देना तय करें.
चारागाह में आश्रय उपलब्ध होना चाहिए.
भेड़ों को प्रतिदिन दो बार अच्छी तरह से खिलाए गए झुंड में बाहर ले जाना चाहिए.
यदि चारागाह उपलब्ध है, तो केवल सांद्रित भोजन ही खिलाना चाहिए.
ये भी पढ़ें- Egg Rate: बाजार में पहली बार 8 से 12 रुपये तक का बिक रहा अंडा, ये है बड़ी वजह
ये भी पढ़ें- Egg Testing: अंडा खरीद रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये काम, ऐसे जांचें अंडे की क्वालिटी
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today