Goat Farming: खास तीन नस्ल की बकरियां कराएंगी भरपूर मुनाफा, मंत्रालय ने भी गिनाईं खूबियां 

Goat Farming: खास तीन नस्ल की बकरियां कराएंगी भरपूर मुनाफा, मंत्रालय ने भी गिनाईं खूबियां 

Goat Farming गोट एक्सपर्ट का कहना है कि सिरोही, उस्मानाबादी और संगमनेरी नस्ल की बकरियों का पालन मीट के लिए किया जाता है. सिरोही वैसे तो राजस्थान की नस्ल है, लेकिन महाराष्ट्र में भी इसका पालन किया जा रहा है. महाराष्ट्र में इनके मीट की बहुत डिमांड है. इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान भी इनकी खासी डिमांड रहती है. 

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Goat Farming: खास तीन नस्ल की बकरियां कराएंगी भरपूर मुनाफा, मंत्रालय ने भी गिनाईं खूबियां सिरोही नस्ल का बकरा. फोटो क्रेडिट-गोट वाला

पीएम नरेन्द्र मोदी खुद मन की बात कार्यक्रम में बकरी पालन के बारे में बोल चुके हैं. हाल ही में यूपी दिवस के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी बकरी पालन को बढ़ावा देने वाली बातें कही हैं. गोट एक्सपर्ट की मानें तो ये सब बातें ऐसे ही नहीं हो रही हैं. इसके पीछे भी एक बड़ी वजह है. जैसे कि देश में बकरी पालन तेजी से बढ़ रहा है. बकरी पालन के लिए लोन लेने वालों की संख्यां में भी इजाफा हो रहा है. नेशनल लाइव स्टॉरक मिशन के तहत लोने के लिए सबसे ज्यादा आवेदन बकरी पालकों के ही आ रहे हैं. इतना ही नहीं खुद केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय भी बकरी पालन को बढ़ावा दे रहा है. मंत्रालय अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बकरियों से जुड़ी जानकारियां शेयर कर रहा है. 

किसी नस्ल की बकरी को पालकर कितना मुनाफा होगा ये भी बता रहा है. अभी हाल ही में मंत्रालय ने बकरियों की तीन खास नस्ल के बारे में जानकारी शेयर की है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के साइंटिस्ट का कहना है कि बकरे-बकरी का पालन दूध, मीट और ब्रीडिंग के लिए किया जाता है. बकरे के मीट की डिमांड तो विदेशों तक में है. वहीं देश में अब दूध की डिमांड भी लगातार बढ़ती जा रही है. 

ऐसे करें सिरोही नस्ल की पहचान 

  • बकरे-बकरी का रंग भूरा और सफेद मिक्स होता है. 
  • शरीर पर बाल मोटे और छोटे होती हैं. 
  • बकरे और बकरी दोनों का ही शरीर मध्यम आकार का होता है. 
  • पूंछ मुड़ी हुई है और मोटे नुकीले बाल वाली होती है. 
  • सींग छोटे और नुकीले, ऊपर और पीछे की ओर मुड़े हुए होते हैं.
  • बकरे का औसत वजन 50 और बकरी का 23 किलोग्राम तक होता है.
  • जन्म के समय मेमने का औसत वजन दो किलोग्राम तक होता है.
  • इस नस्ल  की बकरी साल में एक बार जुड़वां बच्चे देती है. 
  • बकरी पहला बच्चा  19 साल की उम्र में देती है. 
  • बकरी का दुग्ध  काल 175 दिन का होता है. 
  • अपने दुग्धु काल में बकरी 71 लीटर तक दूध देती है. 

दूध-मीट दोनों के लिए पालते हैं उस्मानाबादी

उस्मानाबादी नस्ल मुख्य रूप से महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के लातूर, तुलजापुर और उदगीर इलाकों में पाली जाती हैं. बकरियां आकार में बड़ी होती हैं. अगर कलर की बात करें तो 73 फीसद बकरे-बकरी पूरी तरह से काले रंग के होते हैं. वहीं 27 फीसद सफेद और भूरे रंग के होते हैं. इस खास नस्ल के बकरे-बकरी को दूध और मीट दोनों के लिए ही पाला जाता है. इस नस्ल की बकरी का दुग्ध काल चार महीने का होता है. बकरी हर रोज 500 ग्राम से लेकर डेढ़ लीटर तक दूध देती है. बकरी साल में दो बार दो-दो बच्चे देती है. बकरे में से ड्रेस किया हुआ 45 से 50 किलो तक मीट निकल आता है. 

ये है संगमनेरी बकरे-बकरी की खास पहचान 

संगमनेरी नस्ल आमतौर पर महाराष्ट्र के पूना और अहमदनगर जिलों में पाई जाती है. इस नस्ल में मध्यम आकार के बकरे-बकरी होते हैं. संगमनेरी बकरे-बकरी का कोई एक समान रंग नहीं होता है, यह सफेद, काले या भूरे रंग के अलावा अन्य रंगों के धब्बों के साथ भी पाए जाते हैं. कान नीचे की ओर झुके हुए हैं. बकरे-बकरी दोनों के सींग पीछे और ऊपर की ओर होते हैं. संगमनेरी नस्ल की बकरी दिनभर में 500 से लेकर एक लीटर तक दूध देती है. बकरी का कुल दुग्धे काल 165 दिन का होता है.

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