पंजाब मिल्कफेड ने पशुचारे के लिए एनडीडीबी से मांगी मदद (सांकेतिक तस्वीर)दुधारू पशुओं की संख्या के मामले में नंबर वन, विश्व में दूध उत्पादन में नंबर वन, यहां तक की गाय के दूध उत्पादन में भी भारत विश्व के सभी देशों के बीच नंबर वन है. फिर भी देश में पशुपालन उस रफ्तार से नहीं बढ़ रहा है जो रफ्तार इस वक्त होनी चाहिए. इसी के चलते देश में पशुपालकों का मुनाफा भी नहीं बढ़ रहा है. बहुत सारे पशुपालक परिवारों में नई पीढ़ी सिर्फ इसीलिए गाय-भैंस और भेड़-बकरी पालन में नहीं आ रही है.
डेयरी और पशुपालन सेक्टर की इस हालत को देखते हुए नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (NDDB) का कहना है कि पशुपालन में लागत को कम करना और पशुपालकों के मुनाफे को बढ़ाना कोई मुश्किल काम नहीं है. इसे करने के लिए सिर्फ जरूरत इस बात की है कि पशुपालक साइंटीफिक तरीके से ही पशुपालन करें. NDDB समेत दूसरे संस्थानों के बताए सुझावों पर अमल करते हुए पशुपालन करें.
NDDB से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि फायदेमंद डेयरी के लिए किसानों को हाई जेनेटिक क्वालिटी वाले बैल का वीर्य प्रजनन के लिए इस्तेमाल करना चाहिए. साथ ही नहीं पशुओं के लिए वैज्ञानिक आधार पर तय किए गए मानकों के अनुसार फीड-फोडर खुराक के तौर पर देना चाहिए. देखभाल के तौर-तरीकों को भी इसी आधार पर अपनाना चाहिए. दूसरी खास बात ये है कि इलाज से बेहतर रोकथाम है, इस बात का हर पशुपालक को पालन करना चाहिए.
और सबसे बड़ी बात ये कि पशुओं का वैक्सीनेशन वक्त से कराना चाहिए. इससे पशु का विकास भी होता है और उसकी उम्र भी बढ़ती है. वहीं समय से पशुओं को पेट के कीड़े वाली दवा खिलाने से बड़े नुकसान को टाला जा सकता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि बछड़ा पालन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है. क्योंकि सभी तरह के पशुपालन में पशु का बच्चा एक बड़ा मुनाफा होता है. इसलिए बछड़े की देखभाल बहुत जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने पशुपालन क्षेत्र में डिजिटलीकरण के फायदों पर भी चर्चा की. डिजिटलीकरण के तहत गाय पालन में काऊ बैल्ट का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई.
इसके बारे में बताया कि ऐसा करने से हम बहुत सारी बीमारियों के बारे में वक्त रहते पता चल जाता है. जिससे बीमारी पर होने वाला खर्च तो बचता ही है, साथ ही पशु भी परेशानी से दूर रहता है और उसके उत्पादन पर किसी भी तरह का कोई असर नहीं पड़ता है.
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