Placenta Issues बच्चा देने के बाद रुक जाती है गाय-भैंस की जेर, कैसे निकालें और क्या करें

Placenta Issues बच्चा देने के बाद रुक जाती है गाय-भैंस की जेर, कैसे निकालें और क्या करें

Placenta Issues गाय-भैंस के बच्चा देने के दौरान अक्सर छोटी-छोटी कुछ ऐसी बातें होती हैं जिनका खासतौर पर बहुत ख्याल रखना पड़ता है. इसी में से एक है जेर का गिरना. हालांकि कुछ घंटे की ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. लेकिन अक्सर पशुपालकों की कुछ लापरवाही के चलते ये इतनी जटिल हो जाती है कि गाय-भैंस में संक्रमण फैलने का खतरा बन जाता है. ऐसे में फौरन ही पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए. 

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Placenta Issues बच्चा देने के बाद रुक जाती है गाय-भैंस की जेर, कैसे निकालें और क्या करेंनई तकनीक की मदद से पुंगनूर गाय के इस बछड़े को जन्म दिया गया है.

जब गाय-भैंस बच्चा देने वाली होती है तो पशुपालक बेहद खुश होता है. क्योंकि बछिया आएगी तो दूध उत्पादन बढ़ेगा. और अगर मेल बछड़ा हुआ तो उसे एक साल की उम्र पर बेचकर मुनाफा कमाया जा सकता है. लेकिन पशुओं के बच्चा होने के दौरान एक ऐसी भी बड़ी परेशानी आती है जिसके बारे में सोचकर पशुपालक पहले से ही परेशान होने लगता है. बच्चा होने तक वो हर पाल यही दुआ करता है कि गाय-भैंस की जेर न रुके या न फंसे. असल में बच्चेदानी के अंदर जिस थैली में बच्चा रहता है वो बच्चे के जन्म के साथ फट जाती है. और जब गाय-भैंस बच्चा दे देती है तो उसके तीन से आठ घंटे में जेर खुद ही बाहर निकल आती है और गिर जाती है. 

लेकिन कई बार जेर 12 से 15 घंटे बाद भी नहीं गिरती है. इसकी को जेर का रुकना या फंसना कहते हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो भैंस का गर्भकाल 310 दिन का होता है. भैंस के गाभि‍न होते ही उसे शुरुआत में तो देखभाल की जरूरत होती ही है, साथ में गर्भकाल के आखि‍री तीन महीने में भी बहुत जरूरत पड़ती है. लेकिन उससे भी खास देखभाल होती है जब बच्चा देने के बाद उसकी जेर गिरती है. 

इसलिए रुक या फंस जाती है जेर 

  1. भैंस के समय से पहले बच्चा देना की वजह से.
  2. गाय-भैंस का गर्भपात होने के चलते. 
  3. खुराक में कैल्शियम की कमी होने पर. 
  4. संतुलित खुराक ना मिलने पर बच्चे का कमजोर होना. 
  5. गर्भ में पल रहे बच्चे का आकार काफी बड़ा होने पर. 

जेर रुकने पर जरूर करें ये खास काम 

  • जेर रूकने पर गाय-भैंस को साफ जगह बांधना चाहिए.
  • जेर बाहर आने पर भैंस जमीन पर बैठती है तो उसके साथ गंदगी लग जाती है. 
  • कई बार जेर के साथ लगी गंदगी की वजह से गर्भाशय में संक्रमण हो जाता है. 
  • जब तीन से छह घंटे बाद जेर ना गिरे तो पशु चिकित्सक की सलाह लें. 
  • जेर हमेशा 24 घंटे बाद ही डाक्टर से निकलवानी चाहिए. 
  • 24 घंटे बाद जेर की पकड़ गर्भाशय से कमजोर पड़ जाती है. 
  • निकालने से पहले, भैंस का पिछला हिस्सा, जेर साबुन और साफ पानी से धो लें.
  • जेर निकलवाने में आधा घंटे से अधिक का समय नहीं लगना चाहिए.
  • जेर निकालते समय हाथ साफ और नाखून कटे होने चाहिए.
  • डाक्टर से भी जेर पूरी नहीं निकले तो उस पर जोर नहीं डालें. 
  • कई बार अंदर चिपकी जेर अपने आप थोड़ी-थोड़ी कटकर बाहर आती रहती है.
  • जेर निकालने के बाद डाक्टर से बच्चेदानी में उचित गोलियां रखवा लें.
  • बच्चेदानी में रखी जाने वाली गोलियां तीन से पांच दिन रखवाएं. 
  • जेर रूक जाए तो उस पर ईट-पत्थर नहीं बांधे.
  • जेर पर ईट-पत्थर बांधने से बच्चेदानी पलट सकती है. 

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