Highest Milking: गायों से 90 लीटर तक दूध चाहिए तो ये है देखभाल और खि‍लाने का ‘हरप्रीत’ तरीका

Highest Milking: गायों से 90 लीटर तक दूध चाहिए तो ये है देखभाल और खि‍लाने का ‘हरप्रीत’ तरीका

ज्यादा दूध देने के चलते पंजाब के हरप्रीत की अलग-अलग गाय अब तक 10 बार पहला इनाम जीत चुकी हैं. हरप्रीत के फार्म पर बहुत सारी ऐसी गाय हैं जो औसत 70 लीटर तक दूध देती हैं. अब हरप्रीत ऐसी गाय तैयार कर रहे हैं जो 90 लीटर तक दूध देगी. ये गाय 2027 में प्रोग्रेसिव डेयरी फार्म एसोसिएशन (PDFA) लुधि‍याना के मिल्किंग कम्पटीशन में हिस्सा लेगी. 

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Highest Milking: गायों से 90 लीटर तक दूध चाहिए तो ये है देखभाल और खि‍लाने का ‘हरप्रीत’ तरीकाये हैं हरप्रीत के डेयरी फार्म की गाय.

प्रोग्रेसिव डेयरी फार्म एसोसिएशन (PDFA) लुधि‍याना में मिल्किंग कम्पटीशन आयोजित करती है. और हर बार इस आयोजन के बाद एक सवाल उठता है कि कैसे गाय इतना दूध दे देती हैं. अगर साल 2026 की बात करें तो इस बार गाय ने 80 लीटर दूध देकर पहला इनाम जीता है. इससे पहले 2025 में गाय ने 82 लीटर दूध देकर पहले इनाम के तौर पर ट्रैक्टर जीता था. 82 लीटर दूध देने वाली गाय हरप्रीत की थी. गायों को खि‍लाने और उनकी देखभाल करने का हरप्रीत का अपना एक अलग तरीका है. 

हरप्रीत मिल्किंग कम्पटीशन में अब तक 10 बार पहला इनाम जीत चुके हैं. 2026 में हरप्रीत ने पीडीएफए के कम्पटीशन में हिस्सा नहीं लिया था. लेकिन हरप्रीत का दावा है कि 2027 में वो 90 लीटर दूध देने वाली गाय लेकर आएंगे. हर रोज 70 लीटर से ज्यादा दूध देने वाली गायों की उनके यहां एक लम्बी फेहरिस्त है. हरप्रीत की गायों को मिल्क टैंकर के नाम से भी जाना जाता है.  

ये है गाय पालन का हरप्रीत तरीका 

मोगा, पंजाब में नूरपुर हाकिम गांव के हरप्रीत ने किसान तक को बताया कि उनके पास इस वक्त करीब 250 गाय हैं. इसमे से 150 के करीब दूध दे रही हैं. 15-20 ऐसी गाय हैं जो 70 लीटर और उससे ज्यादा दूध दे रही हैं. गायों के ज्यादा दूध देने के पीछे जो वजह है वो कोई एक नहीं है. इसमे हमने विदेशी मॉडल भी अपनाया है. जैसे हम हर वक्त गायों को खुला रखते हैं. फार्म पर गाय यहां-वहां आराम से घूमती रहती हैं. इस दौरान उनके चारा खाने और पानी पीने पर कोई रोक-टोक नहीं होती है.

सुबह ही ऑटोमैटिक गाड़ी चारा खाने वाली जगह पर चारा डाल दिया जाता है. एक गाय को करीब 70 किलो वजन तक की खुराक दिनभर में दी जाती है. इसमे हरा और सूखा चारा, दाना और मिनरल्स खाने को दिए जाते हैं. दिनभर पर चारा गायों के सामने रहता है. जब दिल करता है खाती हैं. और जब दिल करता है तो पानी पीती हैं. इसमे से शाम तक एक-दो फीसद चारा ही बचता है.

अलग-अलग नहीं खि‍लाते चारा 

हरप्रीत का ये भी कहना है कि हम हरा चारा, सूखा चारा और मिनरल्स अलग-अलग खाने को नहीं देते हैं. मशीन से मिलाकर टोटल मिक्स राशन (टीएमआर) की शक्ल में गायों को उनकी खुराक दी जाती है. हम सालभर हरे चारे पर निर्भर नहीं रहते हैं. ज्यादातर हम मक्का के साइलेज का इस्तेमाल करते हैं. क्योंकि गाय खुल्ला घूमती हैं तो इसके चलते वो तनाव मुक्त रहती हैं. इससे दूध उत्पादन तो बढ़ता ही है, साथ में बीमारियां भी कम हो जाती हैं और दवाईयों की लागत ना के बराबर रह जाती है.

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